January 12, 2026

उत्तराखंड पर बादलों का कहर: रुद्रप्रयाग और चमोली में तबाही, पाँच की मौत, कई लापता

उत्तराखंड पर बादलों का कहर: रुद्रप्रयाग और चमोली में तबाही, पाँच की मौत, कई लापता
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देहरादून, 29 अगस्त 2025।
उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में आसमान का कहर एक बार फिर टूट पड़ा। 28 अगस्त की देर रात चमोली और रुद्रप्रयाग जिलों में बादल फटने से तबाही मच गई। गाँवों में अचानक आई बाढ़ और मलबे ने लोगों को संभलने का मौका तक नहीं दिया। प्रशासन की पुष्टि के अनुसार अब तक पाँच लोगों की मौत हो चुकी है और कम से कम तीन लोग लापता बताए जा रहे हैं। कई घर, दुकानें और वाहन बह गए हैं, जबकि खेतों और मवेशियों को भी बड़ा नुकसान हुआ है।


रुद्रप्रयाग: छेनागाड़ का बाजार मलबे में तब्दील

रुद्रप्रयाग जिले का बसुकेदार तहसील का बड़ेथ डुंगर तोक और छेनागाड़ क्षेत्र इस आपदा का सबसे बड़ा गवाह बना। देर रात हुई तेज बारिश और बादल फटने से पूरा गाँव बहाव में आ गया। छेनागाड़ का पूरा बाजार, जिसमें दुकानें, मकान और वाहन शामिल थे, मलबे में दब गए। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि रात के समय गाँव में अचानक गड़गड़ाहट और तेज़ शोर सुनाई दिया, उसके बाद कुछ ही मिनटों में पानी और पत्थरों का सैलाब बाजार की ओर आ गया।

स्थानीय लोग कहते हैं कि यह दृश्य मानो एक “हिमालयी सुनामी” जैसा था। यहाँ से आठ लोगों के लापता होने की खबर है, जिनमें से चार स्थानीय निवासी और चार नेपाली मूल के लोग बताए गए हैं। सड़क और पुल टूटने की वजह से केदारनाथ हाईवे घंटों बंद रहा और राहत टीमें पैदल ही गाँव तक पहुँचीं।


चमोली: देवाल और मोपाटा क्षेत्र में तबाही

चमोली जिले के देवाल क्षेत्र के मोपाटा गाँव में भी रात को बादल फटा। यहाँ तारा सिंह और उनकी पत्नी बहाव में बह गए और अब तक लापता हैं। गाँव के ही विक्रम सिंह और उनकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनका इलाज अस्पताल में चल रहा है।

गाँव में मवेशियों को रखने के लिए बने अस्तबल भी मलबे की चपेट में आ गए। ग्रामीणों का अनुमान है कि कम से कम 15–20 पशु मलबे में दबकर मर गए। खेतों में खड़ी धान और मक्का की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई। ग्रामीणों ने बताया कि रातभर लोग सुरक्षित जगह खोजते रहे, लेकिन तेज बारिश ने सबको दहशत में रखा।


टिहरी और आसपास के इलाके

रिपोर्टों के अनुसार टिहरी जिले के भिलंगना और आसपास के क्षेत्रों में भी बारिश और मलबे ने नुकसान पहुँचाया है। कई गाँवों की सड़कें कट गई हैं और संचार व्यवस्था बाधित हो गई। हालांकि यहाँ किसी मौत की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कई घरों को नुकसान पहुँचा है।


मौतें, लापता और बचाव कार्य

प्रशासन की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, अब तक पाँच लोगों की मौत हो चुकी है। रुद्रप्रयाग और चमोली में मिलाकर कम से कम तीन लोग लापता बताए जा रहे हैं। SDRF, NDRF और जिला प्रशासन की टीमें लगातार रेस्क्यू कार्य में जुटी हुई हैं। अब तक लगभग 70 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया है।

रात से लगातार जारी बारिश और टूटी सड़कों की वजह से राहत कार्य में मुश्किलें आ रही हैं। फिर भी बचावकर्मी मलबे को काटकर गाँवों तक पहुँचने की कोशिश कर रहे हैं। राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों के लिए मुआवज़े का ऐलान किया है और घायलों के मुफ्त इलाज की व्यवस्था की गई है।


मौसम विभाग की चेतावनी

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने इस घटना के बाद उत्तराखंड में रेड अलर्ट जारी किया है। आने वाले दिनों में राज्य के पर्वतीय जिलों में भारी बारिश का अनुमान जताया गया है। अधिकारियों ने लोगों से सतर्क रहने और नदियों के किनारे तथा भूस्खलन वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की है।


क्यों बार-बार हो रहा है बादल फटना?

विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तराखंड जैसे हिमालयी क्षेत्र जलवायु परिवर्तन की वजह से लगातार ज्यादा संवेदनशील हो गए हैं। तेज़ मानसूनी हवाएँ, ग्लेशियरों का पिघलना और असामान्य तापमान बदलाव मिलकर ऐसी घटनाओं की आवृत्ति बढ़ा रहे हैं।

रुद्रप्रयाग और चमोली पहले भी कई बार ऐसी घटनाओं का सामना कर चुके हैं। 2013 की केदारनाथ आपदा इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जब हजारों लोगों की जान गई थी। वैज्ञानिक मानते हैं कि पर्वतीय ढलानों पर तेजी से बढ़ता निर्माण और वनों की कटाई भी इन आपदाओं के जोखिम को और बढ़ा रहा है।


ग्रामीणों की पीड़ा

रुद्रप्रयाग के छेनागाड़ से निकाले गए एक दुकानदार ने कहा, “हमने अपनी जिंदगी की सारी पूँजी इस दुकान में लगा दी थी। रातों-रात सब मलबे में दब गया। अब घर भी नहीं बचा और काम-धंधा भी।”

चमोली के देवाल क्षेत्र की एक महिला ने बताया कि जब अचानक शोर हुआ तो लोग बच्चों को लेकर घर से बाहर भागे। “हम सिर्फ जान बचा पाए, बाकी सबकुछ पानी और पत्थरों में चला गया।”


प्रशासन की चुनौतियाँ

राहत और बचाव दलों को सबसे बड़ी चुनौती टूटी हुई सड़कों और लगातार हो रही बारिश से मिल रही है। गाँवों तक पहुँचने के लिए टीमों को कई जगह पैदल चलना पड़ रहा है। कई क्षेत्रों में बिजली और संचार व्यवस्था ठप है।

राज्य सरकार ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों में अस्थायी राहत शिविर बनाए हैं। प्रभावित परिवारों को राशन, कपड़े और दवाइयाँ पहुँचाई जा रही हैं।


दैनिक प्रभातवाणी

उत्तराखंड एक बार फिर प्राकृतिक आपदा के सामने बेबस दिखाई दिया है। 28 अगस्त 2025 की रात को रुद्रप्रयाग और चमोली जिलों में हुए बादल फटने की इस घटना ने कई परिवारों को उजाड़ दिया है। आधिकारिक आँकड़े फिलहाल पाँच मौतों और तीन लापता लोगों की पुष्टि कर रहे हैं, लेकिन नुकसान इससे कहीं बड़ा है।

यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि क्या राज्य में आपदा प्रबंधन और चेतावनी प्रणाली पर्याप्त है? और क्या जलवायु परिवर्तन और अवैज्ञानिक विकास कार्यों के चलते भविष्य में ऐसी आपदाएँ और ज्यादा भयावह होंगी?