प्रधानमंत्री मोदी का उत्तराखंड दौरा: आपदा प्रभावितों के लिए 1,200 करोड़ का राहत पैकेज

देहरादून, 12 सितंबर 2025।
देहरादून। उत्तराखंड इस समय प्राकृतिक आपदाओं की भीषण मार झेल रहा है। लगातार हो रही तेज़ बारिश, बादल फटने की घटनाएँ, भूस्खलन और बाढ़ ने राज्य के अनेक जिलों में तबाही मचा दी है। कई परिवार उजड़ गए हैं, घर और खेत ध्वस्त हो गए हैं तथा सड़कें और पुल बह जाने से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। ऐसे कठिन समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का देहरादून आना न केवल राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, बल्कि पीड़ितों के लिए उम्मीद की किरण भी साबित हुआ है। प्रधानमंत्री ने प्रभावित इलाकों का दौरा कर प्रत्यक्ष रूप से स्थिति का जायजा लिया और राज्यवासियों को भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार हर कदम पर उनके साथ खड़ी है।
प्रधानमंत्री ने अपने दौरे के दौरान ₹1,200 करोड़ के विशेष राहत पैकेज की घोषणा की। यह राशि सीधे तौर पर आपदा प्रभावित जिलों की पुनर्बहाली और राहत कार्यों में उपयोग की जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने मृतकों के परिजनों को ₹2 लाख और घायलों को ₹50,000 की अनुग्रह राशि देने का ऐलान किया। आपदा में माता-पिता को खो चुके बच्चों के लिए प्रधानमंत्री ने ‘PM CARES for Children’ योजना के अंतर्गत दीर्घकालिक सहायता देने की घोषणा की, जिससे उनके शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
मुख्यमंत्री धामी के साथ समीक्षा बैठक और रणनीति निर्माण
देहरादून आगमन पर प्रधानमंत्री मोदी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में आपदा राहत कार्यों की मौजूदा स्थिति, पुनर्वास योजनाओं और बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण पर विस्तृत चर्चा की गई। केंद्र और राज्य दोनों ने मिलकर निर्णय लिया कि राहत पैकेज का बड़ा हिस्सा ग्रामीण इलाकों के पुनर्निर्माण और जीवन-यापन बहाली पर खर्च किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पारदर्शिता और समयबद्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि प्रभावित लोगों तक राहत पहुँचाने में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।
पहाड़ों पर तबाही का मंजर
उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों—रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़, चमोली, बागेश्वर और टिहरी गढ़वाल—में सबसे ज्यादा तबाही देखने को मिली है। रुद्रप्रयाग में मंदाकिनी और अलकनंदा नदियों का जलस्तर बढ़ने से दर्जनों गाँवों को खाली कराना पड़ा। उत्तरकाशी में गंगोत्री हाईवे पर जगह-जगह भूस्खलन होने से यातायात बाधित है। चमोली जिले में कई ग्रामीण इलाकों में बादल फटने की वजह से खेत बह गए और पशुधन का भी नुकसान हुआ। पिथौरागढ़ और बागेश्वर के दूरदराज़ इलाकों में सड़कें टूट जाने से राहत दलों को पहुँचने में भारी दिक्कत हो रही है। टिहरी और देहरादून के ग्रामीण अंचल में मकान धसकने और ज़मीन खिसकने की घटनाएँ लगातार जारी हैं।
प्रधानमंत्री आवास योजना से प्रभावित परिवारों को राहत
पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि जिन परिवारों के घर आपदा में पूरी तरह ध्वस्त हो गए हैं, उनके लिए प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-Gramin) के तहत विशेष परियोजनाएँ लागू की जाएंगी। यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में प्रभावित परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी। सरकार ने यह भी आश्वासन दिया कि जिन परिवारों का रोज़गार और खेतीबाड़ी पूरी तरह चौपट हो गई है, उन्हें अतिरिक्त कृषि सहायता और पशुपालन आधारित अनुदान दिया जाएगा, ताकि वे जल्द से जल्द आत्मनिर्भर बन सकें।
बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण पर जोर
आपदा ने न केवल घरों और खेतों को नुकसान पहुँचाया है बल्कि राज्य की आधारभूत संरचना को भी गहरी चोट दी है। कई नेशनल हाईवे, ग्रामीण सड़कें और पुल बह गए हैं, जिससे पहाड़ी इलाकों का संपर्क कट गया है। स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र और स्वास्थ्य केंद्र भी प्रभावित हुए हैं। प्रधानमंत्री ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि केंद्र सरकार राज्य को बुनियादी सुविधाओं के पुनर्निर्माण में हर संभव मदद करेगी। विशेष रूप से सड़क और हाईवे बहाली के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को अतिरिक्त फंड उपलब्ध कराया जाएगा।
