DU ने परीक्षा और क्रेडिट प्रणाली में बड़े सुधार किए, छात्रों को मिले नए दिशा-निर्देश

दैनिक प्रभातवाणी शिक्षा डेस्क | नई दिल्ली | 6 दिसंबर 2025
दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) ने नई शिक्षा नीति NEP 2020 के तहत स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर मूल्यांकन और पदोन्नति नीतियों में व्यापक सुधार की घोषणा की है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस सुधार के उद्देश्य को छात्रों की नियमित भागीदारी, निरंतर सीखने और निष्पक्ष मूल्यांकन सुनिश्चित करना बताया है।
निरंतर मूल्यांकन को दी गई प्राथमिकता
नई नीति के तहत अब निरंतर मूल्यांकन (Continuous Assessment) को प्रमुख स्थान दिया गया है। इसका अर्थ है कि छात्र केवल अंतिम परीक्षा के परिणामों पर निर्भर नहीं रहेंगे, बल्कि उनकी कक्षा में उपस्थिति, छोटे परीक्षण, असाइनमेंट और परियोजनाओं के आधार पर उनके अंक निर्धारित किए जाएंगे।
विश्वविद्यालय के अधिकारी ने कहा, “यह कदम छात्रों को अकादमिक रूप से सक्रिय रखने के लिए उठाया गया है। अब छात्रों को नियमित रूप से कक्षा में भाग लेना और समय पर असाइनमेंट जमा करना अनिवार्य होगा।”
स्नातक स्तर पर क्रेडिट प्रणाली में बदलाव
स्नातक स्तर पर क्रेडिट अर्जन प्रणाली में भी बदलाव किया गया है। पहले छात्रों को कुल 44 क्रेडिट में से कम से कम 50% यानी 22 क्रेडिट अर्जित करना अनिवार्य था। नए सुधार के बाद अब छात्रों को 44 क्रेडिट में से कम से कम 28 क्रेडिट अर्जित करने होंगे, जो प्रतिशत के हिसाब से 63.6% होता है।
यह बदलाव छात्रों को अधिक नियमित और सतत अध्ययन के लिए प्रोत्साहित करेगा। इसके साथ ही यह कदम स्नातक पाठ्यक्रम की गुणवत्ता और निष्पक्ष मूल्यांकन प्रणाली को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में भी बदलाव
स्नातकोत्तर स्तर पर भी आंतरिक मूल्यांकन और परीक्षा के तरीकों में सुधार किया गया है। अब मास्टर स्तर के छात्रों के असाइनमेंट, परियोजनाओं, प्रस्तुतीकरण और कक्षा में भागीदारी को अंतिम ग्रेड में अधिक महत्व दिया जाएगा।
विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया कि यह प्रणाली एकल परीक्षा पर निर्भरता को कम करेगी और छात्रों के संपूर्ण शैक्षणिक प्रदर्शन को मापने में मदद करेगी।
शिक्षकों और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
शिक्षकों ने इस बदलाव का स्वागत किया है और कहा कि इससे शिक्षण और सीखने की प्रक्रिया में सुधार होगा। कई शिक्षाविदों का मानना है कि निरंतर मूल्यांकन छात्रों को सिर्फ परीक्षा के लिए पढ़ाई करने के बजाय वास्तविक समझ विकसित करने के लिए प्रेरित करेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस बदलाव से शैक्षणिक निष्पक्षता और गुणवत्ता सुनिश्चित होगी, और छात्र समय प्रबंधन, प्रस्तुति कौशल और विषय पर पकड़ में सुधार करेंगे।
छात्रों के लिए असर
छात्रों के लिए यह बदलाव यह सुनिश्चित करता है कि वे सिर्फ अंतिम परीक्षा पर निर्भर न रहें, बल्कि पूरे सेमेस्टर में नियमित रूप से भाग लें और असाइनमेंट पूरा करें। इससे उनकी अकादमिक सफलता में स्थिरता और निरंतरता आएगी।
कुछ छात्रों ने कहा, “पहले केवल अंतिम परीक्षा पर अधिक ध्यान देना पड़ता था। अब हमें हर कक्षा, असाइनमेंट और प्रोजेक्ट पर ध्यान देना होगा। यह हमें लंबे समय तक सीखने और विषय की गहरी समझ विकसित करने में मदद करेगा।”
नीति का उद्देश्य और भविष्य की दिशा
दिल्ली विश्वविद्यालय का उद्देश्य इस नीति के माध्यम से:
छात्रों में नियमित अध्ययन और सतत सीखने की आदत विकसित करना।
निष्पक्ष मूल्यांकन प्रणाली सुनिश्चित करना।
छात्रों की संपूर्ण अकादमिक क्षमता का मापन करना।
NEP 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप शिक्षा में गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धा बढ़ाना।
विश्वविद्यालय ने यह भी कहा कि भविष्य में यह प्रणाली सभी पाठ्यक्रमों में लागू की जाएगी, और छात्रों तथा शिक्षकों से लगातार प्रतिक्रिया लेकर इसे और प्रभावी बनाया जाएगा।
दैनिक प्रभातवाणी
दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा परीक्षा और आंतरिक मूल्यांकन में सुधार एक महत्वपूर्ण कदम है। यह नीति छात्रों को निरंतर अध्ययन, नियमित भागीदारी और सतत मूल्यांकन की आदत डालने में मदद करेगी।
NEP 2020 के तहत लागू ये बदलाव न केवल स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों के शैक्षणिक प्रदर्शन को बेहतर बनाएंगे, बल्कि उन्हें वास्तविक दुनिया में आवश्यक कौशल विकसित करने में भी सहायता करेंगे।
इस पहल से यह स्पष्ट होता है कि डीयू शिक्षा की गुणवत्ता और निष्पक्षता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है, और छात्रों को समग्र और संतुलित शिक्षा प्रदान करने का प्रयास जारी रहेगा।