January 15, 2026

CBSE ने परीक्षा डेटा मान्यता प्रक्रिया को और मजबूत किया: शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और सटीकता की नई पहल

CBSE ने परीक्षा डेटा मान्यता प्रक्रिया को और मजबूत किया: शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और सटीकता की नई पहल

CBSE ने परीक्षा डेटा मान्यता प्रक्रिया को और मजबूत किया: शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और सटीकता की नई पहल

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CBSE ने परीक्षा डेटा मान्यता प्रक्रिया को और मजबूत किया: शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और सटीकता की नई पहल

नई दिल्ली, 28 अगस्त 2025 (दि इकोनॉमिक टाइम्स)।
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने एक बार फिर अपनी परीक्षा प्रणाली को और अधिक मज़बूत व पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।
2025–26 शैक्षणिक सत्र से CBSE ने बोर्ड परीक्षाओं के लिए उम्मीदवार सूची (List of Candidates – LOC) की प्रक्रिया में एक नया प्रावधान जोड़ा है – Data Verification Slip

यह नया प्रावधान स्कूलों और छात्रों के लिए अनिवार्य कर दिया गया है। बोर्ड का उद्देश्य साफ है—हर छात्र की व्यक्तिगत और शैक्षणिक जानकारी पूरी तरह सही और त्रुटिरहित हो, ताकि एडमिट कार्ड, रिज़ल्ट और सर्टिफिकेट्स में गलतियाँ न हों।


 CBSE और परीक्षा प्रणाली का संक्षिप्त परिचय

CBSE देश का सबसे बड़ा शिक्षा बोर्ड है, जिसके अंतर्गत भारत और विदेशों में लगभग 28,000 से अधिक स्कूल संबद्ध हैं। हर साल लाखों छात्र 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा में बैठते हैं।

इतने बड़े स्तर पर परीक्षा आयोजित करने में सबसे बड़ी चुनौती होती है—छात्रों का डेटा सही रखना

  • यदि नाम में वर्तनी की गलती हो जाए,

  • जन्मतिथि गलत दर्ज हो जाए,

  • या विषयों का चयन ठीक से न हो पाए,

तो यह न केवल छात्रों बल्कि स्कूल प्रशासन और बोर्ड के लिए भी गंभीर समस्या बन जाती है।


 डेटा में गड़बड़ियों की पुरानी समस्या

पिछले कई वर्षों में यह देखा गया कि LOC (List of Candidates) के समय स्कूलों द्वारा जमा की गई जानकारी में त्रुटियाँ बार-बार सामने आती थीं।

  • कई बार छात्रों का नाम गलत दर्ज हो जाता था।

  • जन्मतिथि आधार कार्ड या स्कूल रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती थी।

  • विषय संयोजन (Subject Combination) गलत दर्ज हो जाता था।

  • माता-पिता का नाम अलग-अलग दस्तावेज़ों में असमान पाया जाता था।

इन छोटी-छोटी गलतियों के कारण बोर्ड परीक्षा के समय छात्रों को एडमिट कार्ड पर सुधार करवाने के लिए भाग-दौड़ करनी पड़ती थी।
यहाँ तक कि रिज़ल्ट घोषित होने के बाद सर्टिफिकेट में सुधार (Correction in Marksheet/Certificate) के लिए भी लंबे समय तक आवेदन करना पड़ता था।


 नया बदलाव: Data Verification Slip

इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए CBSE ने अब एक नई प्रणाली लागू की है—Data Verification Slip

  • जब भी स्कूल LOC तैयार करेंगे, तब प्रत्येक छात्र की व्यक्तिगत और शैक्षणिक जानकारी एक स्लिप पर उपलब्ध होगी।

  • इस स्लिप को छात्र, अभिभावक और स्कूल—तीनों को मिलकर जांचना और सत्यापित करना होगा।

  • यदि कोई त्रुटि पाई जाती है तो उसी समय सुधार करना अनिवार्य होगा।

Data Verification Slip में शामिल जानकारी

  • छात्र का पूरा नाम

  • जन्मतिथि

  • माता-पिता का नाम

  • लिंग (Gender)

  • राष्ट्रीयता

  • पता

  • विषय संयोजन (Subjects opted)

  • भाषा/ऐच्छिक विषय

  • फोटो और डिजिटल हस्ताक्षर


 प्रक्रिया कैसे होगी?

  1. स्कूल पोर्टल पर डेटा अपलोड करेंगे।

  2. प्रत्येक छात्र का डेटा Data Verification Slip के रूप में डाउनलोड होगा।

  3. यह स्लिप छात्र और अभिभावक को दी जाएगी।

  4. छात्र और अभिभावक स्लिप को पढ़कर हस्ताक्षर करेंगे।

  5. किसी भी त्रुटि की स्थिति में स्कूल तुरंत सुधार करेंगे।

  6. सत्यापित स्लिप को फिर से ऑनलाइन अपलोड कर अंतिम LOC तैयार होगी।


 CBSE का उद्देश्य

CBSE अधिकारियों के अनुसार, इस नई प्रक्रिया के पीछे कई महत्वपूर्ण लक्ष्य हैं:

