उत्तराखंड में अभूतपूर्व बारिश और आपदा: छह की मौत, 11 लापता, राज्यभर में जनजीवन अस्त-व्यस्त

उत्तराखंड में अभूतपूर्व बारिश और आपदा: छह की मौत, 11 लापता, राज्यभर में जनजीवन अस्त-व्यस्त
30 अगस्त 2025, देहरादून: उत्तराखंड आज प्राकृतिक आपदा की विभीषिका का सामना कर रहा है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में लगातार हुई भारी बारिश और बादल फटने की घटनाओं ने जनजीवन पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। मौसम विभाग ने देहरादून, उत्तरकाशी और बागेश्वर में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जबकि कई जिलों में प्रशासन ने आपातकालीन स्थिति घोषित की है।
चमोली जिले के देवाल विकासखंड के मोपता गांव में बादल फटने की घटना सबसे गंभीर रही। इस आपदा में दो मकान पूरी तरह ध्वस्त हो गए, जिससे एक व्यक्ति की मौत हो गई और एक अन्य गंभीर रूप से घायल हो गया। स्थानीय प्रशासन ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया। प्रभावित क्षेत्र में राहत टीमों के अलावा पुलिस और आपदा प्रबंधन दल को तैनात किया गया है।
राज्यभर में हुई भारी बारिश ने 74 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। बागेश्वर, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी जिलों में सभी सरकारी, निजी और गैर-सरकारी स्कूलों के साथ आंगनबाड़ी केंद्रों को बंद रखने का आदेश जारी किया गया। प्रशासन ने नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर रहने और अनावश्यक रूप से बाहर न निकलने की चेतावनी दी है।
भूस्खलन और जलभराव की घटनाओं के कारण देहरादून, बागेश्वर, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी जिलों में यातायात बाधित हुआ है। देहरादून शहर में कई इलाकों में बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई है, जिससे दैनिक जीवन पर प्रतिकूल असर पड़ा। राज्य विद्युत प्राधिकरण ने तुरंत सुधार कार्य शुरू किए और अतिरिक्त टीमों को प्रभावित क्षेत्रों में तैनात किया।
राज्य के विभिन्न हिस्सों में हुई आपदाओं में कुल छह लोगों की मौत हुई है, जबकि 11 लोग लापता हैं। प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में राहत शिविर और अस्थायी आवास तैयार किए हैं। प्रभावित लोगों को भोजन, पानी और प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध कराई जा रही है। राहत और बचाव दल लगातार प्रभावित क्षेत्रों में खोजबीन और सहायता कार्य में जुटा हुआ है।
जिलेवार स्थिति:
चमोली (मोपता गांव): बादल फटना, दो मकान ध्वस्त; 1 मृतक, 1 गंभीर रूप से घायल।
बागेश्वर: जलभराव और नदियों का जलस्तर बढ़ा; प्रभावित लोग राहत शिविरों में स्थानांतरित।
रुद्रप्रयाग: भूस्खलन से मार्ग अवरुद्ध; बचाव दल सक्रिय, मार्ग खोलने का प्रयास।
उत्तरकाशी: नदियों का जलस्तर बढ़ा; लोग सुरक्षित स्थानों में।
देहरादून: भूस्खलन और बारिश से बिजली आपूर्ति बाधित; सुधार कार्य जारी।
मौसम विभाग ने आगामी सात दिनों के लिए भी चेतावनी जारी की है। कोंकण, गोवा, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, गुजरात, केरल और तटीय कर्नाटक में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। विशेषज्ञों ने कहा कि उत्तराखंड जैसे पहाड़ी और संवेदनशील भू-भाग में इस तरह की भारी बारिश भूस्खलन और जलभराव जैसी घटनाओं को और गंभीर बना सकती है।
बागेश्वर जिले में भारी बारिश के कारण कई गांवों में जलभराव और नदियों का बढ़ता जलस्तर देखा गया। प्रभावित लोगों को राहत शिविरों में स्थानांतरित किया गया। प्रशासन ने स्थानीय लोगों को नदी किनारे और खड्ड से दूर रहने की चेतावनी दी। बचाव दल लगातार प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री और प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध करवा रहे हैं।
रुद्रप्रयाग जिले में भूस्खलन के कारण कई मार्ग अवरुद्ध हो गए। प्रशासन ने कहा कि बचाव दल मार्ग खोलने के लिए काम कर रहा है, लेकिन भारी बारिश और पहाड़ी भू-आकृति के कारण राहत कार्य धीमी गति से हो रहा है। स्थानीय लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया।
उत्तरकाशी जिले में नदियों का जलस्तर बढ़ा हुआ है। प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया। कई घरों और दुकानों में जलभराव के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है। प्रशासन ने आपातकालीन टीमों को सक्रिय किया और राहत कार्य तेज किया।
देहरादून में भी स्थिति गंभीर रही। भूस्खलन और जलभराव के कारण कई इलाकों में बिजली कटौती हुई और यातायात बाधित हुआ। प्रशासन ने सुधार कार्य के लिए अतिरिक्त टीमें तैनात की हैं। नागरिकों को वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है।
राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने कहा है कि बारिश और जलभराव से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं से बचने के लिए स्वच्छ पानी, दवा और प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था की गई है। प्रभावित इलाकों में टीमों द्वारा लोगों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। कई स्थानों पर हेलीकॉप्टर के माध्यम से राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तराखंड में इस तरह की भीषण बारिश की घटनाएँ बार-बार होती रही हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण वर्षा की तीव्रता और आवृत्ति बढ़ गई है, जिससे भूस्खलन और जलभराव जैसी घटनाओं में वृद्धि हुई है। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि राज्य में दीर्घकालिक आपदा प्रबंधन और बाढ़ नियंत्रण के लिए योजनाएँ बनाई जानी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने प्रभावित इलाकों का दौरा कर राहत और बचाव कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने प्रभावित परिवारों के लिए तत्काल आर्थिक सहायता देने के निर्देश दिए। प्रशासन ने सभी जिलों में बचाव दल, एसडीआरएफ, पुलिस और अन्य टीमों को तैनात किया।
राज्य में हुई इस आपदा के कारण कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित हुआ। प्रशासन ने प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया। नागरिकों से नदी किनारे, खड्ड और ऊपरी पहाड़ी क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की गई।
उत्तराखंड में वर्षा मौसमी पैटर्न की तुलना में असामान्य रूप से हुई। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई परिवारों ने अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों में शरण ली। प्रशासन और राहत दल की मदद सराहनीय रही।
राज्य सरकार ने सभी जिलों में आपातकालीन स्थिति की समीक्षा के लिए उच्चस्तरीय बैठकें आयोजित की हैं। प्रभावित इलाकों में अतिरिक्त संसाधन, उपकरण और मानवशक्ति तैनात किए गए हैं।
मौसम विभाग ने आगामी सप्ताह के लिए चेतावनी जारी की है। भारी बारिश और भूस्खलन की घटनाओं से बचने के लिए नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।