Spread the loveदेहरादून, 23 अगस्त 2025।उत्तराखंड में बढ़ते गन कल्चर और अपराधों पर उत्तराखंड हाई कोर्ट ने सख़्त रुख़ अपनाया है। कोर्ट ने राज्य के गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को आदेश दिया है कि वे प्रदेश में अवैध हथियारों की रोकथाम और अपराध नियंत्रण के लिए दो सप्ताह के भीतर विस्तृत कार्ययोजना (Action Plan) अदालत में पेश करें।हाई कोर्ट की चिंता: बढ़ते अपराध और हथियार संस्कृतिबीते कुछ वर्षों में राज्य में अपराधों और खासकर अवैध हथियारों के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है। छोटी-छोटी बातों पर हथियार निकालना, सामाजिक समारोहों और शादियों में फायरिंग करना, या फिर राजनीतिक दबदबा दिखाने के लिए बंदूक़ों का इस्तेमाल अब आम होता जा रहा है। अदालत ने इस प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए कहा कि यह न केवल कानून-व्यवस्था के लिए ख़तरा है, बल्कि समाज के लिए भी गंभीर समस्या बन चुकी है।दो सप्ताह में योजना पेश करने का आदेशमुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार को व्यापक रणनीति बनानी होगी। इसमें यह तय होना चाहिए कि:अवैध हथियारों की पहचान और जब्ती कैसे होगी।अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस की कार्यप्रणाली क्या होगी।गन कल्चर को रोकने के लिए समाज स्तर पर जागरूकता अभियान कैसे चलाए जाएंगे।अदालत ने कहा कि गृह सचिव और डीजीपी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे और उन्हें अपनी कार्ययोजना अदालत में शपथपत्र (affidavit) के साथ दाखिल करनी होगी।गन कल्चर: समाज पर असरविशेषज्ञों के अनुसार, गन कल्चर ने उत्तराखंड जैसे शांत और पर्यटन-प्रधान राज्य की छवि को नुकसान पहुँचाना शुरू कर दिया है। खासकर मैदानी जिलों जैसे देहरादून, हरिद्वार और उधमसिंह नगर में हथियारों का खुलेआम प्रदर्शन और अपराधों में हथियारों का इस्तेमाल बढ़ा है। कई मामलों में छोटे बच्चों और युवाओं पर इसका नकारात्मक असर पड़ रहा है।पुलिस की चुनौतियाँ और कमियाँपुलिस अधिकारियों का कहना है कि अवैध हथियारों की सप्लाई अक्सर बाहरी राज्यों से होती है। सीमावर्ती ज़िलों में इनकी तस्करी रोकना एक बड़ी चुनौती है। वहीं कई बार सामाजिक और राजनीतिक दबाव के कारण भी अवैध हथियारों के मामलों में कठोर कार्रवाई नहीं हो पाती।हाई कोर्ट ने इस पर भी सख्त टिप्पणी की कि पुलिस को ज़ीरो टॉलरेंस पॉलिसी अपनानी होगी, वरना गन कल्चर और अपराध पर अंकुश लगाना मुश्किल होगा।अदालत का स्पष्ट संदेशअदालत ने कहा कि राज्य सरकार और पुलिस को यह समझना होगा कि गन कल्चर केवल कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं है, बल्कि यह सामाजिक ताने-बाने को भी प्रभावित करता है। यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में उत्तराखंड भी उन राज्यों की श्रेणी में शामिल हो सकता है जहाँ अपराध और हिंसा आम हो गई है।निष्कर्षउत्तराखंड हाई कोर्ट का यह आदेश सरकार और पुलिस के लिए चेतावनी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर होंगी कि दो सप्ताह के भीतर गृह सचिव और डीजीपी अदालत में किस तरह की कार्ययोजना पेश करते हैं। गन कल्चर पर अंकुश और अपराधों की रोकथाम के लिए यह आदेश राज्य में कानून व्यवस्था सुधारने की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकता है। Post Views: 49 Post navigationस्यानाचट्टी में यमुना पर बनी झील: मलबे से कटे कई गाँव, पुल डूबा, प्रशासन अलर्ट पर अवैध खनन का मामला: 1.91 करोड़ रुपये के जुर्माने पर किसान की चुनौती, HC ने मांगा जवाब