January 13, 2026

उत्तराखंड में पर्यटन क्रांति: सोनप्रयाग–केदारनाथ और गोविंदघाट–हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजनाओं को मिली मंजूरी

Spread the love
उत्तराखंड में पर्यटन क्रांति: सोनप्रयाग–केदारनाथ और गोविंदघाट–हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजनाओं को मिली मंजूरी
उत्तराखंड में पर्यटन क्रांति: सोनप्रयाग–केदारनाथ और गोविंदघाट–हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजनाओं को मिली मंजूरी

उत्तराखंड, 20 अगस्त 2025: उत्तराखंड में पर्यटन और धार्मिक स्थलों की पहुँच को और आसान बनाने के लिए सरकार ने दो महत्वपूर्ण रोपवे परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। इन परियोजनाओं के तहत सोनप्रयाग से केदारनाथ और गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक रोपवे का निर्माण किया जाएगा। यह ऐतिहासिक निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक दिवसीय दौरे के दौरान लिया गया, जो राज्य के पर्यटन और धार्मिक महत्व को नई ऊँचाइयों तक ले जाने में मील का पत्थर साबित होगा।

सोनप्रयाग–केदारनाथ रोपवे और गोविंदघाट–हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजनाएँ न केवल तीर्थयात्रियों के लिए सुविधा प्रदान करेंगी, बल्कि यह राज्य के आर्थिक विकास और रोजगार सृजन में भी अहम भूमिका निभाएंगी। हिमालय की ऊँचाई और दुर्गम इलाके में होने के बावजूद यह परियोजनाएँ तकनीकी रूप से अत्याधुनिक होंगी और पर्यावरण संरक्षण का पूरा ध्यान रखा जाएगा।

सोनप्रयाग–केदारनाथ रोपवे: तीर्थयात्रियों के लिए ऐतिहासिक बदलाव

केदारनाथ, जो कि चार धामों में से एक है, भारतीय हिंदू श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है। वर्ष 2013 में आए भयानक आपदा के बाद यह मार्ग और भी कठिन और चुनौतीपूर्ण हो गया था। अब सोनप्रयाग से केदारनाथ तक रोपवे के निर्माण के बाद यात्रियों के लिए यह यात्रा सुगम और सुरक्षित हो जाएगी।

इस रोपवे परियोजना की लंबाई लगभग 6 किलोमीटर होगी और इसमें अत्याधुनिक केबिन सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा। परियोजना की योजना इस तरह बनाई गई है कि यह हिमालय की प्राकृतिक सुंदरता को प्रभावित न करे। परियोजना में आधुनिक सुरक्षा उपाय, मौसम आधारित नियंत्रण प्रणाली और आपातकालीन बचाव सुविधाएँ शामिल की जाएँगी।

यात्रियों के लिए यह रोपवे यात्रा समय को कम करेगी। पहले जहां पैदल यात्रा में कई घंटे लगते थे, वहां अब केवल कुछ ही मिनटों में केदारनाथ पहुंचना संभव होगा। इसके अलावा, यह रोपवे बुजुर्ग, महिलाएँ और बच्चे समेत सभी के लिए यात्रा को सुविधाजनक बनाएगा।

गोविंदघाट–हेमकुंड साहिब रोपवे: धर्म और पर्यटन का संगम

हेमकुंड साहिब, सिख धर्म के पाँच पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक, प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक अनुभव के लिए जाना जाता है। परंपरागत रूप से, गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक तीर्थयात्रियों को कठिन और चुनौतीपूर्ण पैदल मार्ग तय करना पड़ता था। अब इस मार्ग पर रोपवे बनने से यात्रा न केवल सुरक्षित होगी बल्कि तीर्थयात्रियों को समय की बचत भी होगी।

यह परियोजना भी अत्याधुनिक तकनीक और पर्यावरण संरक्षण के सिद्धांतों के साथ विकसित की जाएगी। रोपवे की योजना में स्थानीय समुदायों को रोजगार देने, छोटे व्यापारियों और गाइडों के लिए अवसर बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

प्रधानमंत्री का दौरा और परियोजनाओं की मंजूरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राज्य दौरे के दौरान यह निर्णय लिया गया कि इन दोनों परियोजनाओं को तत्काल रूप से मंजूरी दी जाए। प्रधानमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के धार्मिक और प्राकृतिक स्थलों तक पहुँच आसान बनाने के लिए यह कदम आवश्यक है। उनका कहना था कि धार्मिक पर्यटन केवल आध्यात्मिक महत्व नहीं रखता, बल्कि यह राज्य के आर्थिक विकास और रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है।

प्रधानमंत्री ने स्थानीय अधिकारियों और परियोजना प्रबंधन टीम को निर्देश दिए कि परियोजनाओं का कार्य जल्द से जल्द शुरू किया जाए और पर्यावरण संरक्षण की सभी आवश्यकताएँ पूरी की जाएँ। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इन परियोजनाओं के निर्माण में पारदर्शिता और सुरक्षा मानकों का पालन सर्वोपरि होगा।

