January 13, 2026

देहरादून एयरपोर्ट पर 232 करोड़ रुपये के गबन का मामला: मैनेजर गिरफ्तार, जांच जारी

देहरादून एयरपोर्ट पर 232 करोड़ रुपये के गबन का मामला: मैनेजर गिरफ्तार, जांच जारी

देहरादून एयरपोर्ट पर 232 करोड़ रुपये के गबन का मामला: मैनेजर गिरफ्तार, जांच जारी

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30 अगस्त 2025, देहरादून: देहरादून एयरपोर्ट पर 232 करोड़ रुपये के गबन का मामला राज्य में चर्चा का विषय बन गया है। पुलिस और वित्तीय जांच एजेंसियों ने एक वरिष्ठ मैनेजर को गिरफ्तार किया है, जिसने फर्जी बिलों और नकली दस्तावेजों के माध्यम से बड़ी मात्रा में धन की हेराफेरी की थी। इस मामले ने न केवल एयरपोर्ट प्रशासन को शर्मसार किया है, बल्कि नागरिकों और व्यापारिक हितधारकों में भी चिंता पैदा कर दी है।

आरोपी की भूमिका और तरीका
जांच में पता चला है कि आरोपी मैनेजर एयरपोर्ट के वित्तीय विभाग में लंबे समय से कार्यरत था और उसे विभिन्न विभागों में खर्च और बिलों को मंजूरी देने का अधिकार प्राप्त था। उसने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए फर्जी बिल तैयार कर वास्तविक लेन-देन के रूप में प्रस्तुत किया। इन फर्जी बिलों में उपकरण खरीद, सेवाओं के भुगतान और अन्य प्रशासनिक खर्च के नाम पर धन की हेराफेरी की गई। प्रारंभिक जांच में यह भी पता चला कि आरोपी ने कई वर्षों से यह घोटाला कर रहा था और इस दौरान कुल 232 करोड़ रुपये का गबन किया गया।

फर्जी बिल और दस्तावेज़ी प्रक्रिया
जांच एजेंसियों ने बताया कि आरोपी ने फर्जी बिलों को एयरपोर्ट के खर्च के रिकार्ड में जोड़कर प्रशासन को विश्वास में लिया। बिलों में उपकरण, सेवाओं और अन्य खर्चों के नाम पर राशि दिखाई गई, लेकिन वास्तविक में कोई वस्तु या सेवा प्रदान नहीं की गई। इसके लिए आरोपी ने कई सहकर्मियों और बाहरी एजेंसियों के साथ सांठगांठ की। बैंक ट्रांजेक्शन और लेखा-जोखा की जांच से पता चला कि धन कई निजी खातों में स्थानांतरित किया गया।

जांच और गिरफ्तारी
पुलिस और आर्थिक अपराध शाखा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी की गतिविधियों पर करीब से नजर रखी। कई महीनों की निगरानी और प्रारंभिक दस्तावेज़ों की जांच के बाद पुलिस ने आरोपी मैनेजर को गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी से पूछताछ जारी है। पूछताछ में कई और नाम सामने आए हैं जिनकी संलिप्तता की जांच की जा रही है। जांच टीम ने कहा कि प्रारंभिक सबूतों से यह स्पष्ट हो गया है कि मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है और इसमें और लोग भी शामिल हो सकते हैं।

एयरपोर्ट प्रशासन की प्रतिक्रिया
देहरादून एयरपोर्ट प्रशासन ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी भी वित्तीय अनियमितता को गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सभी दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। एयरपोर्ट ने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए वित्तीय और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सुधार किया जाएगा। साथ ही, सभी विभागों में ऑडिट और निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

