Spread the loveऋषिकेश/टिहरी। उत्तराखंड के प्रसिद्ध आध्यात्मिक नगर ऋषिकेश में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाले योग उत्सव की शुरुआत हो गई है। टिहरी जिले के मुनि की रेती क्षेत्र में शुरू हुए International Yoga Festival 2026 में देश और विदेश से बड़ी संख्या में योग साधक, आध्यात्मिक गुरु और पर्यटक पहुंचे हैं। गंगा तट पर आयोजित इस महोत्सव में विभिन्न योग परंपराओं, ध्यान विधियों और आध्यात्मिक सत्रों का आयोजन किया जा रहा है, जिससे ऋषिकेश एक बार फिर वैश्विक योग केंद्र के रूप में चर्चा में आ गया है।कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने कहा कि योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह जीवन को संतुलित और अनुशासित बनाने की एक संपूर्ण पद्धति है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जब युवा तेजी से बदलती जीवनशैली और तनाव का सामना कर रहे हैं, तब योग उनके लिए मानसिक और शारीरिक संतुलन बनाए रखने का सबसे प्रभावी साधन बन सकता है। मुख्यमंत्री ने युवाओं से अपील की कि वे योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं और स्वस्थ समाज के निर्माण में योगदान दें।मुनि की रेती और ऋषिकेश के विभिन्न आश्रमों और योग केंद्रों में आयोजित इस महोत्सव के दौरान योग, प्राणायाम, ध्यान, आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा से जुड़े कई विशेष सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। विदेशी प्रतिभागियों के लिए भारतीय संस्कृति, योग दर्शन और आध्यात्मिक परंपराओं से परिचित कराने के लिए भी विशेष कार्यक्रम रखे गए हैं। योग गुरुओं द्वारा अलग-अलग योग शैलियों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिसमें हठ योग, राज योग और ध्यान योग प्रमुख रूप से शामिल हैं।पर्यटन और आध्यात्मिक दृष्टि से भी इस महोत्सव का विशेष महत्व माना जा रहा है। हर साल बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक इस आयोजन में भाग लेने के लिए ऋषिकेश पहुंचते हैं, जिससे राज्य के पर्यटन उद्योग को भी बढ़ावा मिलता है। स्थानीय होटल, आश्रम और पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों के अनुसार इस बार भी बड़ी संख्या में विदेशी साधकों के आने से शहर में उत्साह का माहौल है।आयोजकों के अनुसार यह योग महोत्सव 22 मार्च तक चलेगा और इस दौरान प्रतिदिन सुबह और शाम योग सत्र, सांस्कृतिक कार्यक्रम, आध्यात्मिक प्रवचन और भारतीय संस्कृति से जुड़े कई आयोजन किए जाएंगे। गंगा तट पर होने वाले सामूहिक योग अभ्यास को देखने के लिए भी बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजन भारत की योग परंपरा को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऋषिकेश पहले से ही विश्व में “योग की राजधानी” के रूप में प्रसिद्ध है और अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव जैसे कार्यक्रम इस पहचान को और मजबूत करते हैं। Post Views: 4 Post navigation121 वर्षों बाद एक मंच पर आए सरोला ब्राह्मण, परंपरा और पहचान को बचाने पर हुआ मंथन उत्तराखंड विधानसभा बजट सत्र समाप्त, बेरोजगारी और कर्ज को लेकर विपक्ष के तीखे सवाल