उत्तराखंड में रोजगार की हकीकत: धामी सरकार के चार साल और 25 हज़ार नौकरियों का दावा
ajaysemalty98 September 7, 2025
देहरादून, 7 सितंबर 2025।
उत्तराखंड के युवा लंबे समय से सरकारी नौकरियों और रोजगार के अवसरों की राह देख रहे थे। बेरोजगारी हमेशा से राज्य की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जुलाई 2021 में पदभार संभालते ही युवाओं को रोजगार देने का वादा किया था। आज चार साल पूरे होने के बाद सरकार का दावा है कि उसने 25 हज़ार से अधिक सरकारी नौकरियाँ युवाओं को उपलब्ध कराई हैं। साथ ही, विदेशी रोजगार योजनाओं के ज़रिये भी युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवसर दिलाने की कोशिश की गई है। इस रिपोर्ट में हम देखते हैं कि अब तक कितनी घोषणाएँ की गईं, कितनी नौकरियाँ मिलीं और इन अवसरों को पाने में युवाओं को कितना समय लगा।
पहली घोषणा और रोजगार का सफर
मुख्यमंत्री धामी ने 2021 में पद संभालते ही यह घोषणा की थी कि उनकी सरकार युवाओं को प्राथमिकता देगी और रोजगार के नए अवसर खोलेगी। पहले साल में ही सरकार ने उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) और लोक सेवा आयोग (UKPSC) के माध्यम से भर्ती की प्रक्रिया शुरू कराई। पुलिस, शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासनिक सेवाओं में लगातार विज्ञप्तियाँ निकाली गईं।
लेकिन सच्चाई यह है कि पहली घोषणाओं से नौकरी मिलने तक युवाओं को औसतन 10 से 18 महीने का समय इंतजार करना पड़ा। कारण साफ था—भर्ती परीक्षाओं की लंबी प्रक्रिया, पेपर लीक और कानूनी दिक़्क़तें। हालांकि 2023 में नकल विरोधी कानून लागू होने के बाद स्थिति बेहतर हुई और भर्ती की प्रक्रिया तेज़ हुई।
25 हज़ार नौकरियों का आँकड़ा – कितना सही?
सरकार का कहना है कि चार वर्षों में 25 हज़ार युवाओं को नौकरी मिली। इनमें शामिल हैं:
शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक और व्याख्याता पद।
पुलिस बल में उपनिरीक्षक, कांस्टेबल और होमगार्ड।
स्वास्थ्य विभाग में नर्स, डॉक्टर और पैरा मेडिकल स्टाफ।
राजस्व और प्रशासनिक सेवाओं में पटवारी, लेखपाल और अधिकारी।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वास्तविक संख्या लगभग 23 हज़ार नियुक्तियाँ हैं, जबकि शेष 2 हज़ार पदों की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। सरकार ने पाँचवें साल में 7 हज़ार नई नौकरियों की योजना की भी घोषणा की है।
विदेश में रोजगार: नया प्रयोग
2022 में सरकार ने “मुख्यमंत्री कौशल उन्नयन एवं वैश्विक रोजगार योजना” शुरू की। इस योजना के तहत युवाओं को जर्मनी, जापान और खाड़ी देशों में काम दिलाने की पहल की गई। अब तक 154 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया और इनमें से 37 को जापान में रोजगार मिला।
यह संख्या बड़ी नहीं है, लेकिन इसने यह संकेत दिया कि राज्य सरकार पारंपरिक सरकारी नौकरियों के अलावा वैश्विक अवसरों पर भी ध्यान दे रही है।
नकल विरोधी कानून से बदली तस्वीर
2021 और 2022 में कई बार उत्तराखंड भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक के मामले सामने आए। इससे युवाओं में निराशा फैल गई। 2023 में धामी सरकार ने सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया। इस कानून के तहत 10 साल तक की सज़ा और भारी जुर्माने का प्रावधान है। परिणाम यह हुआ कि 2024 और 2025 की भर्ती परीक्षाएँ बिना लीक के सम्पन्न हुईं। 100 से अधिक “पेपर माफिया” जेल भेजे गए।
युवाओं का विश्वास धीरे-धीरे लौटा और नियुक्तियों की प्रक्रिया तेज़ी से पूरी हुई।
विपक्ष के आरोप
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल सरकार के दावों पर सवाल उठाते रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार नौकरियों की संख्या को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रही है। विपक्ष का यह भी आरोप है कि रोजगार के नाम पर विज्ञप्तियाँ तो निकाली जाती हैं, लेकिन अंतिम परिणाम आने में वर्षों लग जाते हैं।
इसके अलावा, विपक्ष यह भी कहता है कि निजी क्षेत्र और स्वरोजगार योजनाओं में पर्याप्त अवसर नहीं हैं, जिससे युवाओं का पलायन रुका नहीं है।
युवाओं का अनुभव
रुद्रप्रयाग के अभिषेक, जिन्होंने 2021 में आवेदन किया था, को 2023 के अंत में शिक्षक पद पर नियुक्ति मिली। उनका कहना है कि “पहले पेपर लीक और कोर्ट केस की वजह से उम्मीद टूट चुकी थी, लेकिन नकल विरोधी कानून लागू होने के बाद ही नौकरी मिल सकी।”
वहीं, हरिद्वार की पूजा, जिन्हें जापान में नौकरी मिली है, कहती हैं कि “विदेशी रोजगार योजना से हमें नई दिशा मिली है। अगर सरकार और देशों के साथ करार करे, तो हज़ारों युवाओं को बाहर अवसर मिल सकता है।”
रोजगार और पलायन की समस्या
उत्तराखंड में रोजगार की कमी के कारण पलायन हमेशा से गंभीर मुद्दा रहा है। धामी सरकार ने रोजगार की दिशा में कदम उठाए हैं, लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में युवा दिल्ली, मुंबई और अन्य राज्यों का रुख कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ सरकारी नौकरियों पर ध्यान देने से समस्या हल नहीं होगी। राज्य में उद्योग, पर्यटन और कृषि आधारित रोजगार बढ़ाने होंगे।
भविष्य की योजनाएँ
सरकार ने 2025-26 में नई भर्ती योजनाओं की घोषणा की है। इनमें पुलिस में 2000 से अधिक पद, शिक्षा विभाग में 3000 पद और स्वास्थ्य क्षेत्र में 1500 पद शामिल हैं। इसके अलावा, स्टार्टअप और स्वरोजगार योजनाओं को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
दैनिक प्रभातवाणी
चार साल के कार्यकाल में धामी सरकार ने रोजगार के मोर्चे पर ठोस काम किया है।
25 हज़ार नौकरियों का दावा आंशिक रूप से सही है—वास्तविक संख्या 23 हज़ार के आसपास है।
घोषणाओं और नियुक्तियों में समय अंतराल ज़रूर रहा, लेकिन नकल विरोधी कानून ने प्रक्रिया को तेज़ किया।
विदेशी रोजगार योजना ने युवाओं को नए अवसर दिए, भले ही संख्या अभी सीमित है।
विपक्ष के आरोपों और युवाओं की वास्तविक कठिनाइयों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
कुल मिलाकर, यह कहा जा सकता है कि रोजगार की दिशा में कदम उठे हैं, लेकिन चुनौती अभी भी बरकरार है। राज्य के युवाओं को स्थायी और व्यापक अवस