January 13, 2026

उत्तरकाशी-गंगोत्री मार्ग पर एनजीटी का कड़ा रुख: 500 से अधिक अवैध निर्माणों पर 27 नवंबर तक जवाब तलब

उत्तरकाशी-गंगोत्री मार्ग पर एनजीटी का कड़ा रुख: 500 से अधिक अवैध निर्माणों पर 27 नवंबर तक जवाब तलब
Spread the love

दिनांक: 7 सितंबर 2025 | स्थान: उत्तरकाशी, उत्तराखंड

उत्तरकाशी जिले में गंगोत्री मार्ग पर हाल के वर्षों में 500 से अधिक अवैध निर्माण हो चुके हैं। इनमें कई निर्माण भागीरथी नदी के किनारे और बाढ़ संभावित क्षेत्रों में स्थित हैं, जो न केवल पर्यावरण के लिए खतरा हैं बल्कि आने वाले समय में आपदा का कारण भी बन सकते हैं। इस अनियंत्रित निर्माण पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने गंभीर चिंता जताई है और उत्तराखंड के शहरी विकास विभाग, पर्यावरण मंत्रालय और उत्तरकाशी जिलाधिकारी से 27 नवंबर 2025 तक हलफनामे के माध्यम से जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

एनजीटी ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया है। यह कदम 8 अगस्त 2025 को हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित रिपोर्ट पर आधारित है। रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने चेतावनी दी थी कि गंगोत्री धाम जैसे नाजुक पारिस्थितिकी क्षेत्र में यह अनियंत्रित निर्माण भूस्खलन और जल संकट जैसी समस्याओं को जन्म दे सकता है। एनजीटी ने कहा कि यह मामला पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986, ठोस कचरा प्रबंधन नियम, 2016, आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 और गंगा संरक्षण आदेश, 2016 के उल्लंघन से जुड़ा हुआ है।


मार्ग पर खतरे और पिछली घटनाएँ

उत्तरकाशी-गंगोत्री मार्ग पर पहले भी कई बार भूस्खलन और सड़क धंसने की घटनाएं हुई हैं।

  • भटवाड़ी के पास हाल ही में भूस्खलन के कारण हाईवे लगभग पाँच घंटे तक अवरुद्ध रहा।

  • संगलाई क्षेत्र में भी पहाड़ी से मलबा गिरने के कारण सड़क करीब सात घंटे बंद रही।

  • बीआरओ ने दोनों जगहों पर मलबा हटाकर सड़क को सुचारू किया, लेकिन इन घटनाओं ने स्पष्ट किया कि मार्ग पर अनियंत्रित निर्माण यातायात और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा हैं।

अनियंत्रित निर्माण न केवल यात्रियों के लिए असुविधा पैदा कर रहे हैं, बल्कि धार्मिक तीर्थस्थलों तक पहुंच को भी प्रभावित कर रहे हैं। गंगोत्री धाम जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल पर पर्यावरणीय असंतुलन की समस्या बढ़ती जा रही है।


एनजीटी का आदेश और स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी

एनजीटी ने स्पष्ट किया है कि उत्तरकाशी-गंगोत्री मार्ग पर अनियंत्रित निर्माणों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों को इस मामले में शीघ्र और प्रभावी कदम उठाने होंगे।

  • एनजीटी ने 27 नवंबर तक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।

  • उत्तरकाशी के जिलाधिकारी और शहरी विकास विभाग को पर्यावरण और आपदा सुरक्षा के मानकों के तहत जवाब देना होगा।

इस आदेश का मुख्य उद्देश्य गंगोत्री धाम जैसे नाजुक और धार्मिक स्थल की सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही यह कदम पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन को रोकने और भविष्य में आपदाओं से बचाव की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


यात्री और स्थानीय लोगों पर असर

गंगोत्री मार्ग पर अनियंत्रित निर्माण और भूस्खलन की घटनाओं से स्थानीय लोग और तीर्थयात्री दोनों परेशान हैं।

  • स्थानीय व्यवसाय और पर्यटन पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

  • तीर्थयात्रियों के लिए मार्ग बंद होने के कारण यात्रा में देरी और असुविधा बढ़ी है।

  • सुरक्षा की कमी और अवैध निर्माणों की बढ़ती संख्या से स्थानीय लोग भी भयभीत और असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

एनजीटी के आदेश के बाद, स्थानीय प्रशासन को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में कोई निर्माण नियंत्रित और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से ही हो।


पर्यावरणीय महत्व और टिकाऊ विकास

गंगोत्री मार्ग उत्तराखंड के लिए न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह पर्यावरणीय दृष्टि से भी संवेदनशील क्षेत्र में आता है।

  • भागीरथी नदी के किनारे निर्माण से जल स्तर और नदियों की प्राकृतिक धारा प्रभावित हो सकती है।

  • पहाड़ी क्षेत्रों में अवैध निर्माण से भूस्खलन और मिट्टी कटाव की घटनाओं में वृद्धि हो सकती है।

  • पर्यावरणीय नियमों का पालन सुनिश्चित करना, गंगा संरक्षण और जलवायु सुरक्षा के लिए अत्यावश्यक है।

एनजीटी का यह आदेश उत्तराखंड में टिकाऊ और सुरक्षित विकास की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।


दैनिक प्रभातवाणी

उत्तरकाशी-गंगोत्री मार्ग पर 500 से अधिक अवैध निर्माण, भूस्खलन की घटनाएं और पर्यावरणीय खतरे राज्य के लिए एक गंभीर चेतावनी हैं। एनजीटी ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए 27 नवंबर तक हलफनामे के माध्यम से जवाब तलब किया है।

स्थानीय प्रशासन और पर्यावरण विभाग को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि

  • सभी अनियंत्रित और अवैध निर्माण तत्काल हटाए जाएँ

  • गंगोत्री धाम और आसपास के क्षेत्र भविष्य में सुरक्षित और संरक्षित रहें।

  • पर्यावरणीय नियमों का पालन सुनिश्चित कर यात्री और स्थानीय लोगों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

यह कदम उत्तराखंड के पर्यावरण और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और संरक्षण की दिशा में अहम साबित होगा। स्थानीय प्रशासन और विभागीय अधिकारी अब पर्यावरण, सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के मानकों के तहत प्रभावी कदम उठाने के लिए जिम्मेदार हैं।