उत्तराखंड कैबिनेट ने मंजूरी दी “अरोमा क्रांति” नीति 2026-2036, differently-abled जोड़ों के विवाह अनुदान में वृद्धि

उत्तराखंड कैबिनेट ने मंजूरी दी “अरोमा क्रांति” नीति 2026-2036, differently-abled जोड़ों के विवाह अनुदान में वृद्धि
देहरादून, 24 सितंबर 2025:
उत्तराखंड सरकार ने राज्य में कृषि और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण और प्रगतिशील निर्णय लिया है। राज्य कैबिनेट ने “अरोमा क्रांति” नीति 2026-2036 को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य सुगंधित और औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देना और राज्य में इस क्षेत्र में एक व्यवस्थित और सतत विकास ढांचा तैयार करना है। इसी के साथ, राज्य सरकार ने differently-abled जोड़ों के विवाह अनुदान को ₹25,000 से बढ़ाकर ₹50,000 करने की घोषणा की है। यह कदम न केवल सामाजिक न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि राज्य में समान अवसर सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।
“अरोमा क्रांति” नीति: उद्देश्य और महत्व
उत्तराखंड राज्य, अपनी विविध भौगोलिक और जलवायु विशेषताओं के कारण, सुगंधित और औषधीय पौधों की खेती के लिए अत्यंत अनुकूल है। “अरोमा क्रांति” नीति के माध्यम से राज्य सरकार का लक्ष्य न केवल किसानों की आमदनी बढ़ाना है, बल्कि इस क्षेत्र में व्यवस्थित उत्पादन, प्रशिक्षण, विपणन और निर्यात नेटवर्क तैयार करना भी है।
नीति के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
सुगंधित और औषधीय पौधों की खेती को प्रोत्साहन:
नीति के तहत किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज, पौधे और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। किसानों को जैविक उर्वरक, कीट नियंत्रण और जल प्रबंधन में आधुनिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा।प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता केंद्र:
राज्य सरकार योजना के तहत अलग-अलग जिलों में प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करेगी, जहां किसानों को औषधीय पौधों की खेती, कटाई और प्रसंस्करण के तरीकों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।क्लस्टर और विपणन नेटवर्क:
राज्य के प्रमुख जिलों में औषधीय और सुगंधित पौधों के लिए क्लस्टर विकसित किए जाएंगे, जिससे उत्पादन, प्रोसेसिंग और विपणन को सुव्यवस्थित किया जा सके। इसके साथ ही किसानों को सीधे बाजार और निर्यात नेटवर्क से जोड़ा जाएगा, ताकि उनकी आय में वास्तविक वृद्धि हो।आर्थिक और रोजगार संभावनाएं:
नीति से छोटे और सीमांत किसानों के लिए नई आय के स्रोत खुलेंगे। इसके अलावा, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, विशेषकर पौधों की प्रोसेसिंग और पैकेजिंग उद्योग में।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड की मिट्टी और जलवायु, खासकर पहाड़ी क्षेत्रों में, औषधीय और सुगंधित पौधों के लिए सबसे उपयुक्त है। नीति के तहत अगर किसानों को उचित प्रशिक्षण और मार्केटिंग सपोर्ट मिलेगा, तो राज्य में इस क्षेत्र की आय में 40-50 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है।
Differently-abled जोड़ों के लिए विवाह अनुदान में वृद्धि
राज्य सरकार ने सामाजिक न्याय और समावेशन की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब differently-abled जोड़ों के विवाह के लिए मिलने वाला अनुदान ₹25,000 से बढ़ाकर ₹50,000 कर दिया गया है।
इस कदम का उद्देश्य है कि differently-abled व्यक्तियों को विवाह और सामाजिक जीवन में आर्थिक बाधाओं का सामना न करना पड़े। सामाजिक न्याय विभाग के अधिकारी बताते हैं कि इस वृद्धि से अधिक लोग विवाह योग्य होंगे और परिवारिक समर्थन के साथ आत्मनिर्भर बन सकेंगे।
राज्य सरकार का यह निर्णय यह भी दर्शाता है कि वह समान अवसर और सामाजिक समावेशन के लिए प्रतिबद्ध है। यह अनुदान सिर्फ आर्थिक सहायता नहीं है, बल्कि समाज में differently-abled व्यक्तियों के सम्मान और उनके अधिकारों के सशक्तिकरण का प्रतीक भी है।
राज्य सरकार और कैबिनेट की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस निर्णय पर कहा, “हमारी सरकार का उद्देश्य है कि राज्य के किसानों और differently-abled समाज दोनों के लिए समान अवसर सुनिश्चित किए जाएँ। अरोमा क्रांति नीति से राज्य में खेती को नई दिशा मिलेगी, जबकि विवाह अनुदान में वृद्धि सामाजिक समावेशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हम सभी वर्गों के लिए प्रगतिशील और लाभकारी योजनाएं लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
