January 15, 2026

 पंचायत चुनाव 2025: पहले चरण में लोकतंत्र का पर्व, दोपहर तक 45% से अधिक मतदान | मुख्यमंत्री धामी ने खटीमा में डाला वोट

सोशल मीडिया का सितारा, पंचायत चुनाव में फीका क्यों पड़ा? — जब 'वायरल' चेहरे ज़मीन पर टिक न सके
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 पंचायत चुनाव 2025: पहले चरण में लोकतंत्र का पर्व, दोपहर तक 45% से अधिक मतदान | मुख्यमंत्री धामी ने खटीमा में डाला वोट
दैनिक प्रभातवाणी संवाददाता | 25 जुलाई 2025

उत्तराखंड के ग्रामीण जनजीवन में आज का दिन लोकतंत्र के गौरव का प्रतीक बन गया। राज्य के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2025 के पहले चरण की वोटिंग शुक्रवार को शांतिपूर्ण और उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हो रही है। गांव-गांव में सुबह से ही मतदाताओं की लम्बी कतारें देखने को मिलीं, जिनमें महिलाओं, बुज़ुर्गों और युवाओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही। दोपहर 2 बजे तक राज्य के प्रमुख जिलों में अच्छा-खासा मतदान प्रतिशत दर्ज किया गया—जिसमें पौड़ी जिले में 45.61% और चमोली में 19.97% मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।

इस बार के पंचायत चुनावों में कुल 26 लाख से अधिक मतदाता शामिल हो रहे हैं। यह चुनाव इसलिए भी विशेष महत्व रखता है क्योंकि इसके माध्यम से राज्य की पंचायतों में नई नेतृत्व पीढ़ी का चयन होगा—जो अगले पांच वर्षों तक ग्रामीण क्षेत्रों की प्रशासनिक और विकासात्मक दिशा को तय करेगी।


 लोकतंत्र का उत्सव: पर्व की तरह मनाया जा रहा पंचायत चुनाव

उत्तराखंड के जनमानस में पंचायत चुनाव केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि यह एक सांस्कृतिक और लोकतांत्रिक उत्सव की तरह देखा जाता है। चुनावी केंद्रों पर परंपरागत परिधानों में महिलाओं की भागीदारी, बुज़ुर्गों की सक्रियता और युवाओं की जागरूकता, इस बात का प्रमाण हैं कि ग्राम स्तर पर लोकतंत्र की जड़ें कितनी गहरी हो चुकी हैं।

आज पौड़ी जिले के द्वारीखाल, जयहरीखाल, थलीसैंण, और यमकेश्वर जैसे दूरस्थ इलाकों में मतदान केंद्रों पर सुबह 7 बजे से ही मतदाता पंक्तिबद्ध खड़े नजर आए। वहीं चमोली के जोशीमठ, पोखरी, घाट, थराली, और दशोली विकासखंडों में भी चुनाव को लेकर उत्साह देखा गया, हालांकि वहां मौसम की बेरुखी के कारण शुरूआती मतदान थोड़ा धीमा रहा।

गौरतलब है कि इस बार राज्य निर्वाचन आयोग ने पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए चुनावों में बैलेट पेपर का प्रयोग किया है और प्रत्येक मतदान केंद्र पर CCTV निगरानी और माइक्रो ऑब्जर्वर की तैनाती की गई है।


 मुख्यमंत्री धामी का संदेश: “लोकतंत्र की नींव गाँव से ही मजबूत होती है”

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी अपने गृह क्षेत्र खटीमा (ऊधमसिंहनगर) में अपनी माता श्रीमती बिंदेश्वरी देवी के साथ मतदान किया। उन्होंने मतदान केंद्र पर स्थानीय नागरिकों से बातचीत की और युवाओं से अपील की कि वे “गांव की सरकार को मज़बूत करने के लिए वोट करें, क्योंकि पंचायती राज ही विकास की पहली सीढ़ी है।”

मुख्यमंत्री ने मीडिया से कहा—

“उत्तराखंड की जनता इस बार लोकतंत्र में नया इतिहास रचने जा रही है। पंचायत चुनावों से चुने गए प्रतिनिधि राज्य के गांवों की दशा और दिशा तय करेंगे। हमारी सरकार हर पंचायत को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।”


उम्मीदवारों की बात: नए चेहरे, युवा नेतृत्व और महिला भागीदारी

इस चुनाव में सबसे बड़ी विशेषता रही है महिलाओं और युवाओं की जबरदस्त भागीदारी। 33% आरक्षण के तहत इस बार कई ग्राम पंचायतों और जिला पंचायतों में महिला उम्मीदवारों की संख्या में 20% की वृद्धि देखी गई है। वहीं, युवाओं—खासकर 21 से 30 वर्ष के बीच के उम्मीदवारों—की संख्या भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है।