आर्थिक और प्रशासनिक प्रभाव
232 करोड़ रुपये का गबन एयरपोर्ट के वित्तीय ढांचे पर बड़ा असर डाल सकता है। इससे न केवल प्रशासनिक योजनाओं और विकास कार्यों पर प्रभाव पड़ा है, बल्कि एयरपोर्ट की विश्वसनीयता और नागरिकों तथा व्यापारिक हितधारकों के विश्वास को भी चुनौती मिली है। अधिकारियों का कहना है कि इस धन की हेराफेरी से कई विकास परियोजनाओं और रखरखाव कार्यों में देरी हो सकती है।

कानूनी प्रक्रिया और आगे की कार्रवाई
पुलिस ने बताया कि मामले में आरोप तय करने के लिए विभिन्न दस्तावेज़, बैंक रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन की जांच की जा रही है। गिरफ्तार आरोपी को अदालत में पेश किया जाएगा और प्रारंभिक सुनवाई के बाद जमानत या न्यायिक हिरासत तय होगी। जांच एजेंसियों ने कहा है कि आरोपी की संपत्ति और बैंक खातों की भी जांच की जाएगी ताकि गबन की गई राशि की बरामदगी की जा सके।

सुरक्षा और निगरानी में सुधार
इस मामले के प्रकाश में आने के बाद एयरपोर्ट प्रशासन ने वित्तीय और लेखा प्रक्रियाओं की समीक्षा शुरू कर दी है। अधिकारियों ने कहा कि भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए ऑडिटिंग सिस्टम, बिल अनुमोदन प्रक्रिया और वित्तीय निगरानी को और मजबूत किया जाएगा। इसके साथ ही, कर्मचारी प्रशिक्षण और जवाबदेही के मानक भी कड़े किए जाएंगे।

सांठगांठ और संभावित आरोपी
जांच में पता चला है कि आरोपी मैनेजर ने अपने कई सहकर्मियों और बाहरी एजेंसियों के साथ मिलकर फर्जी बिल बनाए। प्रारंभिक पूछताछ में कुछ और नाम सामने आए हैं जिनकी भूमिका की पुष्टि होनी बाकी है। पुलिस ने बताया कि जल्द ही अन्य संभावित आरोपी और उनके रोल का विवरण सार्वजनिक किया जाएगा।

सार्वजनिक और मीडिया प्रतिक्रिया
इस मामले को लेकर मीडिया में व्यापक कवरेज हुआ है। नागरिकों और व्यापारिक समुदाय ने एयरपोर्ट प्रशासन से जवाबदेही और कड़े कदम उठाने की मांग की है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामले न केवल वित्तीय घाटे का कारण बनते हैं, बल्कि प्रशासनिक विश्वसनीयता को भी प्रभावित करते हैं।

विशेषज्ञों की राय
वित्तीय और प्रशासनिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला केवल देहरादून एयरपोर्ट तक सीमित नहीं है। पूरे सरकारी और अर्ध-सरकारी क्षेत्रों में वित्तीय प्रक्रियाओं और निगरानी में सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि कर्मचारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने और वित्तीय अनियमितताओं को रोकने के लिए कठोर नियम और समय-समय पर ऑडिट अनिवार्य किए जाने चाहिए।

दैनिक प्रभातवाणी 
देहरादून एयरपोर्ट पर 232 करोड़ रुपये के गबन का मामला प्रशासनिक और कानूनी दृष्टि से गंभीर है। एक वरिष्ठ मैनेजर की गिरफ्तारी ने जांच को गति दी है, लेकिन मामले की पूरी जांच अभी बाकी है। एयरपोर्ट प्रशासन और जांच एजेंसियां मिलकर सुनिश्चित कर रही हैं कि दोषियों को कानून के अनुसार सजा मिले और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

इस मामले से स्पष्ट है कि वित्तीय निगरानी, ऑडिट और जवाबदेही के मजबूत तंत्र की आवश्यकता कितनी अहम है। नागरिकों, व्यापारिक हितधारकों और प्रशासन के लिए यह चेतावनी है कि ऐसे गबन के मामलों को रोकने के लिए सतर्क रहना और नियमित निगरानी बनाए रखना आवश्यक है।