Spread the love गंगोत्री (उत्तरकाशी)उत्तराखंड के पवित्र गंगोत्री धाम में गंगा दशहरा के अवसर पर श्रद्धा, आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह ब्रह्ममुहूर्त से ही हजारों श्रद्धालु भागीरथी नदी के तट पर पहुंचने लगे थे। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, मंदिर परिसर और घाटों पर श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती गई। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे भक्तों ने मां गंगा के जयघोष के साथ पवित्र भागीरथी नदी में डुबकी लगाकर सुख-समृद्धि और मोक्ष की कामना की। पूरा क्षेत्र “हर-हर गंगे” और “जय मां गंगे” के उद्घोष से भक्तिमय वातावरण में डूबा दिखाई दिया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गंगा दशहरा का पर्व मां गंगा के पृथ्वी पर अवतरण का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक कथाओं में वर्णित है कि राजा भगीरथ ने अपने पूर्वजों की मुक्ति के लिए वर्षों तक कठोर तपस्या की थी, जिसके बाद मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुईं। माना जाता है कि इसी दिन मां गंगा का धरती पर आगमन हुआ था। यही कारण है कि इस पर्व को अत्यंत पुण्यदायी और मोक्ष प्रदान करने वाला माना जाता है। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान करने से दस प्रकार के पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-शांति प्राप्त होती है। गंगोत्री धाम में इस अवसर पर विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। सुबह मंदिर के कपाट खुलने के साथ ही मां गंगा की विशेष पूजा-अर्चना आरंभ हुई। वैदिक मंत्रोच्चार और घंटियों की मधुर ध्वनि के बीच श्रद्धालुओं ने मां गंगा के दर्शन किए। मंदिर में विशेष अभिषेक, आरती और हवन का आयोजन किया गया जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कई श्रद्धालु अपने परिवार के साथ पूजा सामग्री लेकर पहुंचे और विधिवत पूजा-अर्चना कर मां गंगा से परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना की। गंगा दशहरा के कारण उत्तरकाशी जिले के विभिन्न घाटों पर भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। गंगनानी, हर्षिल और आसपास के क्षेत्रों में स्थित घाटों पर लोगों ने पवित्र स्नान कर दान-पुण्य किया। कई स्थानों पर धार्मिक कथा, भजन-कीर्तन और भंडारे का आयोजन किया गया। स्थानीय लोगों ने यात्रियों के स्वागत के लिए विशेष व्यवस्थाएं कीं जिससे पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल बना रहा। चारधाम यात्रा के चलते भी गंगोत्री धाम में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक रही। देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे यात्रियों ने गंगा दशहरा के अवसर पर गंगोत्री पहुंचना विशेष सौभाग्य बताया। श्रद्धालुओं का कहना था कि मां गंगा के उद्गम स्थल पर स्नान और दर्शन करने से उन्हें आध्यात्मिक शांति और आत्मिक संतोष की अनुभूति हुई। कई श्रद्धालु सुबह से लंबी कतारों में खड़े होकर मंदिर में दर्शन के लिए अपनी बारी का इंतजार करते दिखाई दिए। भीड़ को देखते हुए प्रशासन और पुलिस विभाग पूरी तरह सतर्क नजर आया। मंदिर परिसर, घाटों और यात्रा मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए बैरिकेडिंग, सीसीटीवी निगरानी और मेडिकल टीमों की व्यवस्था की गई। आपदा प्रबंधन और एसडीआरएफ की टीमें भी संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात रहीं ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं से नदी किनारे सावधानी बरतने और सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील भी की गई। स्थानीय व्यापारियों और होटल व्यवसायियों के लिए भी यह पर्व आर्थिक दृष्टि से लाभकारी साबित हुआ। गंगोत्री और आसपास के बाजारों में यात्रियों की भारी आवाजाही के कारण दुकानों, होटल और धार्मिक सामग्री बेचने वाले व्यापारियों में उत्साह दिखाई दिया। प्रसाद, फूल-मालाओं और पूजा सामग्री की दुकानों पर दिनभर भीड़ लगी रही। कई श्रद्धालुओं ने स्थानीय उत्पादों और धार्मिक स्मृति चिन्हों की खरीदारी भी की। गंगा दशहरा के अवसर पर पूरे गंगोत्री क्षेत्र में भक्ति और आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। हिमालय की गोद में बसे इस पवित्र धाम में श्रद्धालुओं का उत्साह और मां गंगा के प्रति अटूट विश्वास साफ दिखाई दिया। पर्व के दौरान गंगोत्री धाम पूरी तरह आध्यात्मिक ऊर्जा और धार्मिक उल्लास से सराबोर नजर आया। Post Views: 2 Post navigation बद्रीनाथ धाम के पास टूटा विशाल ग्लेशियर: कंचनगंगा क्षेत्र में एवलांच से दहशत, वायरल वीडियो ने बढ़ाई चिंता रिकॉर्ड बना रही चारधाम यात्रा, श्रद्धालुओं का आंकड़ा 20 लाख के पार पहुंचा, देवभूमि में उमड़ा आस्था का महासैलाब