चंपावत गैंगरेप मामले में बड़ा खुलासा: पुलिस जांच में निकली साजिश, तीनों नामजद आरोपी निर्दोष
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दैनिक प्रभातवाणी ब्यूरो | चंपावत

उत्तराखंड के चंपावत जिले में सामने आए नाबालिग गैंगरेप मामले ने अब पूरी तरह नया मोड़ ले लिया है। जिस घटना को लेकर पूरे प्रदेश में आक्रोश और राजनीतिक हलचल तेज हो गई थी, उसी मामले में पुलिस जांच के बाद चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। चंपावत पुलिस ने दावा किया है कि कथित गैंगरेप की घटना वास्तविक नहीं थी, बल्कि यह एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा थी। पुलिस के अनुसार इस पूरे घटनाक्रम का मास्टरमाइंड कमल रावत नाम का व्यक्ति निकला, जिसने बदले की भावना से यह साजिश रची।

मामले का खुलासा करते हुए चंपावत पुलिस अधीक्षक रेखा यादव ने बताया कि 6 मई 2026 को नाबालिग लड़की के पिता द्वारा कोतवाली चंपावत में शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उनकी 16 वर्षीय बेटी के साथ तीन लोगों ने सामूहिक दुष्कर्म किया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल पॉक्सो एक्ट समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया और विशेष जांच टीम यानी एसआईटी का गठन किया गया।

पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान वैज्ञानिक और तकनीकी दोनों स्तरों पर साक्ष्य जुटाए गए। घटनास्थल का निरीक्षण किया गया, सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड यानी सीडीआर की जांच की गई और फॉरेंसिक टीम की मदद ली गई। साथ ही पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया तथा न्यायालय में बयान भी दर्ज किए गए। जांच के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए जिन्होंने शिकायत की कहानी पर सवाल खड़े कर दिए।

एसपी रेखा यादव के अनुसार मेडिकल रिपोर्ट में न तो किसी प्रकार की बाहरी चोट मिली और न ही जबरदस्ती के स्पष्ट संकेत पाए गए। वहीं सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी जांच से यह पुष्टि हुई कि नाबालिग लड़की घटना वाले दिन अपनी इच्छा से अपनी महिला मित्र की शादी समारोह में शामिल होने गई थी और उसके साथ उसका एक पुरुष मित्र भी मौजूद था। पुलिस को जांच में यह भी पता चला कि शिकायत में जिन तीन लोगों को आरोपी बनाया गया था, उनकी घटनास्थल पर मौजूदगी के प्रमाण नहीं मिले।

जांच में आगे जो बातें सामने आईं, उन्होंने पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया। पुलिस के मुताबिक कमल रावत नामक व्यक्ति ने पहले से चली आ रही रंजिश और बदले की भावना के चलते इस साजिश को अंजाम दिया। बताया गया कि जिन लोगों को मामले में फंसाने की कोशिश की गई, वे पहले एक पुराने प्रकरण में कमल रावत के खिलाफ सक्रिय रहे थे। इसी कारण उसने बदला लेने की योजना बनाई।

पुलिस के अनुसार कमल रावत ने नाबालिग लड़की को उसके पिता के इलाज और आर्थिक सहायता का लालच दिया। इसके बाद लड़की और उसके कुछ परिचितों को योजना के तहत इस्तेमाल किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि शादी समारोह वाले दिन कथित वारदात को अंजाम देने की योजना बनाई गई थी, लेकिन परिस्थितियां बदलने के बाद दूसरी जगह का इस्तेमाल किया गया ताकि पूरे मामले को वास्तविक घटना की तरह प्रस्तुत किया जा सके।

पुलिस का कहना है कि दोबारा पूछताछ में नाबालिग ने स्वयं स्वीकार किया कि उसके साथ दुष्कर्म नहीं हुआ था और पूरी कहानी साजिश के तहत बनाई गई थी। पुलिस और कोर्ट के सामने दिए गए बयान में भी इस बात की पुष्टि हुई। इसके बाद जांच एजेंसियों ने मामले को फर्जी साजिश मानते हुए संबंधित लोगों से पूछताछ तेज कर दी है।

चंपावत पुलिस अधीक्षक रेखा यादव ने कहा कि उत्तराखंड पुलिस महिला और बाल अपराधों के मामलों में “जीरो टॉलरेंस” नीति पर काम करती है। उन्होंने कहा कि वास्तविक पीड़ितों को न्याय दिलाना पुलिस की प्राथमिकता है, लेकिन यदि कोई झूठे आरोप लगाकर कानून का दुरुपयोग करता है तो उसके खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस डिजिटल और फॉरेंसिक साक्ष्यों की विस्तृत जांच कर रही है और पूरे षड्यंत्र में शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।

इस खुलासे के बाद पूरे क्षेत्र में मामले को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। एक तरफ लोग जांच में सामने आए तथ्यों को लेकर हैरानी जता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर झूठे मामलों के सामाजिक और कानूनी प्रभावों पर भी चर्चा तेज हो गई है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद सभी दोषियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

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