January 12, 2026

अनिल अग्रवाल का बड़ा संकल्प: 75% संपत्ति दान, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में होगा

अनिल अग्रवाल का बड़ा संकल्प: 75% संपत्ति दान, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में होगा क्रांतिकारी बदलाव
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नई दिल्ली, 7 सितम्बर 2025 (दैनिक प्रभातवाणी)।
भारत के उद्योग जगत में “मेटल किंग” के नाम से प्रसिद्ध वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने हाल ही में अपने जीवन की सबसे बड़ी घोषणा करते हुए कहा है कि वे अपनी कुल संपत्ति का 75 प्रतिशत हिस्सा समाज और शैक्षणिक कार्यों के लिए दान करेंगे। भारतीय मुद्रा के अनुसार यह राशि लगभग 21,000 करोड़ रुपये आंकी गई है। यह किसी भी भारतीय उद्योगपति द्वारा किया गया अब तक का सबसे बड़ा व्यक्तिगत दान है। यह घोषणा न केवल भारतीय उद्योग जगत के लिए बल्कि सामाजिक विकास और शिक्षा क्षेत्र के लिए भी मील का पत्थर साबित हो रही है।


अनिल अग्रवाल का प्रारंभिक जीवन

अनिल अग्रवाल का जन्म 1954 में पटना (बिहार) के एक साधारण कारोबारी परिवार में हुआ था। उनके पिता कपड़ों का छोटा-सा व्यवसाय करते थे और घर की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं थी। अनिल अग्रवाल बचपन से ही संघर्षशील रहे और उन्होंने साधारण हिंदी मीडियम स्कूल से पढ़ाई की। उन्होंने कॉलेज की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी और मात्र 19 साल की उम्र में मुंबई का रुख किया। यही वह मोड़ था जिसने उनके जीवन को नया आयाम दिया।

मुंबई में उन्होंने धातु के छोटे-छोटे कारोबार से शुरुआत की। वे तांबे के स्क्रैप का व्यापार करने लगे और धीरे-धीरे उनके भीतर उद्योग जगत में बड़ा मुकाम हासिल करने की ललक बढ़ती गई।


वेदांता ग्रुप की स्थापना और विस्तार

1976 में अनिल अग्रवाल ने अपनी पहली कंपनी स्टरलाइट इंडस्ट्रीज की नींव रखी। इसके बाद उन्होंने तांबे और एल्युमीनियम उद्योग में विस्तार किया और धीरे-धीरे एक बड़े कॉर्पोरेट समूह की नींव रखी। 2003 में उनकी कंपनी लंदन स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध हुई और इसी वर्ष “वेदांता रिसोर्सेज” की स्थापना हुई।

आज वेदांता समूह खनन और धातु क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी है। कंपनी का कारोबार भारत, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों तक फैला हुआ है। समूह का वार्षिक टर्नओवर हजारों करोड़ रुपये में है और यह लाखों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार दे रहा है।


परिवार और निजी जीवन

अनिल अग्रवाल ने लंदन में स्थायी निवास बना लिया है, हालांकि उनका दिल हमेशा भारत से जुड़ा रहता है। उनकी पत्नी का नाम किरण अग्रवाल है। उनके परिवार में एक पुत्र और एक पुत्री हैं। पुत्र अग्निश अग्रवाल फिलहाल वेदांता रिसोर्सेज के कारोबार से जुड़े हुए हैं और धीरे-धीरे पारिवारिक व्यापार की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वहीं पुत्री प्रियंका अग्रवाल भी कई सामाजिक कार्यों और शिक्षा संबंधी प्रोजेक्ट्स से जुड़ी हुई हैं।

अनिल अग्रवाल का परिवार भले ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यस्त रहता हो, लेकिन भारतीय संस्कृति और परंपरा के प्रति गहरा लगाव रखता है। हर बड़े निर्णय में उनके परिवार का सहयोग और समर्थन शामिल रहता है।


समाज और शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता

अनिल अग्रवाल हमेशा से ही मानते रहे हैं कि “धन तभी सार्थक है जब वह समाज और देश के काम आए।” इसी सोच के चलते उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में कई उल्लेखनीय कार्य किए हैं।

उन्होंने “अनिल अग्रवाल फाउंडेशन” की स्थापना की, जिसके माध्यम से ग्रामीण भारत में आधुनिक शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और महिला सशक्तिकरण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। हाल ही में उन्होंने घोषणा की थी कि आने वाले वर्षों में वे 1 करोड़ से अधिक बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित करेंगे।


75 प्रतिशत दान का महत्व

अनिल अग्रवाल द्वारा अपनी कुल संपत्ति का 75 प्रतिशत दान करने का निर्णय केवल एक व्यक्तिगत पहल नहीं है बल्कि यह भारत की दान परंपरा में नया कीर्तिमान है। इस धन का बड़ा हिस्सा शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में खर्च किया जाएगा। विशेष रूप से ग्रामीण भारत और वंचित वर्गों के बच्चों की शिक्षा पर जोर होगा।

भारतीय समाज में जहां करोड़ों बच्चे अभी भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित हैं, वहां यह दान उम्मीद की नई किरण लेकर आया है। इससे हजारों स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और स्कॉलरशिप प्रोग्राम शुरू होने की संभावना है।


देशहित में अनिल अग्रवाल की सोच

अनिल अग्रवाल हमेशा से यह कहते रहे हैं कि भारत की ताकत उसके युवा और उसकी शिक्षा में निहित है। वे मानते हैं कि अगर देश के बच्चे शिक्षित और सशक्त होंगे तो भारत आने वाले समय में न केवल आर्थिक बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी विश्व का नेतृत्व करेगा।

उनका मानना है कि उद्योगपतियों और सफल लोगों का कर्तव्य केवल धन कमाना नहीं बल्कि समाज को लौटाना भी है। इसी सोच के चलते वे लगातार बड़े पैमाने पर समाज सेवा में निवेश करते आ रहे हैं।


आलोचना और चुनौतियाँ

यह भी सच है कि वेदांता समूह को समय-समय पर पर्यावरणीय और खनन गतिविधियों से जुड़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है। विशेष रूप से ओडिशा और तमिलनाडु में कंपनी की गतिविधियों पर कई बार सवाल उठाए गए। हालांकि अनिल अग्रवाल का कहना है कि वे हमेशा सस्टेनेबल डेवलपमेंट की दिशा में काम कर रहे हैं और आने वाले वर्षों में कंपनी का लक्ष्य ग्रीन एनर्जी और पर्यावरण-सुरक्षा की दिशा में बड़ा निवेश करना है।


दैनिक प्रभातवाणी

अनिल अग्रवाल का जीवन संघर्ष, मेहनत, जोखिम और समर्पण का उदाहरण है। पटना की गलियों से निकलकर लंदन के उद्योग जगत तक पहुंचने की उनकी यात्रा प्रेरणादायक है। उनकी यह घोषणा कि वे अपनी संपत्ति का 75 प्रतिशत दान करेंगे, न केवल एक उद्योगपति के रूप में बल्कि एक सच्चे समाजसेवी और देशभक्त नागरिक के रूप में उनकी पहचान को और मजबूत करती है।

भारत जैसे विकासशील देश में जहां शिक्षा और स्वास्थ्य सबसे बड़ी चुनौतियाँ हैं, अनिल अग्रवाल का यह कदम लाखों लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगा। यह कहना गलत नहीं होगा कि आने वाले समय में उनकी यह पहल भारत को शिक्षा और सामाजिक विकास के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगी।