January 13, 2026

सहस्रधारा में स्थिति अब भी चिंताजनक: 60 परिवारों के लिए खतरे की घंटी

उत्तराखंड के देहरादून जिले के सहस्रधारा क्षेत्र में हाल ही में आई प्राकृतिक आपदा ने स्थानीय निवासियों और प्रशासन दोनों के लिए गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। 15 सितंबर 2025 की रात को हुई मूसलधार बारिश और बादल फटने की घटना ने इस क्षेत्र में भू-खिसाव और मलबे का गंभीर संकट उत्पन्न कर दिया। इस घटना के परिणामस्वरूप लगभग 60 परिवारों के घरों पर ढहने का खतरा मंडरा रहा है और स्थानीय लोगों की जिंदगी अस्थिर हो गई है। आपदा का कारण और प्रभाव विशेषज्ञों के अनुसार सहस्रधारा में हुई यह आपदा कई कारणों का परिणाम है। सबसे प्रमुख कारण भारी बारिश और बादल फटना है। रात के समय अचानक आई बारिश ने नदी और धाराओं में जलस्तर को अत्यधिक बढ़ा दिया। इसके साथ ही, पहाड़ी क्षेत्रों में अपर्याप्त जलनिकासी और अव्यवस्थित निर्माण कार्य ने स्थिति को और जटिल बना दिया। भूस्खलन और मलबे के कारण कई घरों और दुकानों को गंभीर नुकसान हुआ। कालिगाड़ क्षेत्र में आठ दुकानों और कई होटलों को मलबे की चपेट में आने से पूरी तरह नुकसान पहुँचा। स्थानीय लोगों के अनुसार कई परिवारों के घरों के मलबे में दबने का खतरा अभी भी बना हुआ है। इसके साथ ही कुछ घरों में मवेशी और घरेलू पशु भी दब गए हैं। स्थानीय प्रशासन और एसडीआरएफ की टीमों ने त्वरित बचाव कार्य शुरू किया। प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया और अस्थायी शिविरों में ठहराया गया। प्राथमिक सहायता के रूप में उन्हें खाद्य सामग्री, दवाइयाँ और आवश्यक वस्तुएँ उपलब्ध कराई गईं। प्रभावित परिवारों की स्थिति सहस्रधारा क्षेत्र में करीब 50–60 परिवार प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हुए हैं। इनमें अधिकांश परिवार ऐसे हैं जिनके घर सीधे मलबे और जलप्रवाह के रास्ते में आते हैं। कई परिवारों ने अपने घर खाली कर दिए हैं और अस्थायी आवासों में रहने को मजबूर हैं। स्थानीय ग्राम प्रधान राकेश जोवाड़ी के अनुसार प्रभावित परिवारों को ₹4,000 प्रति माह की आर्थिक सहायता दी जा रही है। इसके अलावा, प्रशासन ने राहत सामग्री के वितरण के लिए विशेष टीमें तैनात की हैं। हालांकि, प्रभावित लोगों का कहना है कि स्थायी पुनर्वास कार्य धीमी गति से हो रहा है और उन्हें भविष्य के लिए सुरक्षा की आवश्यकता है। प्रशासन की प्रतिक्रिया उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर राहत कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि राहत सामग्री की आपूर्ति में किसी प्रकार की कमी न हो और पुनर्निर्माण कार्यों को शीघ्रता से पूरा किया जाए। जिलाधिकारी सविन बंसल ने प्रभावित परिवारों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की और स्वास्थ्य शिविरों की स्थापना की। इसके अलावा, उन्होंने जलाशयों और नदी किनारे बसे गाँवों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने की योजना तैयार करने का निर्देश दिया। एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की टीम लगातार प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि मलबा हटाने, जल निकासी सुनिश्चित करने और प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम प्राथमिकता से चल रहा है। स्थानीय लोगों की प्रतिक्रियाएँ स्थानीय निवासी अपने घर और जीविकोपार्जन के नुकसान से व्यथित हैं। कई लोगों ने बताया कि बारिश और भू-खिसाव के चलते उनका जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। कुछ परिवारों ने अस्थायी आवासों में रहते हुए कहा कि प्रशासन की मदद के बावजूद भविष्य की अनिश्चितता चिंता का कारण बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन द्वारा उठाए गए कदम सही दिशा में हैं, लेकिन जलवायु परिवर्तन और अव्यवस्थित निर्माण कार्यों को देखते हुए भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति की संभावना बनी हुई है। भविष्य की चुनौतियाँ और समाधान उत्तराखंड जैसे पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन और बाढ़ जैसी घटनाएँ सामान्य हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इनकी आवृत्ति और तीव्रता में हाल के वर्षों में वृद्धि हुई है। जलवायु परिवर्तन, अतिक्रमण, अवैध निर्माण और जंगलों की कटाई इन घटनाओं के प्रमुख कारण हैं। विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि संवेदनशील क्षेत्रों में निर्माण कार्य पर सख्त प्रतिबंध लगाए जाएँ, जल निकासी और ढलान नियंत्रण की व्यवस्था को मजबूत किया जाए और स्थानीय समुदायों को आपदा प्रबंधन और सतर्कता के प्रति जागरूक किया जाए। साथ ही, प्रभावित परिवारों के लिए स्थायी पुनर्वास योजनाओं की आवश्यकता है। उन्हें आर्थिक सहायता, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा के उचित साधन उपलब्ध कराने से ही वे अपने जीवन को पुनः सामान्य कर सकते हैं। सरकार को चाहिए कि वह मलबा प्रबंधन, नदी के किनारों की निगरानी और संभावित आपदाओं के पूर्वानुमान पर विशेष ध्यान दे। इससे आने वाले समय में भूस्खलन और बाढ़ से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। निष्कर्ष सहस्रधारा क्षेत्र में आई आपदा ने प्रशासन और स्थानीय निवासियों दोनों के लिए गंभीर चुनौती खड़ी की है। राहत और पुनर्वास कार्य जारी हैं, लेकिन स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। भविष्य में ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि स्थानीय समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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देहरादून, 20 सितंबर 2025। दैनिक प्रभातवाणी 