पर्यावरण और स्थानीय समुदायों पर असर

हिमालयी क्षेत्र में ऐसे बड़े निर्माण कार्यों के लिए पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन अत्यंत आवश्यक है। दोनों रोपवे परियोजनाओं में पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी गई है। परियोजना स्थल पर पेड़ों की कटाई न्यूनतम स्तर पर होगी और जहां भी आवश्यक हो, वहां पुनःरोपण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

स्थानीय समुदायों को परियोजना से रोजगार और व्यापारिक अवसर प्राप्त होंगे। रोपवे निर्माण के दौरान श्रमिक, तकनीकी कर्मचारी और सुरक्षा विशेषज्ञों के लिए स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इससे न केवल रोजगार बढ़ेगा बल्कि स्थानीय युवाओं को नई तकनीकी विशेषज्ञता भी मिलेगी।

आर्थिक और पर्यटन प्रभाव

रोपवे परियोजनाओं का सबसे बड़ा लाभ राज्य की अर्थव्यवस्था और पर्यटन पर होगा। केदारनाथ और हेमकुंड साहिब की यात्रा अब अधिक तीव्र और सुगम होगी, जिससे तीर्थयात्रियों की संख्या में वृद्धि होगी। इसके परिणामस्वरूप स्थानीय होटलों, ढाबों, ट्रैवल एजेंसियों और हस्तशिल्प व्यापारियों को अधिक आय होगी।

इसके अलावा, यह परियोजनाएँ अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को भी आकर्षित करेंगी। हिमालय की अद्वितीय प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक महत्व इन स्थलों को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाएगा। निवेशकों के लिए भी यह क्षेत्र आकर्षक बन जाएगा, जिससे अतिरिक्त पूंजी और रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे।

तकनीकी विवरण और सुरक्षा उपाय

सोनप्रयाग–केदारनाथ और गोविंदघाट–हेमकुंड साहिब रोपवे दोनों में आधुनिक केबल कार तकनीक का उपयोग होगा। इसमें मौसम आधारित सेंसर, आपातकालीन ब्रेकिंग सिस्टम और रियल-टाइम मॉनिटरिंग सुविधाएँ शामिल होंगी। प्रत्येक केबिन में ऑक्सीजन स्तर, तापमान और अन्य सुरक्षा मानकों की जांच होगी।

यात्रियों की सुरक्षा के लिए प्रत्येक स्टेशन पर आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएँ और प्रशिक्षित कर्मी उपलब्ध होंगे। इसके अलावा, भारी बारिश, बर्फबारी या भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान रोपवे संचालन को तुरंत बंद करने की व्यवस्था भी की जाएगी।

स्थानीय जनता और तीर्थयात्रियों की प्रतिक्रिया

स्थानीय लोगों और तीर्थयात्रियों की प्रतिक्रिया इस निर्णय पर मिश्रित रही है। कई लोग इसे स्वागतयोग्य कदम मानते हैं, क्योंकि इससे यात्रा में आसानी होगी और जीवन की जोखिम कम होगी। वहीं कुछ लोग परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर चिंतित हैं।

स्थानीय प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि परियोजनाओं के दौरान पर्यावरणीय प्रभाव का न्यूनतम स्तर पर ध्यान रखा जाएगा। सभी निर्माण कार्य पर्यावरण विशेषज्ञों की निगरानी में होंगे और आवश्यक अनुमोदन प्राप्त किए जाएंगे।

भविष्य की संभावनाएँ

इन दोनों रोपवे परियोजनाओं के निर्माण के बाद उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन को नई दिशा मिलेगी। यह राज्य के विकास में मील का पत्थर साबित होगा और रोजगार, आर्थिक विकास तथा पर्यावरण संरक्षण को संतुलित रूप से आगे बढ़ाएगा।

भविष्य में, अन्य धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर भी इसी तरह के रोपवे परियोजनाओं पर विचार किया जा सकता है। इससे पूरे राज्य में पर्यटन के नए आयाम खुलेंगे और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करने में मदद मिलेगी।

राज्य सरकार ने यह भी योजना बनाई है कि रोपवे परियोजनाओं के आसपास स्थायी आवास, स्वास्थ्य केंद्र और सूचना केंद्र विकसित किए जाएँ। इससे तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को समग्र अनुभव मिलेगा और राज्य का पर्यटन परिपूर्ण रूप से विकसित होगा।

दैनिक प्रभात

वाणी

सोनप्रयाग–केदारनाथ और गोविंदघाट–हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजनाओं की मंजूरी उत्तराखंड के पर्यटन, धार्मिक यात्रा और आर्थिक विकास के लिए ऐतिहासिक कदम है। यह परियोजना न केवल यात्रियों के लिए सुविधा बढ़ाएगी, बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार और आर्थिक अवसर भी प्रदान करेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के दौरान यह निर्णय राज्य की धार्मिक, आर्थिक और पर्यावरणीय प्राथमिकताओं के संतुलन को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। हिमालय की प्राकृतिक सुंदरता, धार्मिक महत्व और तकनीकी उन्नति का यह संगम उत्तराखंड को एक नई पहचान दिलाएगा।

इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद उत्तराखंड न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धार्मिक और पर्यटन गंतव्य के रूप में अग्रणी स्थान पर होगा। यह कदम राज्य की अर्थव्यवस्था, रोजगार सृजन और तीर्थयात्रियों की सुविधा में अनिवार्य योगदान देगा।