January 15, 2026

UKSSSC पेपर लीक : बहुचर्चित घोटाले की पूरी पड़ताल

UKSSSC पेपर लीक : बहुचर्चित घोटाले की पूरी पड़ताल
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देहरादून, 25 सितंबर 2025 /दैनिक प्रभातवाणी 

उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की भर्ती परीक्षा पेपर लीक कांड ने राज्य के प्रशासनिक, सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य को हिला कर रख दिया है। इस मामले ने न सिर्फ हजारों बेरोजगार युवाओं की उम्मीदों पर ग्रहण लगाया है, बल्कि राज्य सरकार की भर्ती प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। इस विस्तृत रिपोर्ट में हम इस घोटाले की पृष्ठभूमि, घटनाक्रम, जांच की दिशा, सरकार की प्रतिक्रिया, विरोध आंदोलन और भविष्य की चुनौतियों का विश्लेषण करेंगे।


1. पृष्ठभूमि और संदिग्ध सुराग

1.1 चयन प्रक्रिया पर विवाद

उत्तराखंड में सरकारी नौकरियों की मांग सदैव ऊँची रही है। UKSSSC जैसे आयोगों द्वारा आयोजित परीक्षाएं लाखों अभ्यर्थियों के लिए भविष्य की दिशा तय करती हैं। लेकिन इन परीक्षाओं के संचालन में अनेक आरोप—सूत्रपात, प्रश्नपत्र वितरण में अनियमितता, गड़बड़ी—समय-समय पर उठते रहे हैं।
यह मामला भी उसी संदर्भ में शुरू हुआ, जब कई अभ्यर्थियों ने परीक्षा के समय और परिणाम जारी होने के बाद हस्तक्षेप और चौंकाने वाली सफलताएं दर्ज कीं।

1.2 प्रथम शिकायत और मीडिया सोशल मीडिया फुटेज

जब पहली बार सोशल मीडिया पर यह दावा सामने आया कि परीक्षा के प्रश्न पहले ही व्हाट्सएप पर प्रसारित हो चुके थे, तो मामला सुर्खियों में आया। कुछ अभ्यर्थियों ने स्क्रीनशॉट और ऑडियो क्लिप साझा की, जिसमें यह कहा गया कि प्रश्न पहले से ही ज्ञात थे। मीडिया रिपोर्ट्स ने इन दावों को तवज्जो दी और सरकार पर दबाव बढ़ाया गया।

1.3 राज्य सरकारें सतर्क हुईं, SIT का गठन

इन शिकायतों और मीडिया कवरेज के बाद राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को समझा और विशेष जांच दल (SIT) का गठन करने का निर्णय लिया। सरकार ने स्पष्ट किया कि यह जांच पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष होगी। SIT को छात्रों, परीक्षा अधिकारी, माध्यमिक स्तर के शिक्षा विभाग और पुलिस विभाग से जुड़े संभावित बिंदुओं की पड़ताल करनी है।


2. घटना-क्रम और कार्रवाई

2.1 प्रारंभिक निलंबन और जांच की दिशा

जांच शुरू होते ही राज्य सरकार ने ठोस कार्रवाई की दिशा में कदम बढ़ाया। एक सहायक प्रोफ़ेसर और दो पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित किया गया। उन पर आरोप है कि उन्होंने परीक्षा केंद्रों पर अनियमितता को नजरअंदाज किया या उसमें सहयोग किया। इसके अलावा, हरिद्वार की DRDA परियोजना निदेशक एन. तिवारी को भी “अनियमितता एवं लापरवाही” के आरोप में निलंबित किया गया है।

2.2 आयोग के दायित्व और आंतरिक छानबीन

UKSSSC ने स्वयं एक आंतरिक टीम बनाई है, जो पेपर वितरण, परीक्षा केंद्रों की निगरानी, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, निगरानी कैमरा फुटेज और अभ्यर्थी शिकायतों को खंगालेगी। आयोग ने यह भी कहा है कि यदि त्रुटि पाएगी तो सुधारात्मक आदेश जारी किए जाएंगे।