कृषि मंत्री ने बताया कि अरोमा क्रांति नीति के तहत किसानों को बीज, प्रशिक्षण और विपणन सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इसका उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और राज्य में औषधीय पौधों के निर्यात को प्रोत्साहित करना है।
विशेषज्ञों की राय और विश्लेषण
कृषि और सामाजिक विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य की यह पहल सकारात्मक और दूरगामी प्रभाव रखती है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सुगंधित और औषधीय पौधों की खेती से न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि राज्य में कृषि उद्योग और निर्यात के नए अवसर भी पैदा होंगे।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि differently-abled जोड़ों के विवाह अनुदान में वृद्धि से समाज में समान अवसर और समावेशन सुनिश्चित होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, नीति के प्रभाव से उत्तराखंड में सतत कृषि और सामाजिक न्याय दोनों को बल मिलेगा।
जिलेवार संभावित प्रभाव
अरोमा क्रांति नीति का लाभ राज्य के प्रत्येक जिले में दिखाई देगा, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहां कृषि परंपरागत रूप से जीविका का मुख्य स्रोत है।
उत्तराखंड पहाड़ी जिले (जैसे चमोली, रुद्रप्रयाग, ऊधमसिंह नगर): सुगंधित और औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा मिलेगा। स्थानीय किसानों को प्रशिक्षण और बीज उपलब्ध कराए जाएंगे।
हल्द्वानी, देहरादून और रुद्रपुर जैसे व्यापारिक केंद्रों में मार्केटिंग नेटवर्क और क्लस्टर तैयार होंगे।
जिला टिहरी और पौड़ी गढ़वाल: प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से किसानों को नई तकनीक और प्रोसेसिंग में सहायता मिलेगी।
दूसरे क्षेत्रों में, differently-abled जोड़ों को विवाह अनुदान के जरिए आर्थिक और सामाजिक समर्थन मिलेगा, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार होगा।
इन उपायों से राज्य के ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों में आर्थिक, सामाजिक और कृषि क्षेत्र में व्यापक सुधार की उम्मीद है।
किसानों और लाभार्थियों की प्रतिक्रिया
किसानों और differently-abled लाभार्थियों ने सरकार के इस निर्णय का स्वागत किया है।
उत्तरकाशी जिले के एक किसान ने कहा, “अरोमा क्रांति नीति से हमें नई खेती और आमदनी के अवसर मिलेंगे। अब हम सुगंधित पौधों की खेती कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधार सकते हैं।”
रुद्रप्रयाग की differently-abled लाभार्थी ने कहा, “विवाह अनुदान राशि बढ़ने से हमारी शादी के खर्चों का बोझ कम होगा। सरकार की यह पहल हमें समाज में समान अवसर देती है।”
इन प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट होता है कि नीति का लाभ सीधे जनता तक पहुंचेगा और राज्य में आर्थिक व सामाजिक समावेशन को बढ़ावा मिलेगा।
भविष्य की दिशा
“अरोमा क्रांति” नीति के तहत आने वाले वर्षों में प्रशिक्षण केंद्र, अनुसंधान केंद्र और क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। इससे किसानों को नई तकनीक और औषधीय पौधों के विविध उपयोग के बारे में जानकारी मिलेगी।
साथ ही, विवाह अनुदान में वृद्धि से differently-abled जोड़ों के जीवन स्तर में सुधार और आत्मनिर्भरता बढ़ाने में मदद मिलेगी। यह नीति आर्थिक बाधाओं को कम करेगी और अधिक लोगों को विवाह योग्य बनाएगी।
दैनिक प्रभातवाणी
उत्तराखंड सरकार की यह पहल किसानों और differently-abled समाज दोनों के लिए नई उम्मीद और दिशा लेकर आई है। अरोमा क्रांति नीति से किसानों की आय बढ़ेगी, राज्य में औषधीय और सुगंधित पौधों की खेती का विस्तार होगा, और विवाह अनुदान में वृद्धि से differently-abled जोड़ों का सामाजिक सशक्तिकरण सुनिश्चित होगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और उनके कैबिनेट की यह पहल राज्य की कृषि और सामाजिक न्याय नीति के लिए मील का पत्थर साबित होगी। आने वाले वर्षों में इस नीति के सकारात्मक परिणामों से उत्तराखंड का आर्थिक और सामाजिक विकास नई ऊँचाइयों तक पहुंचेगा।