January 11, 2026

 Nelang Valley of Uttarkashi में अमरनाथ जैसी हिम शिवलिंग की खोज – SDRF को मिली अद्भुत दिव्य आकृति

 Nelang Valley of Uttarkashi में अमरनाथ जैसी हिम शिवलिंग की खोज – SDRF को मिली अद्भुत दिव्य आकृति
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📰 दैनिक प्रभातवाणी | विशेष रिपोर्ट | 11 जुलाई 2025
 उत्तरकाशी की नेलांग घाटी में अमरनाथ जैसी हिम शिवलिंग की खोज – SDRF को मिली अद्भुत दिव्य आकृति


उत्तराखंड की सीमावर्ती नेलांग घाटी से एक चौंकाने वाली और श्रद्धा जगाने वाली खबर सामने आई है। SDRF (राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल) की एक विशेष टीम को यहां एक पर्वत चोटी पर हिम से बनी दिव्य आकृति मिली है, जो अमरनाथ गुफा में मौजूद शिवलिंग से अत्यंत मिलती-जुलती है। टीम ने इस आकृति के पास नंदी के आकार जैसी दूसरी हिमीय संरचना भी देखी है। इस खोज को धार्मिक और पर्यटन दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


कैसे हुई खोज?

उत्तराखंड राज्य की स्थापना की 25वीं वर्षगांठ पर SDRF ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नामक एक साहसिक पर्वतारोहण अभियान शुरू किया था, जिसका उद्देश्य था राज्य की दुर्गम और अब तक अनछुई पर्वतीय चोटियों का अन्वेषण करना। इसी अभियान के अंतर्गत SDRF की 20 सदस्यीय टीम अप्रैल 2025 में नेलांग घाटी पहुंची और ‘नीलापानी क्षेत्र’ की एक अज्ञात चोटी पर चढ़ाई की।

यह चोटी गंगोत्री नेशनल पार्क के भीतर स्थित है, जो भारत-चीन सीमा से महज 25–30 किलोमीटर की दूरी पर है। SDRF की टीम ने लगभग 6,054 मीटर ऊंची इस चोटी को सफलतापूर्वक फतह किया।


🕉 हिम शिवलिंग जैसी आकृति की खोज

करीब 4,300 मीटर की ऊंचाई पर SDRF टीम को एक प्राकृतिक हिम आकृति दिखाई दी, जो पूर्णतः बर्फ से बनी थी और अमरनाथ गुफा में बने हिम शिवलिंग से काफी मिलती-जुलती थी। आकृति की संरचना गोल, बेलनाकार और शिवलिंग जैसी थी। इसके साथ ही पास ही नंदी जैसी आकृति भी बनी थी, जो शिव के वाहन के रूप में पूजनीय है।

इस अद्भुत दृश्य को देख टीम के सभी सदस्य आश्चर्यचकित रह गए और उन्होंने इसे “दिव्य आकृति” करार दिया। इसके बाद इसकी तस्वीरें, वीडियो और सैटेलाइट लोकेशन रिकॉर्ड कर ली गई, जिसे राज्य सरकार को सौंपा गया है।


दृश्य और विशेषता:

  • आकृति पूरी तरह हिम से बनी है, कोई मानव हस्तक्षेप नहीं।

  • बर्फ की पारदर्शिता और आकार देखकर यह स्पष्ट प्रतीत होता है कि यह आकृति वर्षों से प्राकृतिक रूप से बनती आ रही है।

  • आकृति की ऊंचाई लगभग 4–5 फीट आंकी गई है।

  • आकृति एक गुफा जैसी चट्टान के भीतर स्थित है, जिससे यह धार्मिक दृष्टि से और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।


स्थानिक और सामरिक महत्व

नेलांग घाटी भारत-चीन सीमा के बेहद नजदीक है, और यह क्षेत्र पूरी तरह संरक्षित है। यहां जाने के लिए इनर लाइन परमिट अनिवार्य होता है। गंगोत्री से लगभग 115 किलोमीटर उत्तर में स्थित यह इलाका सामान्यतः आम नागरिकों के लिए खुला नहीं होता। SDRF की टीम इस चोटी को पहली बार फतह करने वाली टीम बनी है।

इस स्थान को रणनीतिक दृष्टि से भी बेहद संवेदनशील माना जाता है, और यहां SDRF का यह अन्वेषण एक साहसिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।


धार्मिक और पर्यटन संभावनाएं

उत्तराखंड को “देवभूमि” कहा जाता है और राज्य सरकार लगातार नए धार्मिक और साहसिक पर्यटन स्थलों को विकसित करने की दिशा में कार्य कर रही है। SDRF की इस खोज ने सरकार के सामने एक नई संभावना खोल दी है — उत्तरकाशी के अमरनाथ के रूप में।

यदि सरकार इस स्थान को तीर्थ स्थल के रूप में मान्यता देती है:

  • तो यहां एक नई हिम तीर्थ यात्रा शुरू की जा सकती है।

  • यह स्थल उत्तर भारत के बर्फीले शिवधाम के रूप में उभर सकता है।

  • स्थानीय लोगों को रोजगार और क्षेत्रीय विकास में मदद मिलेगी।


प्रशासन और SDRF की प्रतिक्रिया

SDRF कमांडेंट ने कहा:

“यह आकृति पूरी तरह प्राकृतिक है और धार्मिक दृष्टि से इसे असाधारण रूप से पवित्र माना जा सकता है। हमने सरकार को विस्तृत रिपोर्ट सौंपी है। विशेषज्ञों की टीम से भौगोलिक, पर्यावरणीय और धार्मिक दृष्टिकोण से मूल्यांकन कराया जाएगा।”

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विशेष पर्वतारोहण अभियान “ऑपरेशन सिंदूर” की यह उपलब्धि राज्य की धार्मिक पहचान को और भी सुदृढ़ कर सकती है।


यात्रा चुनौतियां और भविष्य की योजना

यह स्थल अत्यंत दुर्गम है और आम यात्रियों के लिए ट्रैकिंग करना चुनौतीपूर्ण होगा:

  • लंकापुल तक वाहन से जाया जा सकता है।

  • इसके बाद लगभग 4.5 किलोमीटर की चढ़ाई पैदल तय करनी पड़ती है।

  • रास्ते में ग्लेशियर, पत्थर और अत्यधिक ठंड जैसे खतरे हैं।

  • मौसम केवल मई से सितंबर तक ही अनुकूल रहता है।

सरकार यदि सुरक्षा, स्वास्थ्य और गाइडलाइन के साथ यह मार्ग विकसित करती है, तो यह एक सुरक्षित धार्मिक ट्रैकिंग मार्ग बन सकता है।


✍️ दैनिक प्रभातवाणी

नेलांग घाटी में SDRF को मिली यह दिव्य हिम आकृति उत्तराखंड के लिए एक नई सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर बन सकती है। यह केवल आस्था का केंद्र नहीं बल्कि पर्वतारोहण, पर्यावरणीय संतुलन और सीमावर्ती पर्यटन के लिए भी एक ऐतिहासिक खोज है।

 यह खबर विशेष रूप से “दैनिक प्रभातवाणी” के पाठकों के लिए प्रस्तुत की गई।

वेबसाइट: www.dainikprbhatvani.com
ईमेल: dainikprbhatvani@gmail.com
रिपोर्ट: विशेष संवाददाता, SDRF अभियान दल के साथ