2.3 SIT की प्रारंभिक पूछताछ

SIT ने अब तक निम्नलिखित कदम उठाए हैं:

  • कई परीक्षा केंद्रों में सुराग जुटाने के लिए टीम भेजी गई।

  • केंद्रीय प्राविधिक विश्लेषण (forensic) टीम से संदिग्ध मोबाइल और कंप्यूटर डेटा की जांच कराई जा रही है।

  • अभ्यर्थियों, केंद्र पर्यवेक्षकों और आयोग कर्मियों से पूछताछ की जा रही है।

  • सोशल मीडिया, व्हाट्सएप चैट और टेक्स्ट मेसेजिंग स्रोतों के रिकॉर्ड को तलाशा जा रहा है।

घोषणा की गई है कि SIT जांच समाप्त होने पर पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी, ताकि दोषियों पर कार्रवाई हो सके और भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकी जा सकें।


3. राजनीतिक आणि सामाजिक दुष्परिणाम

3.1 मुख्यमंत्री का बयान: “नकल जिहाद”

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मामले को “नकल जिहाद” कहकर विशेष शब्दों में उल्लेख किया है, और कहा कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। उनके इस बयान ने राजनीतिक हलचल की हवा में आग लगा दी। सरकार इसे भर्ती प्रक्रिया की शुद्धता पर हमला मानती है, जबकि विरोधी दल इसे मुस्लिम विरोधी और सांप्रदायिक रंग देने का प्रयास बताने लगे।

3.2 विपक्षी दलों का मोर्चा

राजनीतिक दलों ने इस मुद्दे को मुद्दा चुनावीय सरगर्मी का तीर बना लिया है। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि केंद्र व राज्य सरकारों के बीच मिली भगत हो सकती है, तथा यह मामला केवल भर्ती भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं है। उन्होंने मांग की है कि केंद्र सरकार जांच में हस्तक्षेप न करे और SIT पूरी तरह निष्पक्ष हो।

3.3 बेरोजगार युवाओं का आक्रोश और आंदोलन

इस मामले ने राज्य के युवाओं को क्रोधित कर दिया है। अल्मोड़ा, पौड़ी, हरिद्वार, नैनीताल और देहरादून सहित कई जिलों में अभ्यर्थियों ने सरकार और आयोग के खिलाफ धरने लगाए हैं। वे निम्नलिखित मांगें कर रहे हैं:

  • दोषियों पर तत्काल, कठोर, पारदर्शी कार्रवाई

  • नई परीक्षा प्रक्रिया और प्रश्नपत्रों की सुरक्षा व्यवस्था

  • यदि गड़बड़ी सिद्ध हो, तो पुनः परीक्षा की व्यवस्था

  • भर्ती प्रक्रिया में नागरिक निगरानी (Citizen Oversight)

युवा संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि 15 दिन के भीतर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो राज्यव्यापी बंद हर जिले में लड़ाई छेड़ी जाएगी।


4. तकनीकी चुनौतियाँ और जटिलताएँ

4.1 डिजिटल सुरागों की जटिलता

इस प्रकार के पेपर लीक मामलों में सबसे बड़ी चुनौती होती है डिजिटल साक्ष्यों की सत्यता और प्रमाणिकता। व्हाट्सएप चैट, मैसेजिंग एप्स, फ़ाइल एक्सचेंजिंग प्लेटफार्म—इनमें से सैकड़ों मीटर डेटा का विश्लेषण करना आसान नहीं है।
इसके अलावा, डेटा फ़ॉरेंसिक जालसाजी (data tampering) का जोखिम हमेशा बना रहता है। यदि तकनीकी जांच टीम ने सुरक्षा में चूक की, तो दोषी छूट सकते हैं।

4.2 संयोजन और समन्वय की समस्या

SIT जांच को सफल करने के लिए कई विभागों—पुलिस, शिक्षा विभाग, आईटी विभाग, आयोग—के बीच तालमेल आवश्यक है। कभी-कभी विभागीय प्रतिरोध, दायित्व विवाद और श्रम विभाजन अड़चन बन जाते हैं।

