January 13, 2026

देहरादून की प्रियंका और रीठा रैतोली की देवरानी-जेठानी ने रचा इतिहास, पंचायत चुनाव में उभरे नए जननेता

उधमसिंह नगर | दिनांक: 2 अगस्त 2025 "चुनाव परिणाम बना जानलेवा: समर्थक ने प्रत्याशी की हार के बाद की आत्महत्या, गांव में शोक की लहर"

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दैनिक प्रभातवाणी
1 अगस्त 2025 | विशेष रिपोर्ट

देहरादून की प्रियंका और रीठा रैतोली की देवरानी-जेठानी ने रचा इतिहास, पंचायत चुनाव में उभरे नए जननेता
देहरादून की प्रियंका और रीठा रैतोली की देवरानी-जेठानी ने रचा इतिहास, पंचायत चुनाव में उभरे नए जननेता

देहरादून की प्रियंका और रीठा रैतोली की देवरानी-जेठानी ने रचा इतिहास, पंचायत चुनाव में उभरे नए जननेता

देहरादून से लेकर पहाड़ी गांवों तक हालिया पंचायत चुनावों ने एक नया संदेश दिया है — नेतृत्व अब उम्र, रिश्तों या पृष्ठभूमि का मोहताज नहीं। इस बार के चुनाव परिणामों में दो घटनाएं विशेष रूप से चर्चा का विषय बनी हुई हैं: देहरादून की 21 वर्षीय प्रियंका की जीत और ग्राम पंचायत रीठा रैतोली में देवरानी–जेठानी के रूप में दो महिलाओं की विजय।

देहरादून में 21 वर्षीय प्रियंका की ऐतिहासिक जीत

देहरादून जनपद में एक साधारण परिवार से आने वाली प्रियंका ने मात्र 21 वर्ष की आयु में पंचायत सदस्य पद पर जीत दर्ज कर इतिहास रच दिया है। कॉलेज में पढ़ाई के साथ-साथ सामाजिक कार्यों में सक्रिय रही प्रियंका ने युवाओं को यह दिखा दिया है कि अब नेतृत्व की बागडोर सिर्फ उम्रदराज़ हाथों में नहीं, बल्कि जोश और समझ की नई पीढ़ी के पास भी जा सकती है।

प्रियंका ने चुनावी मैदान में उतरते ही महिलाओं, युवाओं और स्थानीय मुद्दों को अपने घोषणापत्र का प्रमुख हिस्सा बनाया। उन्होंने जल संकट, स्थानीय सड़क निर्माण और डिजिटल शिक्षा जैसे मुद्दों को लेकर सशक्त योजना प्रस्तुत की, जिसे ग्रामीण मतदाताओं का भरपूर समर्थन मिला।

प्रियंका की जीत न केवल एक व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि पूरे राज्य में युवा नेतृत्व को लेकर बढ़ती आशाओं का प्रतीक भी बन चुकी है।

ग्राम पंचायत रीठा रैतोली: जब देवरानी–जेठानी बनीं एक-दूसरे की ताकत

अल्मोड़ा जिले की ग्राम पंचायत रीठा रैतोली में इस बार पंचायत चुनावों में अनोखा दृश्य देखने को मिला। यहाँ दो महिलाएं — एक देवरानी और दूसरी जेठानी — चुनावी मैदान में उतरीं और दोनों ने ही अलग-अलग पदों पर शानदार जीत हासिल की।

जहां जेठानी गीता देवी ने ग्राम प्रधान का पद जीता, वहीं देवरानी सुनीता देवी क्षेत्र पंचायत सदस्य के रूप में विजयी रहीं। रिश्तों की पारंपरिक सीमाओं को तोड़ते हुए दोनों महिलाओं ने एक-दूसरे का न केवल समर्थन किया, बल्कि चुनाव प्रचार में एकजुट होकर गांव के विकास की साझा योजना भी प्रस्तुत की।

यह जीत केवल दो पदों पर अधिकार पाने की नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण की प्रेरणादायक मिसाल है। अक्सर सास–बहू, जेठानी–देवरानी के रिश्तों में खींचतान की कहानियाँ सुनने को मिलती हैं, लेकिन रीठा रैतोली की यह जोड़ी अब बदलाव, एकता और विकास का प्रतीक बन चुकी है।

महिलाओं और युवाओं का बढ़ता राजनीतिक दखल

इन दोनों घटनाओं ने यह सिद्ध कर दिया है कि अब पंचायतों में महिलाओं और युवाओं की भागीदारी केवल नाममात्र की नहीं रही। अब ये वर्ग नीतियाँ बना रहे हैं, निर्णय ले रहे हैं और विकास की धारा को नए आयाम दे रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में युवा नेतृत्व और महिला शक्ति का बढ़ता प्रभाव लोकतंत्र को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत करेगा।

इन विजयों से स्पष्ट है कि मतदाता अब चेहरों से ज्यादा विचार और कार्यशैली पर ध्यान दे रहे हैं। सोशल मीडिया, स्थानीय जनसम्पर्क और मुद्दों की समझ — इन सभी को मिलाकर एक नया राजनीति का चेहरा उभर रहा है।

राज्य भर में उत्सव जैसा माहौल

प्रियंका और रीठा रैतोली की महिलाओं की जीत के बाद उनके गांवों में जश्न का माहौल है। ढोल-नगाड़ों के साथ विजयी रैलियाँ निकाली गईं और गांव की महिलाओं ने पारंपरिक परिधान पहनकर अपनी नायिकाओं का स्वागत किया।

इन सफलताओं के बीच अब निगाहें आने वाले पंचायत कार्यकाल पर हैं — जहां जनता को उम्मीद है कि यह नया नेतृत्व पारदर्शिता, जवाबदेही और विकास के वादों को ज़मीन पर उतारेगा।


दैनिक प्रभातवाणी आपके लिए ऐसे ही विशेष चुनावी विश्लेषण, ग्रामीण भारत की कहानियाँ और नीतिगत दृष्टिकोण प्रस्तुत करता रहेगा।