RBI का बड़ा फैसला: ₹1 लाख करोड़ की रिवर्स रेपो नीलामी से नकदी पर लगेगी लगाम

नई दिल्ली, 28 जून 2025
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग प्रणाली में तरलता (Liquidity) को नियंत्रित करने के लिए ₹1 लाख करोड़ की वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) नीलामी की घोषणा की है। यह कदम अचानक घटती ओवरनाइट दरों को रेपो रेट के करीब बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।
पिछले कुछ हफ्तों से बैंकिंग प्रणाली में अधिक नकदी प्रवाह (excess liquidity) दर्ज किया गया था, जिससे ओवरनाइट इंटरबैंक रेट (Call/CBLO rates) में गिरावट आ रही थी। इससे ब्याज दरों के प्रभावी ट्रांसमिशन पर असर पड़ रहा था।
क्या है VRRR नीलामी?
VRRR एक प्रकार की नकदी प्रबंधन नीति है जिसमें RBI बैंकों से एक निश्चित ब्याज दर पर धन उधार लेता है, ताकि अतिरिक्त नकदी को बाहर खींचा जा सके। इससे बाजार में उपलब्ध नकदी संतुलित रहती है और ब्याज दरें स्थिर बनी रहती हैं।
RBI का उद्देश्य:
RBI की यह रणनीति संकेत देती है कि वह मौद्रिक नीति ढांचे के तहत ब्याज दरों को स्थिर बनाए रखने के लिए अधिक सक्रिय हो रही है। इसके जरिए वह मुद्रास्फीति नियंत्रण और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने में मदद कर रहा है।
क्या होगा असर?
बैंक अब RBI के पास अधिक धन जमा कर सकते हैं, जिससे बाजार में नकदी की उपलब्धता सीमित होगी।
रेपो रेट और ओवरनाइट रेट में संतुलन बना रहेगा।
ब्याज दरों के माध्यम से बाजार में मूल्य स्थिरता का लक्ष्य आसानी से पाया जा सकेगा।
यह निर्णय ऐसे समय आया है जब भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है लेकिन बढ़ती तरलता के कारण मुद्रास्फीति और ब्याज दरों की अस्थिरता का जोखिम बना हुआ है।
RBI का यह कदम दर्शाता है कि तरलता प्रबंधन अब नीतिगत प्राथमिकता बन गया है। आगे चलकर वित्तीय संस्थाओं और कर्ज लेने वालों दोनों को इसका प्रभाव देखने को मिलेगा।