टिहरी गढ़वाल में बस हादसा: चंबा-ऋषिकेश हाईवे पर 2 की मौत, 17 घायल — तेज़ रफ़्तार बस सेवाओं पर उठे सवाल
ajaysemalty98 September 11, 2025
चंबा (टिहरी गढ़वाल), 11 सितम्बर।
टिहरी गढ़वाल में बस हादसा: चंबा-ऋषिकेश हाईवे पर 2 की मौत, 17 घायल — तेज़ रफ़्तार बस सेवाओं पर उठे सवाल
टिहरी गढ़वाल ज़िले के चंबा-ऋषिकेश राष्ट्रीय राजमार्ग से एक दर्दनाक हादसे की खबर ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। जानकारी के अनुसार, चंबा-ऋषिकेश राष्ट्रीय राजमार्ग मे आमसेरा के पास एक बस अचानक अनियंत्रित होकर गहरी खाई में गिर गई। इस दुर्घटना में दो यात्रियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि करीब 17 लोग घायल हुए हैं। घायलों को स्थानीय प्रशासन, पुलिस और ग्रामीणों की मदद से तुरंत नज़दीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां कई की हालत गंभीर बताई जा रही है।
यह हादसा पहाड़ी सड़कों पर लगातार हो रही दुर्घटनाओं की एक और कड़ी है। घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर क्यों उत्तराखंड जैसे संवेदनशील पहाड़ी इलाकों में यातायात सुरक्षा को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है।
हादसे की भयावह तस्वीर
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसा अचानक हुआ। बस ऋषिकेश की ओर जा रही थी कि तभी मोड़ पर चालक वाहन पर संतुलन नहीं रख पाया और बस खाई में जा गिरी। सड़क संकरी होने और बारिश के चलते जगह-जगह फिसलन बनी हुई थी। हादसे के तुरंत बाद ग्रामीणों ने मौके पर पहुँचकर रेस्क्यू अभियान शुरू किया। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीमें भी घटनास्थल पर पहुँचीं।
बस से चीख-पुकार सुनाई दे रही थी। कई यात्री खिड़कियों और दरवाज़ों से कूदने की कोशिश कर रहे थे। घायलों को निकालने में स्थानीय लोगों ने अहम भूमिका निभाई। प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य में एंबुलेंस और स्वास्थ्य टीमों को लगाया।
मृतक और घायलों की स्थिति
अभी तक मिली जानकारी के अनुसार, दो यात्रियों की मौत हो चुकी है। मृतकों की पहचान की प्रक्रिया चल रही है। घायल यात्रियों में कई महिलाएँ और बुजुर्ग भी शामिल हैं। 17 घायलों को नज़दीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जिनमें से कुछ की हालत गंभीर बनी हुई है।
पहाड़ी सड़कों पर लगातार हादसे
उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में सड़क हादसे कोई नई बात नहीं हैं। चंबा-ऋषिकेश हाईवे और टिहरी गढ़वाल के अन्य मार्ग अक्सर ऐसे हादसों के गवाह बनते हैं। संकरी और घुमावदार सड़कों पर अक्सर तेज़ रफ़्तार वाहन हादसों का कारण बन जाते हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि इन इलाकों में सड़क की स्थिति, मोड़ों पर सुरक्षा रेलिंग की कमी, खराब मौसम और चालकों की लापरवाही मिलकर दुर्घटनाओं को बढ़ावा देते हैं।
विश्वनाथ एक्सप्रेस और हिमगिरि बस सेवा पर सवाल
स्थानीय यात्रियों ने लंबे समय से शिकायत की है कि कुछ निजी बस सेवाएँ — जैसे विश्वनाथ एक्सप्रेस और हिमगिरि बस सेवा — अक्सर तेज़ रफ़्तार में चलती हैं। यात्रियों का कहना है कि इन बसों के चालक समय पर गंतव्य तक पहुँचने की होड़ में सुरक्षा नियमों की अनदेखी करते हैं।
