Spread the loveमसूरी में अब पर्यटकों को करनी होगी ऑनलाइन एंट्री रजिस्ट्रेशन – भीड़, ट्रैफिक और पर्यावरण के लिए बड़ा कदमउत्तराखंड सरकार ने मसूरी में पर्यटक गतिविधियों को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से एक बड़ा और ऐतिहासिक निर्णय लिया है। अब मसूरी में प्रवेश करने से पहले हर पर्यटक को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य रूप से करना होगा। यह कदम भीड़ नियंत्रण, ट्रैफ़िक प्रबंधन और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।कैसे करना होगा रजिस्ट्रेशन?मसूरी आने वाले पर्यटकों को यात्रा से पूर्व सरकारी पोर्टल या मोबाइल ऐप के माध्यम से रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरना होगा, जिसमें वाहन नंबर, यात्रियों की संख्या, ठहरने का स्थान, यात्रा की तिथि आदि विवरण देना अनिवार्य होगा।रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद QR कोड जनरेट किया जाएगा, जिसे मोबाइल में डाउनलोड या प्रिंट किया जा सकता है। यह QR कोड ही चेकपोस्ट और होटल में प्रवेश के लिए पास के रूप में काम करेगा।QR कोड कैसे काम करेगा?मसूरी की सीमा पर बने एंट्री चेकपोस्ट पर इस QR कोड को स्कैन किया जाएगा।यदि कोड वैध नहीं हुआ या रजिस्ट्रेशन न किया गया हो, तो पर्यटकों को प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।होटल में चेक-इन के दौरान भी इस कोड का सत्यापन किया जाएगा।इस प्रणाली से न केवल अवांछित भीड़ पर लगाम लगेगी, बल्कि पर्यटकों के डाटा के माध्यम से आपात स्थिति में त्वरित सहायता देना भी संभव होगा।क्यों उठाया गया यह कदम?पिछले कुछ वर्षों में मसूरी में अचानक बढ़ती पर्यटक संख्या ने ट्रैफ़िक जाम, जल संकट, कचरा प्रबंधन और स्थानीय संसाधनों पर अत्यधिक दबाव डाला है। गर्मियों की छुट्टियों और वीकेंड्स पर मसूरी की सड़कों पर घंटों का जाम आम बात हो गई है, जिससे न केवल पर्यटकों को बल्कि स्थानीय नागरिकों को भी भारी परेशानी झेलनी पड़ती है।पर्यावरणविदों का कहना है कि यदि यह नियंत्रण न किया गया, तो मसूरी का नाजुक पारिस्थितिक तंत्र गंभीर संकट में पड़ सकता है। इसी के मद्देनजर जिला प्रशासन और राज्य सरकार ने मिलकर यह डिजिटल व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है।स्थानीय व्यापारियों और होटल एसोसिएशन की प्रतिक्रियाहालांकि आरंभिक दिनों में होटल और टैक्सी ऑपरेटरों को व्यवस्था समझने में कठिनाई हो सकती है, लेकिन मसूरी होटल एसोसिएशन ने इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इससे “अनियंत्रित भीड़ के कारण सेवा स्तर पर पड़ने वाला दबाव कम होगा और गुणवत्ता बेहतर हो पाएगी।”वहीं कुछ स्थानीय दुकानदारों ने आशंका जताई है कि इससे “आकस्मिक पर्यटकों” की संख्या में कमी आएगी, जो बिना योजना के मसूरी घूमने आते हैं।पर्यटकों के लिए लाभट्रैफिक और भीड़ से राहतअधिक संगठित यात्रा अनुभवरियल-टाइम जानकारी और रूट मैपिंगइमरजेंसी में प्रशासन द्वारा त्वरित सहायताक्या होगी सज़ा बिना रजिस्ट्रेशन के आने पर?जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बिना पंजीकरण के किसी भी वाहन या पर्यटक को मसूरी में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। यदि कोई व्यक्ति नियम का उल्लंघन करता है, तो उसका वाहन वहीं रोका जाएगा और रजिस्ट्रेशन न होने की स्थिति में उसे वापिस लौटना पड़ सकता है।सिस्टम लागू कब से हो रहा है?यह प्रणाली 15 अगस्त 2025 से पूर्ण रूप से लागू की जा रही है। प्रशासन अभी इसके लिए एक पायलट चरण चला रहा है, जिसमें लोगों को जानकारी दी जा रही है और तकनीकी सहयोग भी उपलब्ध कराया जा रहा है।दैनिक प्रभातवाणी की टिप्पणीयह निर्णय आने वाले समय में उत्तराखंड के अन्य पर्यटक स्थलों — जैसे नैनीताल, औली, केदारनाथ और टिहरी — में भी लागू किया जा सकता है। पर्यटकों को अब यह समझना होगा कि उत्तराखंड की खूबसूरती को बनाए रखने के लिए एक ज़िम्मेदार यात्री की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी कि प्रशासन की। Post Views: 42 Post navigationस्वास्थ्य प्रणाली की चीत्कार: सेना जवान का एक वर्षीय बेटा तड़पता रहा, पांच अस्पतालों में दौड़ता रहा परिवार – आखिरकार तोड़ दिया दम उत्तराखंड हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: नाबालिग पर बलात्कार का मामला खारिज, परस्पर सहमति संबंध मानते हुए कार्यवाही रद्द