उत्तराखंड के देहरादून जिले के सहस्रधारा क्षेत्र में हाल ही में आई प्राकृतिक आपदा ने स्थानीय निवासियों और प्रशासन दोनों के लिए गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। 15 सितंबर 2025 की रात को हुई मूसलधार बारिश और बादल फटने की घटना ने इस क्षेत्र में भू-खिसाव और मलबे का गंभीर संकट उत्पन्न कर दिया। इस घटना के परिणामस्वरूप लगभग 60 परिवारों के घरों पर ढहने का खतरा मंडरा रहा है और स्थानीय लोगों की जिंदगी अस्थिर हो गई है।

आपदा का कारण और प्रभाव

विशेषज्ञों के अनुसार सहस्रधारा में हुई यह आपदा कई कारणों का परिणाम है। सबसे प्रमुख कारण भारी बारिश और बादल फटना है। रात के समय अचानक आई बारिश ने नदी और धाराओं में जलस्तर को अत्यधिक बढ़ा दिया। इसके साथ ही, पहाड़ी क्षेत्रों में अपर्याप्त जलनिकासी और अव्यवस्थित निर्माण कार्य ने स्थिति को और जटिल बना दिया।

भूस्खलन और मलबे के कारण कई घरों और दुकानों को गंभीर नुकसान हुआ। कालिगाड़ क्षेत्र में आठ दुकानों और कई होटलों को मलबे की चपेट में आने से पूरी तरह नुकसान पहुँचा। स्थानीय लोगों के अनुसार कई परिवारों के घरों के मलबे में दबने का खतरा अभी भी बना हुआ है। इसके साथ ही कुछ घरों में मवेशी और घरेलू पशु भी दब गए हैं।

स्थानीय प्रशासन और एसडीआरएफ की टीमों ने त्वरित बचाव कार्य शुरू किया। प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया और अस्थायी शिविरों में ठहराया गया। प्राथमिक सहायता के रूप में उन्हें खाद्य सामग्री, दवाइयाँ और आवश्यक वस्तुएँ उपलब्ध कराई गईं।

