Spread the loveदेहरादून, 23 अगस्त 2025।उत्तराखंड में अवैध खनन के मामलों पर लगातार हो रही कार्रवाई अब न्यायालय की सख़्ती तक पहुँच चुकी है। एक किसान दुनी चंद द्वारा लगाए गए 1.91 करोड़ रुपये के खनन जुर्माने को चुनौती देने पर उत्तराखंड हाई कोर्ट ने खनन अधिकारी और संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है। अदालत ने इस मामले को गंभीर मानते हुए स्पष्ट किया कि खनन संबंधी नियमों और जुर्माने की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।किसान की याचिकाकिसान दुनी चंद का कहना है कि उस पर लगाया गया 1.91 करोड़ रुपये का जुर्माना पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने हाई कोर्ट में दलील दी कि वे इतने बड़े पैमाने पर खनन से जुड़े नहीं हैं और इस जुर्माने के पीछे विभाग की ओर से लापरवाही या मनमानी हो सकती है। किसान ने यह भी कहा कि जुर्माने की गणना पारदर्शी तरीके से नहीं हुई है और अधिकारियों ने बिना पुख्ता सबूत के यह कार्रवाई कर दी।हाई कोर्ट का हस्तक्षेपयाचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तराखंड हाई कोर्ट ने खनन अधिकारी और संबंधित विभागीय अधिकारियों को नोटिस जारी किया। अदालत ने पूछा है कि इतने बड़े जुर्माने का आधार क्या है और इसे कैसे निर्धारित किया गया। साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जुर्माने की प्रक्रिया और तथ्य पूरी तरह रिकॉर्ड पर लाए जाएँ, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कहीं प्रशासनिक स्तर पर कोई मनमानी या अत्यधिक दंडात्मक रवैया तो नहीं अपनाया गया।खनन माफिया बनाम छोटे किसानराज्य में लंबे समय से अवैध खनन एक गंभीर समस्या रही है। नदियों और नालों से बेतहाशा खनन ने पर्यावरण को नुकसान पहुँचाया है। सरकार और प्रशासन समय-समय पर कार्रवाई का दावा करते रहे हैं। लेकिन अक्सर छोटे किसानों और स्थानीय ग्रामीणों पर बड़ी कार्रवाई होने और असली खनन माफिया के बच निकलने के आरोप लगते रहे हैं।इस मामले ने भी उसी बहस को हवा दे दी है—क्या वाकई इतनी बड़ी राशि का जुर्माना छोटे किसान पर लगाया जाना उचित है?अगली सुनवाई सोमवार कोहाई कोर्ट ने यह मामला अगली सुनवाई के लिए सोमवार तक स्थगित किया है। तब तक खनन अधिकारी और अन्य संबंधित विभागीय अधिकारी अपनी लिखित प्रतिक्रिया अदालत में पेश करेंगे। अदालत ने साफ किया कि यदि अधिकारी ठोस जवाब नहीं दे पाए, तो मामले में आगे सख़्त आदेश दिए जा सकते हैं।पर्यावरण और अवैध खनन की बड़ी चुनौतीउत्तराखंड जैसे संवेदनशील पर्वतीय राज्य में अवैध खनन केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण और नदियों के अस्तित्व से भी जुड़ा हुआ है। गंगा और उसकी सहायक नदियों में बढ़ते खनन से नदी की धारा बदल रही है, कटाव बढ़ रहा है और कई बार बाढ़ जैसी आपदाओं को भी बल मिल रहा है।इसी वजह से अदालत समय-समय पर इस मुद्दे पर सख़्त निर्देश देती रही है।दैनिक प्रभातवाणी दुनी चंद का मामला केवल एक किसान पर लगे जुर्माने की चुनौती नहीं है, बल्कि यह राज्य की खनन नीति और उस पर होने वाले अमल की पारदर्शिता की भी परीक्षा है। अब सभी की निगाहें सोमवार को होने वाली अगली सुनवाई पर हैं। देखना होगा कि खनन अधिकारी और संबंधित विभाग अदालत को किस तरह का जवाब देते हैं और क्या किसान को राहत मिलती है या नहीं। Post Views: 60 Post navigationगन कल्चर और अपराध पर HC की सख्ती: दो हफ़्ते में योजना पेश करें गृह सचिव और डीजीपी उत्तराखंड में सुरक्षा पर सवाल: रुड़की के पीरन कलियार में सामूहिक दुष्कर्म और मसूरी में अपहरण का प्रयास – समाज और कानून व्यवस्था पर गहरा संकट