कई बार यात्री ड्राइवर से धीरे चलाने की गुहार लगाते हैं, लेकिन उसे नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है।
संकरी और खतरनाक सड़कों पर भी ये बसें तेज़ गति से दौड़ती हैं।
कई बार ओवरटेकिंग और अचानक ब्रेक लगाने जैसी घटनाएँ सामने आती हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यदि इस क्षेत्र में बस सेवाओं की गति पर नियंत्रण रखा जाए तो हादसों में काफी कमी लाई जा सकती है।
यात्रियों की दिक्कतें
हादसे के बाद घायलों और अन्य यात्रियों ने कहा कि वे लगातार बसों की रफ़्तार से डरते रहते हैं। लेकिन विकल्प न होने के कारण उन्हें इन्हीं बसों में सफर करना पड़ता है। कई यात्री यह भी बताते हैं कि बस स्टाफ का रवैया यात्रियों की शिकायतों के प्रति उपेक्षापूर्ण रहता है।
प्रशासन और पुलिस की प्रतिक्रिया
हादसे की खबर मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुँचे। जिलाधिकारी और एसपी ने घटना की जांच के आदेश दिए हैं। प्रारंभिक जाँच में चालक की लापरवाही और तेज़ रफ़्तार को मुख्य कारण माना जा रहा है।
पुलिस ने कहा है कि मृतकों के परिजनों को मुआवजा दिया जाएगा और घायलों के इलाज का पूरा खर्च प्रशासन वहन करेगा। साथ ही, परिवहन विभाग से भी कहा गया है कि वे निजी बस सेवाओं की फिटनेस और संचालन प्रणाली की जाँच करें।
सरकार के कदम और कमियाँ
उत्तराखंड सरकार समय-समय पर सड़क सुरक्षा के दावे करती रही है। स्मार्ट ड्राइविंग सेंटर, फिटनेस टेस्ट, और रोड सेफ्टी नियम लागू करने की योजनाएँ बनाई गई हैं। लेकिन ज़मीनी स्तर पर इनका प्रभाव बहुत कम दिखाई देता है।
कई बसें फिटनेस टेस्ट पास किए बिना सड़कों पर दौड़ रही हैं।
चालकों की ट्रेनिंग और मेडिकल जाँच की प्रक्रिया ढीली है।
पहाड़ी सड़कों पर पर्याप्त सुरक्षा प्रबंध नहीं हैं।
विशेषज्ञों की राय
यातायात विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में सड़क हादसों को रोकना है तो तीन स्तरों पर काम करना ज़रूरी है:
सड़क संरचना सुधार — संकरी सड़कों को चौड़ा किया जाए, मोड़ों पर रेलिंग लगाई जाए और सड़क संकेतक लगाए जाएँ।
बस सेवाओं पर निगरानी — निजी बस सेवाओं की स्पीड लिमिट तय की जाए और हर बस में GPS ट्रैकिंग अनिवार्य हो।
चालकों की ट्रेनिंग — पर्वतीय मार्गों पर चलने वाले चालकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाए और उनके कार्य घंटों पर नियंत्रण हो।
दैनिक प्रभातवाणी
चंबा-ऋषिकेश हाईवे पर हुआ यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं है, बल्कि यह राज्य की परिवहन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। जब तक विश्वनाथ एक्सप्रेस, हिमगिरि जैसी तेज़ रफ़्तार बस सेवाओं पर निगरानी नहीं रखी जाती और सड़क सुरक्षा के ठोस उपाय नहीं किए जाते, तब तक ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति होती रहेगी।
राज्य सरकार और प्रशासन को अब केवल हादसे के बाद राहत और मुआवजे तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि ठोस नीतियाँ और सख्त कार्यवाही करनी होगी। तभी उत्तराखंड की सड़कें यात्रियों के लिए सुरक्षित बन पाएंगी।