Spread the love उत्तरकाशी जनपद के प्रसिद्ध दयारा बुग्याल ट्रेक मार्ग पर लापता हुई 30 वर्षीय महिला ट्रेकर बबीता पांडे की तलाश में प्रशासन ने बड़े स्तर पर सघन सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है। यह पूरा अभियान 29 मई 2026 की रात से लगातार जारी है, जिसमें सुरक्षा बलों के साथ-साथ आधुनिक तकनीक की मदद भी ली जा रही है। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र, घने जंगल और लगातार बदलते मौसम की परिस्थितियों के कारण यह खोज अभियान और भी चुनौतीपूर्ण बन गया है, लेकिन प्रशासन किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरत रहा है। जानकारी के अनुसार लापता ट्रेकर बबीता पांडे मूल रूप से नैनीताल जनपद के हल्द्वानी क्षेत्र की निवासी हैं और वर्तमान में एमबीए की पढ़ाई कर रही थीं। वह एक लोकल ट्रैकिंग एजेंसी के माध्यम से अपने अन्य साथियों के साथ दयारा बुग्याल क्षेत्र में ट्रैकिंग के लिए आई थीं। ट्रेक के दौरान सभी यात्री निर्धारित कैंपिंग साइट पर रुके हुए थे और शुक्रवार 29 मई की रात को वह ‘गोई’ नामक कैंपिंग स्थल पर अपने टेंट से बाहर निकली थीं, जिसके बाद से उनका कोई पता नहीं चल पाया। उनके साथ आए सभी अन्य ट्रेकर पूरी तरह सुरक्षित बताए जा रहे हैं, जिससे यह मामला और भी गंभीर और रहस्यमय बन गया है। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन तंत्र तुरंत सक्रिय हो गया। उत्तरकाशी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी लगातार पूरे अभियान की निगरानी कर रहे हैं। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य स्वयं आपदा नियंत्रण कक्ष से इस पूरे सर्च ऑपरेशन की पल-पल की जानकारी ले रहे हैं और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर रहे हैं। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए खोज अभियान को अत्यंत सावधानी और रणनीतिक तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। इस रेस्क्यू ऑपरेशन में आधुनिक तकनीक का भी व्यापक उपयोग किया जा रहा है। घने जंगलों, खड़ी ढलानों और दुर्गम पहाड़ी रास्तों में संभावित सुराग तलाशने के लिए ड्रोन कैमरों की मदद ली जा रही है, जिससे हवाई निगरानी के माध्यम से क्षेत्र के बड़े हिस्से को कवर किया जा सके। इसके साथ ही स्निफर डॉग्स को भी अलग-अलग टीमों के साथ सर्च में लगाया गया है, ताकि किसी भी तरह के मानव उपस्थिति या संकेत को ट्रेस किया जा सके। मैदान स्तर पर इस अभियान में विभिन्न एजेंसियों की संयुक्त टीमें शामिल हैं। राज्य आपदा प्रतिवादन बल SDRF Uttarakhand, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल NDRF India, स्थानीय पुलिस, वन विभाग और क्विक रिस्पांस टीम (QRT) लगातार अलग-अलग क्षेत्रों में सर्च ऑपरेशन चला रही हैं। सभी टीमों को अलग-अलग सेक्टर में बांटकर संभावित मार्गों, गहरी खाइयों और जंगलों के भीतर विस्तृत तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासन ने इस गंभीर स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त बलों की भी मदद लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। क्षेत्र की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और ऊंचाई वाले इलाकों को ध्यान में रखते हुए भारत तिब्बत सीमा पुलिस ITBP और भारतीय सेना को भी इस रेस्क्यू अभियान में शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं। इन बलों के आने से ऊंचाई वाले क्षेत्रों और कठिन ट्रैकिंग रूट्स में खोज अभियान को और मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार दयारा बुग्याल ट्रेक मार्ग अपने प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ कई जगहों पर बेहद खतरनाक और फिसलन भरे रास्तों के लिए भी जाना जाता है। ऐसे में रात के समय किसी व्यक्ति का टेंट से बाहर निकल जाना और फिर लापता हो जाना गंभीर चिंता का विषय बन गया है। प्रशासन हर संभावित पहलू पर जांच कर रहा है, जिसमें भटकने की संभावना से लेकर किसी अनहोनी तक की सभी संभावनाओं को ध्यान में रखा जा रहा है। फिलहाल अब तक बबीता पांडे का कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लग पाया है, लेकिन सर्च ऑपरेशन लगातार जारी है। मौसम की चुनौतियों के बावजूद राहत और बचाव दल पूरी तत्परता के साथ मैदान में डटे हुए हैं। प्रशासन का कहना है कि जब तक महिला ट्रेकर का पता नहीं चल जाता, तब तक यह अभियान बिना रुके जारी रहेगा। यह घटना एक बार फिर से पहाड़ी ट्रेकिंग क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और पर्यटकों की सतर्कता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। प्रशासन और बचाव दल पूरी कोशिश में जुटे हैं कि लापता ट्रेकर को सुरक्षित ढूंढकर वापस लाया जा सके। Post Views: 2 Post navigation उत्तराखंड में मौसम ने बदली करवट, कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट के बीच मूसलाधार बारिश, गर्मी से राहत लेकिन बढ़ा आपदा का खतरा दैनिक प्रभातवाणी ब्यूरो देवप्रयाग के पास ऋषिकेश-बद्रीनाथ हाईवे पर भीषण सड़क हादसा, नदी में समाई एसयूवी, 3 शव बरामद, 4 लापता की तलाश जारी