Google और Meta को भारत सरकार का बड़ा निर्देश – एड पॉलिसी में सुधार का नोटिस

गूगल और मेटा को भारत सरकार का बड़ा निर्देश – एड पॉलिसी में सुधार का नोटिस
दैनिक प्रभातवाणी | 19 जुलाई 2025 | नई दिल्ली
भारत सरकार ने देश में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर चल रहे भ्रामक और गैर-पारदर्शी विज्ञापनों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने दो दिग्गज तकनीकी कंपनियों — गूगल और मेटा (फेसबुक की मूल कंपनी) को औपचारिक नोटिस जारी किया है, जिसमें उनके विज्ञापन (Ads) पारदर्शिता और उपभोक्ता सुरक्षा उपायों पर सवाल उठाए गए हैं।
सरकार ने इन कंपनियों से जवाब तलब करते हुए यह स्पष्ट किया है कि उनके प्लेटफॉर्म्स पर कई ऐसे विज्ञापन दिखाए जा रहे हैं, जो उपभोक्ताओं को भ्रमित करते हैं, भ्रामक वादों से भरे होते हैं, और उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन करते हैं।
क्यों जारी हुआ नोटिस?
विभिन्न उपभोक्ता फोरम्स, साइबर सेल, और नागरिकों से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि सोशल मीडिया और सर्च इंजन प्लेटफॉर्म्स पर कुछ विज्ञापन फर्जी निवेश योजनाएं, दवाइयों के झूठे दावे, फेक ऑनलाइन कोर्स, और कई बार तो सरकारी योजनाओं के नाम पर फर्जीवाड़ा कर रहे हैं। इन शिकायतों के आधार पर केंद्र सरकार ने इन कंपनियों से उनके एड-पॉलिसी, मॉडरेशन सिस्टम और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया को लेकर जवाब मांगा है।
सरकार की मुख्य आपत्तियां
भ्रामक विज्ञापन: कई विज्ञापन ऐसे हैं जिनमें स्वास्थ्य, निवेश, नौकरी, और सरकारी योजनाओं को लेकर झूठे या अधूरे दावे किए गए हैं।
पारदर्शिता की कमी: उपयोगकर्ताओं को यह नहीं बताया जाता कि कौन विज्ञापन चला रहा है और वह कितना विश्वसनीय है।
ग्राहक सुरक्षा की अनदेखी: कई मामलों में उपभोक्ताओं को ठगी का शिकार होना पड़ा और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स ने जिम्मेदारी लेने से इनकार किया।
नोटिस में क्या मांग की गई?
भारत सरकार ने गूगल और मेटा से 7 दिनों के भीतर जवाब देने को कहा है। उनसे यह पूछा गया है:
विज्ञापन प्रकाशित करने से पहले कौन-से मानक अपनाए जाते हैं?
क्या कंपनियां विज्ञापनदाता की वैधता की पुष्टि करती हैं?
उपभोक्ता हितों की रक्षा के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
यदि कंपनियां संतोषजनक उत्तर नहीं देतीं, तो सरकार IT Act 2000 की धारा 79 और 69A, साथ ही उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत कार्रवाई कर सकती है।
गूगल और मेटा की प्रतिक्रिया
फिलहाल गूगल और मेटा की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि इन कंपनियों को अब भारत में अपने कंटेंट और एड पॉलिसी को लेकर और अधिक पारदर्शी बनना होगा।
वैश्विक दृष्टिकोण से क्या है स्थिति?
गौरतलब है कि यूरोपीय संघ, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान जैसे देशों में भी इन टेक दिग्गजों पर विज्ञापन पारदर्शिता और डेटा सुरक्षा को लेकर पहले से सख्ती बढ़ाई जा रही है। भारत अब इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है।
विशेषज्ञों की राय
आईटी लॉ विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का यह कदम सही दिशा में है क्योंकि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अब अरबों लोग भरोसा करते हैं। यदि यहां पर फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी बढ़ती रही तो यह न केवल उपभोक्ताओं का नुकसान करेगा बल्कि भारत के डिजिटल ट्रस्ट को भी ठेस पहुंचेगी।
दैनिक प्रभात वाणी
भारत सरकार का यह कदम डिजिटल वातावरण में पारदर्शिता, जवाबदेही और उपभोक्ता सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक ठोस प्रयास माना जा रहा है। आने वाले समय में गूगल और मेटा को न केवल अपने एड सिस्टम को मजबूत करना होगा बल्कि सरकार की गाइडलाइंस का भी पूरी तरह पालन करना होगा, वरना कानूनी कार्रवाई से बचना मुश्किल होगा।