प्रभावित परिवारों की स्थिति

सहस्रधारा क्षेत्र में करीब 50–60 परिवार प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हुए हैं। इनमें अधिकांश परिवार ऐसे हैं जिनके घर सीधे मलबे और जलप्रवाह के रास्ते में आते हैं। कई परिवारों ने अपने घर खाली कर दिए हैं और अस्थायी आवासों में रहने को मजबूर हैं।

स्थानीय ग्राम प्रधान राकेश जोवाड़ी के अनुसार प्रभावित परिवारों को ₹4,000 प्रति माह की आर्थिक सहायता दी जा रही है। इसके अलावा, प्रशासन ने राहत सामग्री के वितरण के लिए विशेष टीमें तैनात की हैं। हालांकि, प्रभावित लोगों का कहना है कि स्थायी पुनर्वास कार्य धीमी गति से हो रहा है और उन्हें भविष्य के लिए सुरक्षा की आवश्यकता है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर राहत कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि राहत सामग्री की आपूर्ति में किसी प्रकार की कमी न हो और पुनर्निर्माण कार्यों को शीघ्रता से पूरा किया जाए।

जिलाधिकारी सविन बंसल ने प्रभावित परिवारों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की और स्वास्थ्य शिविरों की स्थापना की। इसके अलावा, उन्होंने जलाशयों और नदी किनारे बसे गाँवों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने की योजना तैयार करने का निर्देश दिया।

एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की टीम लगातार प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि मलबा हटाने, जल निकासी सुनिश्चित करने और प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम प्राथमिकता से चल रहा है।

स्थानीय लोगों की प्रतिक्रियाएँ

स्थानीय निवासी अपने घर और जीविकोपार्जन के नुकसान से व्यथित हैं। कई लोगों ने बताया कि बारिश और भू-खिसाव के चलते उनका जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। कुछ परिवारों ने अस्थायी आवासों में रहते हुए कहा कि प्रशासन की मदद के बावजूद भविष्य की अनिश्चितता चिंता का कारण बनी हुई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन द्वारा उठाए गए कदम सही दिशा में हैं, लेकिन जलवायु परिवर्तन और अव्यवस्थित निर्माण कार्यों को देखते हुए भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति की संभावना बनी हुई है।

भविष्य की चुनौतियाँ और समाधान

उत्तराखंड जैसे पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन और बाढ़ जैसी घटनाएँ सामान्य हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इनकी आवृत्ति और तीव्रता में हाल के वर्षों में वृद्धि हुई है। जलवायु परिवर्तन, अतिक्रमण, अवैध निर्माण और जंगलों की कटाई इन घटनाओं के प्रमुख कारण हैं।

विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि संवेदनशील क्षेत्रों में निर्माण कार्य पर सख्त प्रतिबंध लगाए जाएँ, जल निकासी और ढलान नियंत्रण की व्यवस्था को मजबूत किया जाए और स्थानीय समुदायों को आपदा प्रबंधन और सतर्कता के प्रति जागरूक किया जाए।

साथ ही, प्रभावित परिवारों के लिए स्थायी पुनर्वास योजनाओं की आवश्यकता है। उन्हें आर्थिक सहायता, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा के उचित साधन उपलब्ध कराने से ही वे अपने जीवन को पुनः सामान्य कर सकते हैं।

सरकार को चाहिए कि वह मलबा प्रबंधन, नदी के किनारों की निगरानी और संभावित आपदाओं के पूर्वानुमान पर विशेष ध्यान दे। इससे आने वाले समय में भूस्खलन और बाढ़ से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

दैनिक प्रभातवाणी

सहस्रधारा क्षेत्र में आई आपदा ने प्रशासन और स्थानीय निवासियों दोनों के लिए गंभीर चुनौती खड़ी की है। राहत और पुनर्वास कार्य जारी हैं, लेकिन स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। भविष्य में ऐसी घटनाओं से निपटने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि स्थानीय समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।