शिक्षा और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान
आपदा से प्रभावित बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार ने संयुक्त रूप से निर्णय लिया है कि अस्थायी स्कूल और मोबाइल शिक्षा केंद्र स्थापित किए जाएँ। वहीं, जिन अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को नुकसान पहुँचा है, उनकी मरम्मत और आवश्यक दवाइयों की आपूर्ति को प्राथमिकता दी जाएगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि आपदा से जूझ रहे इलाकों में मोबाइल मेडिकल यूनिट्स भेजी जाएंगी ताकि घायलों और बीमार लोगों को तुरंत इलाज मिल सके।
सामाजिक-आर्थिक प्रभाव
इस आपदा ने राज्य की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाला है। कृषि और पर्यटन, जो उत्तराखंड की रीढ़ माने जाते हैं, दोनों को भारी नुकसान हुआ है। बागेश्वर और पिथौरागढ़ जैसे जिलों में सेब और आलू की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं। चमोली और रुद्रप्रयाग में चारधाम यात्रा प्रभावित होने से स्थानीय व्यापारियों की आमदनी पर प्रतिकूल असर पड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि राहत पैकेज केवल तत्काल सहायता के लिए पर्याप्त है, लेकिन दीर्घकालिक पुनर्बहाली के लिए राज्य को विशेष ‘आपदा पुनर्निर्माण योजना’ की आवश्यकता होगी।
विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों की राय
पर्यावरण विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि लगातार बढ़ रही प्राकृतिक आपदाएँ पहाड़ी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए गंभीर खतरा हैं। उनका मानना है कि अंधाधुंध सड़क निर्माण, अवैज्ञानिक खनन और ग्लेशियर पिघलने की घटनाएँ आपदा के जोखिम को बढ़ा रही हैं। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि राहत पैकेज के साथ-साथ राज्य को आपदा प्रबंधन ढाँचे को और मज़बूत करने पर ध्यान देना होगा। इसके लिए गाँव-गाँव में आपदा प्रबंधन समितियाँ और जल्दी चेतावनी देने वाली तकनीकें (Early Warning Systems) लागू करनी होंगी।
प्रधानमंत्री का आश्वासन और जनता की उम्मीदें
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तराखंड की जनता का साहस और धैर्य प्रशंसनीय है। उन्होंने आश्वासन दिया कि केंद्र और राज्य मिलकर हर संभव मदद करेंगे और कोई भी प्रभावित परिवार खुद को अकेला महसूस न करे। मुख्यमंत्री धामी ने प्रधानमंत्री का धन्यवाद करते हुए कहा कि यह पैकेज राज्य के लिए जीवनरेखा साबित होगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राहत और पुनर्वास कार्यों में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी नहीं होने दी जाएगी और सभी कार्य पारदर्शिता के साथ होंगे।
भविष्य की चुनौतियाँ और समाधान
हालाँकि राहत पैकेज से तत्काल संकट कम होगा, लेकिन उत्तराखंड के सामने बड़ी चुनौती दीर्घकालिक आपदा प्रबंधन और सतत विकास की है। विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य को अब पर्यावरण संतुलन और विकास के बीच संतुलन बनाना होगा। पहाड़ी इलाकों में निर्माण कार्य करते समय भू-वैज्ञानिकों की रिपोर्ट को अनिवार्य करना चाहिए। साथ ही, ग्रामीण इलाकों में आजीविका के वैकल्पिक साधन जैसे बागवानी, डेयरी और स्थानीय हस्तशिल्प को बढ़ावा देकर लोगों की आर्थिक स्थिति मज़बूत करनी होगी।
दैनिक प्रभातवाणी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह दौरा और ₹1,200 करोड़ का राहत पैकेज उत्तराखंड के आपदा प्रभावित लोगों के लिए एक बड़ी राहत है। मृतकों के परिवारों को मुआवज़ा, घायलों को सहायता, अनाथ बच्चों के लिए PM CARES योजना और घर खो चुके परिवारों के लिए पीएम आवास योजना निश्चित ही पीड़ितों को संबल प्रदान करेंगे। मगर यह भी उतना ही सच है कि आपदा से निपटने के लिए केवल राहत पैकेज पर्याप्त नहीं है। राज्य को दीर्घकालिक रणनीति, सशक्त आपदा प्रबंधन प्रणाली और सतत विकास की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे। तभी पहाड़ों की यह त्रासदी भविष्य में कम की जा सकेगी।