UKSSSC पेपर लीक: मास्टरमाइंड खालिद गिरफ्तार, बहनें भी SIT हिरासत में

UKSSSC पेपर लीक: मास्टरमाइंड खालिद गिरफ्तार, बहनें भी SIT हिरासत में
देहरादून, 24 सितंबर 2052, दैनिक प्रभातवाणी
उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा में पेपर लीक कांड ने राज्य के प्रशासनिक तंत्र और युवा वर्ग को झकझोर दिया है। लंबे समय से फरार खालिद मलिक, जिसे इस मामले का मास्टरमाइंड माना जा रहा था, को सोमवार देर रात देहरादून के नेहरू कॉलोनी थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने खालिद की दो बहनें, हिना और साबिया, को भी SIT हिरासत में लिया है।
SIT और पुलिस सूत्रों के अनुसार, खालिद ने परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र हासिल कर कई अभ्यर्थियों को उपलब्ध कराया और इसके बदले मोटी रकम वसूली। जांच में यह खुलासा हुआ कि यह नेटवर्क केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं था, बल्कि दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा तक फैला हुआ था। खालिद की गिरफ्तारी ने पूरे मामले की गहराई को उजागर करने का रास्ता साफ किया है।
पेपर लीक की शुरुआत
यह मामला 8 जनवरी 2022 को आयोजित UKSSSC स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा से जुड़ा है। यह परीक्षा राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों में ग्रुप-सी पदों के लिए आयोजित की गई थी। लगभग 1.46 लाख अभ्यर्थियों ने इसमें भाग लिया।
परीक्षा के कुछ ही दिनों बाद अभ्यर्थियों ने सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर शिकायतें दर्ज कराईं कि कुछ उम्मीदवारों ने असामान्य रूप से उच्च अंक प्राप्त किए हैं। संदेह बढ़ने पर आयोग ने आंतरिक जांच शुरू की, लेकिन जांच के दौरान पेपर लीक का पूरा नेटवर्क सामने आया।
जांच में यह पता चला कि प्रश्नपत्र छपाई प्रेस से निकलते ही लीक कर दिया गया था। कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया और इसके बदले प्रति उम्मीदवार लाखों रुपये वसूले गए। SIT की प्रारंभिक जांच में यह नेटवर्क उत्तराखंड के अलावा उत्तर प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा तक फैला पाया गया।
गिरफ्तारी और आरोपी विवरण
पुलिस ने इस मामले में पाँच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। इनमें शामिल हैं:
खालिद मलिक – मास्टरमाइंड, मुख्य आरोपी
हिना – खालिद की बहन
साबिया – खालिद की दूसरी बहन
सुमन – टिहरी में असिस्टेंट प्रोफेसर, प्रश्नपत्र की तस्वीरें साझा करने में शामिल
बॉबी पवार – उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा के अध्यक्ष, जांच के दायरे में
गिरफ्तारी के समय खालिद देहरादून के पटेलनगर इलाके में छिपा हुआ था। पुलिस ने उसके पास से कई मोबाइल फोन, लैपटॉप, नकद और संदिग्ध दस्तावेज बरामद किए, जिनसे पेपर लीक से जुड़े कई अहम सबूत मिलने की संभावना है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, खालिद लंबे समय से उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इसी तरह के कांडों को अंजाम दे चुका है। इससे पहले भी उसने कई प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की साजिश रची थी। इस बार उसने UKSSSC की परीक्षा को निशाना बनाया और हजारों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया।
तकनीकी खामियां और पेपर लीक की प्रक्रिया
परीक्षा केंद्रों में मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर सख्त प्रतिबंध था। 445 परीक्षा केंद्रों पर 4G नेटवर्क को रोकने के लिए जैमर लगाए गए थे। इसके बावजूद पेपर की तस्वीरें व्हाट्सएप के माध्यम से बाहर भेजी गईं। विशेषज्ञों का कहना है कि जैमर 5G नेटवर्क को नहीं रोक सकते, यही कारण है कि पेपर लीक संभव हो पाया।
पुलिस के अनुसार, खालिद ने परीक्षा के दिन अपना मोबाइल घर पर छोड़ दिया था, लेकिन उसकी लोकेशन सुल्तानपुर टावर पर पाई गई। उसने चार अलग-अलग पहचान पत्रों के साथ परीक्षा के लिए आवेदन किया, जिसमें पिता का नाम, मोबाइल नंबर और फोटो अलग-अलग थे।