  • त्रुटिरहित डेटा: परीक्षा से पहले ही गलतियों का सुधार हो सके।

  • पारदर्शिता: छात्र और अभिभावक खुद डेटा जांचें, ताकि बाद में कोई विवाद न हो।

  • समय की बचत: एडमिट कार्ड और रिज़ल्ट के समय सुधार प्रक्रिया से बचा जा सके।

  • जिम्मेदारी तय करना: यदि बाद में कोई गलती मिलती है, तो ज़िम्मेदारी छात्र, अभिभावक और स्कूल पर तय हो सकेगी।


 स्कूलों पर असर

इस नई व्यवस्था से स्कूलों की भूमिका और अधिक गंभीर हो गई है।

  • स्कूल अब सिर्फ डेटा एंट्री करने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उन्हें प्रत्येक एंट्री की पुष्टि करनी होगी।

  • स्कूल प्राचार्य को सुनिश्चित करना होगा कि छात्र और अभिभावक ने स्लिप पर हस्ताक्षर किए हों।

  • यदि किसी स्कूल की लापरवाही से गलत डेटा अपलोड होता है, तो उसकी ज़िम्मेदारी स्पष्ट रूप से तय की जाएगी।

कई स्कूल प्रशासन का मानना है कि इससे स्कूल स्टाफ पर काम का बोझ जरूर बढ़ेगा, लेकिन परीक्षा प्रक्रिया अधिक संगठित और व्यवस्थित होगी।


 छात्रों और अभिभावकों पर असर

छात्रों और उनके परिवारों के लिए यह बदलाव बहुत फायदेमंद साबित होगा।

  • अब वे शुरुआत से ही अपनी जानकारी की सटीकता सुनिश्चित कर पाएंगे।

  • रिज़ल्ट या सर्टिफिकेट में सुधार के लिए बाद में समय और पैसा खर्च करने की आवश्यकता नहीं होगी।

  • छात्र का भविष्य सुरक्षित रहेगा क्योंकि गलत दस्तावेज़ उनकी उच्च शिक्षा और नौकरी के अवसरों में बाधा डाल सकते थे।


 विशेषज्ञों की राय

शिक्षा विशेषज्ञ प्रो. मीना अरोड़ा कहती हैं:
“यह एक स्वागत योग्य कदम है। CBSE ने यह समझ लिया है कि डेटा एंट्री में हुई एक छोटी गलती भी छात्रों के जीवन पर गहरा असर डाल सकती है। Data Verification Slip से यह सुनिश्चित होगा कि हर छात्र का रिकॉर्ड सही और प्रमाणित है।”

रियल-टाइम IT विशेषज्ञ अनिरुद्ध वर्मा का मानना है:
“CBSE धीरे-धीरे डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की दिशा में बढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में यह प्रक्रिया पूरी तरह स्वचालित और AI आधारित हो सकती है, जहां आधार और डिजिलॉकर से सीधे छात्र डेटा वेरिफाई हो जाएगा।”


 भविष्य की संभावनाएँ

CBSE की योजना है कि आने वाले वर्षों में इस प्रक्रिया को और उन्नत बनाया जाए:

  • आधार लिंकिंग: छात्र की जन्मतिथि और नाम सीधे आधार डेटा से वेरिफाई किए जाएँगे।

  • डिजिलॉकर इंटीग्रेशन: CBSE सर्टिफिकेट पहले से ही डिजिलॉकर पर उपलब्ध हैं, आगे चलकर LOC डेटा भी सीधे वहाँ से वेरिफाई होगा।

  • AI आधारित सिस्टम: गलत नाम, असंगत जन्मतिथि या डुप्लीकेट डेटा को सिस्टम खुद पहचान लेगा।

  • ग्रीन और पेपरलेस प्रक्रिया: Data Verification Slip पूरी तरह से डिजिटल हो सकती है।


अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य

दुनिया के कई देशों में पहले से ही परीक्षा प्रणाली में डेटा वेरिफिकेशन पर जोर दिया जाता है।

  • अमेरिका में SAT परीक्षाएँ: उम्मीदवार को रजिस्ट्रेशन के समय ही डिजिटल डॉक्यूमेंट्स से वेरिफाई करना होता है।

  • ब्रिटेन में GCSE: परीक्षा बोर्ड स्कूल और सरकारी रिकॉर्ड को लिंक करके उम्मीदवार की जानकारी चेक करता है।

CBSE का यह कदम भारत को भी उसी दिशा में आगे ले जाता है।


छात्रों की चुनौतियाँ और समाधान

चुनौतियाँ

  • ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता की कमी

  • छात्रों और अभिभावकों को स्लिप पढ़ने और समझने में कठिनाई

  • डेटा एंट्री की समय-सीमा का दबाव

समाधान

  • स्कूलों द्वारा जागरूकता अभियान चलाना

  • Data Verification Camps आयोजित करना

  • CBSE द्वारा सरल भाषा में गाइडलाइन और हेल्पलाइन उपलब्ध कराना


दैनिक जागरण

CBSE द्वारा Data Verification Slip लागू करना केवल एक प्रशासनिक सुधार नहीं है, बल्कि यह शिक्षा प्रणाली को पारदर्शी, भरोसेमंद और आधुनिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

  • यह छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करेगा।

  • स्कूलों की जवाबदेही बढ़ाएगा।

  • और परीक्षा प्रक्रिया को त्रुटिरहित और पारदर्शी बनाएगा।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल आने वाले वर्षों में अन्य शिक्षा बोर्ड्स और विश्वविद्यालयों के लिए भी एक “मॉडल प्रैक्टिस” बन सकती है।