केदारनाथ की ‘रूप छड़’ को लेकर उठा विवाद, सरकार ने दिए जांच के आदेश
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देहरादून  | दैनिक प्रभातवाणी

उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध तीर्थ स्थल Kedarnath Temple से जुड़ी एक महत्वपूर्ण धार्मिक वस्तु ‘रूप छड़’ को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। जानकारी के अनुसार बाबा केदारनाथ की अत्यधिक धार्मिक महत्व रखने वाली यह रूप छड़ फिलहाल Badrinath Kedarnath Temple Committee (बीकेटीसी) के पास मौजूद नहीं है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार ने जांच के आदेश दे दिए हैं।

बताया जा रहा है कि रूप छड़ के संबंध में सामने आई जानकारी के बाद धार्मिक और स्थानीय समुदाय में हलचल मच गई। हालांकि इस पूरे मामले पर फिलहाल मंदिर समिति ने कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया है और चुप्पी साध रखी है। दूसरी ओर केदारनाथ से जुड़े पंडा-पुरोहितों का कहना है कि यह केवल एक धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि बाबा केदारनाथ का स्वरूप माना जाता है। ऐसे में इसकी सुरक्षा में लापरवाही बेहद गंभीर मामला है।

देवभूमि Uttarakhand अपने चारधाम और प्राचीन देव परंपराओं के लिए पूरे देश में विशेष महत्व रखता है। यहां की पूजा पद्धति, धार्मिक मान्यताएं और परंपराएं सनातन धर्म में मार्गदर्शक मानी जाती हैं। इन्हीं परंपराओं में से एक है केदारनाथ धाम की चल विग्रह डोली के साथ चलने वाला धर्म दंड, जिसे स्थानीय भाषा में ‘रूप छड़’ कहा जाता है।

धार्मिक जानकारों के अनुसार इस धर्म दंड का दर्शन करना भी बाबा केदारनाथ के दर्शन के समान ही पुण्यदायी माना जाता है। इसलिए यह केवल एक वस्तु नहीं, बल्कि केदारनाथ धाम की आस्था और परंपरा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रतीक है।

पंडा-पुरोहितों का कहना है कि केदारनाथ और Badrinath Temple धाम से जुड़े सभी धार्मिक प्रतीक भगवान की निजी संपत्ति माने जाते हैं। इनका उपयोग केवल धार्मिक अनुष्ठानों और परंपरागत पूजा-पद्धति के दौरान ही किया जाता है। इन सभी वस्तुओं को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी बदरी-केदार मंदिर समिति की होती है।

इस बीच बीकेटीसी की ओर से जारी एक पत्र सामने आने के बाद मामले को लेकर कुछ हद तक स्थिति स्पष्ट होने की बात कही जा रही है। हालांकि सरकार ने पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं और संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि रूप छड़ को लेकर सामने आई स्थिति के पीछे वास्तविक कारण क्या है।