पौड़ी के एक गांव से खड़ी हुई 24 वर्षीय रचना नेगी, जो एमए कर चुकी हैं, का कहना है—

“अब गांव में वही लोग आने चाहिए जो पढ़े-लिखे हों और तकनीकी युग की ज़रूरतों को समझते हों। पंचायतें सिर्फ सड़कों और पानी तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि स्वास्थ्य, डिजिटल शिक्षा और आजीविका सशक्तिकरण तक जाना होगा।”


 चुनाव आयोग की व्यवस्था: चाक-चौबंद सुरक्षा और पारदर्शिता

राज्य निर्वाचन आयोग ने पहले चरण के लिए कुल 5,342 मतदान केंद्र बनाए हैं, जिनमें से 723 को संवेदनशील और 319 को अति-संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। प्रत्येक केंद्र पर पुलिस बल, होमगार्ड, और पीएसी के जवानों की तैनाती की गई है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. वी. शंकर राव ने जानकारी दी कि—

“अब तक चुनाव पूरी तरह शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो रहे हैं। कहीं से किसी अप्रिय घटना की कोई पुष्टि नहीं हुई है। आयोग ने विशेष मोबाइल टीमों को तैनात किया है जो हर केंद्र पर निगरानी रख रही हैं।”


 मतगणना की तैयारी: 31 जुलाई को खुलेगा जनादेश का पिटारा

इस चरण की मतगणना 31 जुलाई 2025 को होगी। इसके लिए आयोग ने प्रत्येक ब्लॉक स्तर पर स्ट्रॉन्ग रूम स्थापित कर दिए हैं और प्रत्याशियों को बैलेट बॉक्स की निगरानी के अधिकार भी दिए गए हैं। मतगणना के दिन इंटरनेट और मोबाइल सिग्नल की व्यवस्था सीमित रखने के निर्देश भी जारी किए गए हैं, जिससे कोई अफवाह या गलत सूचना फैलने से रोकी जा सके।


 महिला मतदाताओं की जागरूकता बनी चुनाव की ताकत

उत्तराखंड की महिला शक्ति एक बार फिर पंचायत चुनाव में लोकतंत्र की रीढ़ साबित हो रही है। देहरादून के सहसपुर, विकासनगर, ऋषिकेश, और डोईवाला इलाकों में सुबह 9 बजे तक ही 35% महिलाएं मतदान कर चुकी थीं।

पिथौरागढ़ की शांति देवी (67 वर्ष) ने बताया—

“हमने देश के कई चुनाव देखे, पर अब लगता है कि पंचायत चुनाव सबसे महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये हमारे रोज़मर्रा के जीवन से जुड़े होते हैं। हम साफ-सफाई, राशन वितरण, और स्कूल की व्यवस्था उसी पंचायत से तय होती है।”


 चुनौतियाँ और सुधार की दिशा

पंचायत चुनावों में हालांकि उत्साह देखा गया, लेकिन कुछ इलाकों में चुनौतियाँ भी देखने को मिलीं—जैसे कि रुद्रप्रयाग के ऊंचाई वाले गांवों में भारी बारिश के कारण मतदान केंद्रों तक पहुंचना कठिन रहा, वहीं कुछ मतदाताओं ने नाम वोटर लिस्ट में न होने की शिकायत भी की।

चुनाव आयोग ने इन शिकायतों को गंभीरता से लिया है और अगले चरण में डिजिटल वोटर सत्यापन मोबाइल एप के ज़रिये समाधान की योजना तैयार की है।


 निष्कर्ष: ग्राम स्वराज्य की ओर उत्तराखंड का मजबूत कदम

उत्तराखंड में पंचायत चुनावों की यह प्रक्रिया ग्राम स्वराज्य की परिकल्पना को एक नया रूप देने का कार्य कर रही है। राज्य के पर्वतीय और मैदानी इलाकों में लोकतंत्र की गूंज साफ़ सुनाई दे रही है। यह स्पष्ट संकेत है कि गांव के लोग अब सिर्फ बुनियादी सुविधाओं से संतुष्ट नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण नेतृत्व और पारदर्शी शासन की मांग कर रहे हैं।

इस चुनाव में जिस तरह का उत्साह, जागरूकता और सकारात्मक माहौल देखने को मिला, वह उत्तराखंड को एक नवीन पंचायती युग की ओर ले जाता प्रतीत होता है।