पुलिस की पूछताछ में यह भी पता चला कि खालिद ने पेपर लीक के लिए आयोग और प्रिंटिंग प्रेस के कर्मचारियों से संपर्क साधा और करोड़ों रुपये के लेन-देन के बाद यह पेपर राज्य के विभिन्न जिलों में अभ्यर्थियों तक पहुंचाया गया।
खालिद का बैकग्राउंड
खालिद मलिक सुल्तानपुर का रहने वाला है और एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखता है। उसकी पांच बहनों में से केवल एक ने स्नातक की पढ़ाई की है। तीन साल पहले वह देहरादून में जूनियर इंजीनियर (JE) के पद पर संविदा पर कार्यरत था, लेकिन बाद में उसे हटा दिया गया। इसके बाद उसने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू की, लेकिन धीरे-धीरे वह पेपर लीक नेटवर्क का मास्टरमाइंड बन गया।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि खालिद के घर पर अवैध बिजली आपूर्ति पाई गई, जिसके लिए उसके पिता के खिलाफ धारा 135 विद्युत अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
सरकार और पुलिस की प्रतिक्रिया
देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) डॉ. मणिकांत मिश्रा ने बताया कि खालिद को एक गुप्त सूचना के आधार पर पकड़ा गया। पुलिस टीम लंबे समय से उसकी गतिविधियों पर नजर रख रही थी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खालिद की गिरफ्तारी पर कहा कि राज्य सरकार किसी भी दोषी को बख्शेगी नहीं। उन्होंने आश्वासन दिया कि पेपर लीक नेटवर्क से जुड़े हर व्यक्ति पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार भविष्य में परीक्षा प्रणाली को डिजिटल और सुरक्षित बनाने पर काम कर रही है, ताकि ऐसी घटनाएँ पुनः न हों।
अभ्यर्थियों की नाराजगी और धरना प्रदर्शन
उत्तराखंड बेरोजगार संघ के बैनर तले सैकड़ों बेरोजगार परेड ग्राउंड के बाहर धरना दे रहे हैं। उनका कहना है कि महीनों की मेहनत और तैयारी के बाद परीक्षा देने वाले हजारों युवाओं का भविष्य दांव पर लगा।
अभ्यर्थियों का कहना है कि केवल परीक्षा दोबारा कराने से समस्या का समाधान नहीं होगा। जब तक दोषियों को कड़ी सजा नहीं दी जाती और परीक्षा प्रणाली में सुधार नहीं होता, तब तक युवा निराशा और गुस्से के बीच रहेंगे।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ पेपर लीक का मामला नहीं है, बल्कि पूरे भर्ती तंत्र की गहरी खामियों को उजागर करता है। वर्षों से राज्य में सरकारी नौकरियों की परीक्षाओं में धांधली की शिकायतें आती रही हैं। खालिद जैसे संगठित अपराधियों का नेटवर्क तोड़ना आसान नहीं है।
विशेषज्ञों के अनुसार, आयोग के भीतर सख्त नियम, डिजिटल पेपर वितरण प्रणाली और परीक्षा के दौरान तकनीकी निगरानी बढ़ाने के उपाय किए जाने चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसा कांड न हो।
आगे की कार्रवाई
SIT की जांच अभी जारी है। खालिद की गिरफ्तारी के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि इस गिरोह से जुड़े अन्य बड़े नाम सामने आएंगे। पुलिस और SIT की लगातार कार्रवाई ने यह संदेश दिया है कि राज्य में किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
SIT ने संकेत दिया है कि पेपर लीक में शामिल अन्य प्रोफेसरों और बिचौलियों की पहचान की जा रही है। जांच में पेपर लीक के हर लेन-देन और संदेश को डिजिटल ट्रेस किया जा रहा है। इससे यह स्पष्ट होगा कि इस गिरोह की संरचना कितनी जटिल और व्यापक थी।
दैनिक प्रभातवाणी
दैनिक प्रभातवाणी की इस रिपोर्ट का उद्देश्य केवल तथ्यों को सामने लाना है। खालिद की गिरफ्तारी इस जटिल मामले का अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। आने वाले दिनों में SIT की आगे की जांच से और भी चौंकाने वाले खुलासे होने की संभावना है।
उत्तराखंड के हजारों बेरोजगार युवाओं का भविष्य सुरक्षित रखना और सरकारी भर्तियों की पारदर्शिता सुनिश्चित करना अब राज्य प्रशासन की प्राथमिकता बन गई है। खालिद का गिरोह चाहे कितना भी संगठित क्यों न हो, पुलिस और SIT की लगातार कार्रवाई ने यह संदेश दे दिया है कि किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।