4.3 विधिक बाधाएँ और सबूत प्रस्तुत करना

दोष सिद्धि के लिए मुकदमेबाजी में उचित साक्ष्य प्रस्तुत करना होगा। अदालतों में अभियोजन पक्ष को यह साबित करना होगा कि लीक एक योजनाबद्ध षड्यंत्र था। केवल आरोप या संदेह से कार्रवाई संभव नहीं है।


5. बेहतर भविष्य के लिए संभावित सुधारयोजनाएँ

5.1 प्रश्नपत्र सुरक्षा प्रणाली का आधुनिकीकरण

  • प्रश्नपत्रों को डिजिटल स्वरूप में एन्क्रिप्टेड रूप से भेजा जाए।

  • परीक्षा केंद्रों पर ओटीपी आधारित अनलाकिंग (unlocking) व्यवस्था हो।

  • पेपर छपाई और बंद पैकेजिंग की निगरानी—सुरक्षा बंद बॉक्स, सीलिंग, सीरियल नंबर आदि।

  • परीक्षा केंद्रों पर स्मार्ट कैमरे और लाइव मॉनिटरिंग (live feed) अनिवार्य हो।

5.2 अभ्यर्थी और नागरिक निगरानी

  • परीक्षा केंद्रों पर नागरिक पर्यवेक्षक नियुक्त करें।

  • अभ्यर्थियों को शिकायत पटल और हेल्पलाइन दें।

  • परीक्षा परिणामों, अंकांकलन और साक्षात्कार प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी बनाएं।

5.3 कठोर दंड और कानूनी व्यवस्था

  • पेपर लीक करने वालों को जेल व जुर्माना दोनों विकल्प हों।

  • निर्णायक समयसीमाओं में सुनवाई हो।

  • पुनरावृत्ति रोकने के लिए शिक्षा विभाग और आयोगों को जवाबदेह बनायें।

5.4 तकनीकी व विधिक क्षमताओं का सुदृढ़ीकरण

  • राज्य सरकार को फॉरेंसिक लैबों की संख्या और क्षमताओं में वृद्धि करनी चाहिए।

  • अभियोजन पक्ष और जांच एजेंसियों को डिजिटल साक्ष्य कानून, साइबर अपराध कानून और विधिक प्रशिक्षण दिलाना चाहिए।

  • आदेश प्रभावी हों; मामले सुलझाने की समयसीमा सुनिश्चित हो।


6. निष्कर्ष एवं मूल संदेश

UKSSSC पेपर लीक मामला केवल एक भर्ती परीक्षा का विवाद नहीं है — यह उत्तराखंड की सरकारी प्रक्रिया, युवाओं की उम्मीद और समाज की निष्ठा को छूने वाला एक संवेदनशील मुद्दा बन गया है। SIT की निष्पक्षता, सरकार की कार्रवाई और न्यायालय की दृढ़ता यह तय करेगी कि इस कांड का अंजाम कहाँ तक न्यायोचित होगा।

बेरोजगारों, अभ्यर्थियों और राज्यवासी सभी की निगाहें अब निष्कर्षपरिपूर्ण जांच और संपूर्ण सुधार पर टिकी हैं। अगर दोषियों को समय पर और कठोर सजा मिलती है और भर्ती प्रणाली में ऐसी व्यवस्था की जाती है कि भविष्य में किसी को आशंका न हो — तभी यह मामला एक चेतावनी बन कर नहीं, बल्कि सुधार का आधार बन पाएगा।

आने वाले दिनों में, जब SIT अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, तब उत्तराखंड की भर्ती व्यवस्था और सरकारी इमेज दोनों के लिए एक नया मोड़ आएगा। लेकिन यह मोड़ सकारात्मक होगा तभी, जब निष्पक्षता, पारदर्शिता और सख्त न्याय सुनिश्चित हों।