उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में दाखिले: ‘पहले आओ, पहले पाओ’ नीति के तहत अंतिम दिन

देहरादून, 20 अगस्त 2025: उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में आज दाखिले का अंतिम दिन था। विश्वविद्यालय ने प्रवेश प्रक्रिया में ‘पहले आओ, पहले पाओ’ नीति अपनाई, जिससे छात्रों और अभिभावकों में सुबह से ही हलचल और उत्सुकता देखने को मिली। प्रशासन ने बताया कि इस कदम का उद्देश्य प्रवेश प्रक्रिया को सुगम, पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है।
विश्वविद्यालय परिसर में सुबह-सुबह ही लंबी कतारें लगी हुई थीं। प्रवेश कार्यालय के अधिकारी छात्रों और अभिभावकों को प्रवेश प्रक्रिया के लिए आवश्यक दस्तावेज़ और प्रक्रिया की जानकारी दे रहे थे। सुरक्षा व्यवस्था, मार्गदर्शन और पार्किंग की विशेष व्यवस्था की गई थी।
विभागवार प्रवेश विवरण
विश्वविद्यालय ने इस साल विभिन्न स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए कुल 1,200 से अधिक सीटें निर्धारित की हैं। प्रमुख पाठ्यक्रमों में शामिल हैं:
संस्कृत साहित्य और दर्शनशास्त्र
वेद और उपनिषद अध्ययन
भाषा और व्याकरण कोर्स
धर्मशास्त्र और धार्मिक अनुष्ठान
प्रत्येक विभाग में प्रवेश प्रक्रिया अलग-अलग समय पर आयोजित की गई थी, ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके। प्रशासन ने कहा कि सभी योग्य छात्रों को उनकी योग्यता और दस्तावेज़ के आधार पर प्रवेश दिया गया।
दस्तावेज़ और योग्यता मानदंड
दाखिले के लिए छात्रों को निम्नलिखित दस्तावेज़ प्रस्तुत करने आवश्यक थे:
शैक्षणिक प्रमाणपत्र और अंकतालिका
जन्म प्रमाणपत्र
पासपोर्ट साइज फोटो
जाति या आरक्षण प्रमाणपत्र (यदि लागू हो)
चिकित्सा प्रमाणपत्र (कुछ कोर्स के लिए अनिवार्य)
प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि किसी योग्य छात्र को दस्तावेज़ में किसी भी तरह की कमी के कारण प्रवेश से वंचित न किया जाए।
छात्रों और अभिभावकों के अनुभव
सुबह से ही परिसर में छात्रों और अभिभावकों की हलचल देखने को मिली। कुछ अभिभावकों ने कहा कि ‘पहले आओ, पहले पाओ’ नीति के कारण थोड़ी जल्दी आना पड़ा, लेकिन इससे प्रक्रिया सुचारू और पारदर्शी रही।
छात्र सीमा शर्मा ने बताया, “मैं सुबह 6 बजे विश्वविद्यालय पहुंचा और सभी दस्तावेज़ जांचने के बाद मुझे प्रवेश मिल गया। प्रशासन की व्यवस्था अच्छी थी और कर्मचारियों ने हमारी मदद की।”
प्रशासन की तैयारी और सुरक्षा
विश्वविद्यालय प्रशासन ने दाखिले के दिन पुलिस और कैम्पस सुरक्षा बल की तैनाती की थी। पार्किंग, प्रवेश और बाहर निकलने के मार्गों को व्यवस्थित किया गया। परिसर में निर्देशित मार्गों और सूचना बोर्डों के माध्यम से सभी को मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
सभी विभागों में कर्मचारियों की अतिरिक्त तैनाती की गई थी ताकि छात्रों का समय बर्बाद न हो और कोई भी लंबा इंतजार न करना पड़े।
नवदाखिले छात्रों के लिए कार्यक्रम
विश्वविद्यालय ने नवदाखिले छात्रों के लिए ओरिएंटेशन प्रोग्राम और स्वागत समारोह आयोजित किया। इसमें छात्रों को विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों, लाइब्रेरी, हॉस्टल सुविधाओं और स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी दी गई।
विश्वविद्यालय ने कहा कि छात्रों को संस्कृत भाषा, धार्मिक अध्ययन और संस्कृति से संबंधित गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
सुविधाएँ और छात्र सेवाएँ
विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों के लिए कई आधुनिक सुविधाएँ उपलब्ध हैं:
पुस्तकालय और अध्ययन कक्ष
हॉस्टल और आवासीय सुविधाएँ
स्वास्थ्य केंद्र और चिकित्सा सेवाएँ
कंप्यूटर और डिजिटल अध्ययन कक्ष
सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों के लिए प्रांगण
विश्वविद्यालय का कहना है कि सभी सुविधाएँ छात्रों की शिक्षा और व्यक्तिगत विकास को ध्यान में रखते हुए उपलब्ध कराई गई हैं।
डिजिटल और ऑनलाइन सुधार योजना
विश्वविद्यालय ने घोषणा की कि अगले साल से प्रवेश प्रक्रिया को और अधिक डिजिटल और ऑनलाइन बनाया जाएगा। इससे छात्रों को आवेदन और प्रवेश में आसानी होगी और भीड़ को नियंत्रित करना संभव होगा।
अंतरराष्ट्रीय छात्रों और छात्रवृत्ति
विश्वविद्यालय ने विदेशी छात्रों के प्रवेश के लिए भी व्यवस्था की है। कई छात्रवृत्तियाँ और छात्र सहायता कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए लागू किए गए हैं। इससे उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा और वैश्विक स्तर पर पहचान बढ़ेगी।
सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियाँ
विश्वविद्यालय छात्रों को केवल शिक्षा तक सीमित नहीं रखता। सांस्कृतिक कार्यक्रम, योग शिविर, धार्मिक अध्ययन और सामाजिक गतिविधियों के माध्यम से छात्रों का समग्र विकास किया जाता है। छात्रों को विभिन्न प्रतियोगिताओं और आयोजनों में भाग लेने का अवसर भी मिलता है।
प्रशासनिक टिप्पणी
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. राघवेंद्र मिश्र ने कहा, “हमने दाखिले के लिए सभी व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की हैं। ‘पहले आओ, पहले पाओ’ नीति से छात्रों को समय पर प्रवेश मिला और प्रक्रिया पारदर्शी रही। भविष्य में हम इसे और अधिक डिजिटल बनाने पर काम कर रहे हैं।”
दैनिक प्रभातवाणी
उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय में आज का दाखिला दिन छात्रों और अभिभावकों के लिए स्मरणीय रहा। ‘पहले आओ, पहले पाओ’ नीति के माध्यम से प्रक्रिया पारदर्शी, सुव्यवस्थित और सुरक्षित रही।
विश्वविद्यालय की यह पहल न केवल छात्रों की सुविधा के लिए है, बल्कि राज्य में संस्कृत शिक्षा और संस्कृति के प्रसार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। नवदाखिले छात्रों को अब आधुनिक सुविधाएँ, पारंपरिक शिक्षा और सांस्कृतिक अनुभव दोनों मिलेंगे।