Spread the loveनैनीताल | 15 अप्रैल 2026 | दैनिक प्रभातवाणीनैनीताल हाईकोर्ट से हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय, श्रीनगर के कुलपति को बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने कुलपति की नियुक्ति को चुनौती देने वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि कुलपति की नियुक्ति विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और केंद्रीय विश्वविद्यालय के नियमों के अनुरूप की गई है।इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने की। सुनवाई के बाद अदालत ने कुलपति की नियुक्ति को वैध मानते हुए याचिका को निरस्त कर दिया। कोर्ट के इस फैसले के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन को बड़ी राहत मिली है।याचिकाकर्ता प्रोफेसर नवीन प्रकाश नौटियाल ने जनहित याचिका दायर कर कुलपति की नियुक्ति को चुनौती दी थी। याचिका में कहा गया था कि कुलपति की नियुक्ति केंद्रीय विश्वविद्यालय अधिनियम 2009 और यूजीसी विनियम 2018 के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए की गई है। साथ ही आरोप लगाया गया था कि नियुक्ति प्रक्रिया में निर्धारित पात्रता मानकों का पालन नहीं किया गया।याचिका में यह भी कहा गया था कि यूजीसी विनियम 2018 के अनुसार कुलपति पद के लिए विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के रूप में कम से कम 10 वर्ष का अनुभव आवश्यक है। याचिकाकर्ता ने यह भी तर्क दिया था कि संबंधित कुलपति का भारतीय लोक प्रशासन संस्थान में चेयर प्रोफेसर के रूप में अनुभव विश्वविद्यालय के प्रोफेसर के अनुभव के बराबर नहीं माना जा सकता।हालांकि, अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद पाया कि नियुक्ति प्रक्रिया निर्धारित नियमों और प्रावधानों के तहत की गई है। इसके बाद हाईकोर्ट ने जनहित याचिका को खारिज कर दिया और कुलपति की नियुक्ति को वैध करार दिया।हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन और संबंधित पक्षों ने राहत की सांस ली है। वहीं इस फैसले को उच्च शिक्षा संस्थानों में नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े मामलों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। Post Views: 3 Post navigationCBSE 10वीं में उत्तराखंड की हर्षा ने रचा इतिहास, 500 में 500 अंक हासिल बॉन्डधारी डॉक्टरों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, दुर्गम सेवा अवधि में मिलेगा पूर्व कार्यकाल का लाभ