UKSSSC परीक्षा पेपर लीक विवाद: छात्रों के दबाव के बाद CBI जांच की अनुशंसा का वादा, आगामी परीक्षाएँ स्थगित

देहरादून, 4 अक्टूबर 2025/दैनिक प्रभातवाणी
देहरादून। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की परीक्षाओं में पेपर लीक विवाद एक बार फिर गहराता जा रहा है। इस बार मामला इतना गंभीर हो गया कि छात्रों के जोरदार विरोध-प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को स्वयं सामने आना पड़ा। उन्होंने साफ किया है कि राज्य सरकार इस पूरे प्रकरण की गंभीरता से जांच कराएगी और यदि आवश्यक हुआ तो CBI जांच की अनुशंसा करने से भी पीछे नहीं हटेगी।
इस बीच, विवाद के चलते सरकार ने आगामी सहकारी निरीक्षक और सहायक विकास अधिकारी की परीक्षा, जो 5 अक्टूबर को आयोजित होनी थी, को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने का निर्णय लिया है। इस फैसले ने लाखों अभ्यर्थियों में नई चिंता पैदा कर दी है, लेकिन वे भी मानते हैं कि जब तक परीक्षाओं की पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक परीक्षा कराना उचित नहीं है।
पेपर लीक विवाद की पृष्ठभूमि
उत्तराखंड में पेपर लीक विवाद नया नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में कई बार बड़े पैमाने पर परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाएँ सामने आईं हैं। विशेषकर UKSSSC द्वारा आयोजित परीक्षाएँ लगातार विवादों में रही हैं। 2022 में हुए ग्रेजुएट लेवल भर्ती परीक्षा घोटाले ने पूरे राज्य को हिला दिया था। उस मामले में STF ने कई गिरफ्तारियाँ की थीं और बड़े पैमाने पर नकल माफिया का खुलासा किया था।
हालांकि, कड़ी कार्रवाई और जांच के बाद भी समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई। अभ्यर्थियों का आरोप है कि परीक्षा माफिया अब भी सक्रिय हैं और हर बार नए तरीके से भर्ती प्रक्रियाओं को प्रभावित करते हैं। यही वजह है कि हर नई परीक्षा से पहले छात्रों में शंका और अविश्वास का माहौल बना रहता है।
छात्रों का विरोध और सड़क पर उतरे युवा
हाल ही में हुई परीक्षाओं में गड़बड़ी की खबरों के बाद अभ्यर्थी एक बार फिर सड़कों पर उतर आए। देहरादून, हल्द्वानी, हरिद्वार और श्रीनगर गढ़वाल सहित कई जगहों पर छात्रों ने प्रदर्शन किया।
अभ्यर्थियों का कहना था कि उनकी मेहनत और भविष्य के साथ बार-बार खिलवाड़ किया जा रहा है। तैयारी करने वाले छात्रों ने नारेबाजी करते हुए सरकार से मांग की कि यदि वह ईमानदारी से पारदर्शी भर्ती कराना चाहती है, तो पेपर लीक मामलों में बाहरी और निष्पक्ष जांच एजेंसी, यानी CBI से जांच कराई जाए।
एक छात्र ने प्रदर्शन के दौरान कहा, “हम सालों-साल तैयारी करते हैं, लेकिन हर बार पेपर लीक हो जाता है। इसका खामियाजा हमें भुगतना पड़ता है। अब हमें केवल CBI जांच पर भरोसा है।”
मुख्यमंत्री धामी का बयान
छात्रों के विरोध को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साफ किया कि सरकार छात्रों की भावनाओं का सम्मान करती है। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले की CBI जांच की अनुशंसा की जाएगी ताकि किसी को भी संदेह का अवसर न मिले।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य की परीक्षाओं में सुरक्षा को और कड़ा किया जाएगा। इसके लिए आयोग को निर्देश दिए गए हैं कि प्रश्नपत्र की प्रिंटिंग से लेकर वितरण तक की हर प्रक्रिया में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाए।
उन्होंने कहा, “हमारी सरकार युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ कभी बर्दाश्त नहीं करेगी। दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा और पारदर्शिता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।”
आगामी परीक्षाएँ स्थगित
पेपर लीक विवाद के कारण सबसे अधिक असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ा है, जिन्होंने 5 अक्टूबर को होने वाली सहकारी निरीक्षक व सहायक विकास अधिकारी परीक्षा की तैयारी की थी। इस परीक्षा में हजारों अभ्यर्थियों को शामिल होना था। लेकिन विवाद को देखते हुए सरकार ने इसे अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया।
हालांकि, इससे छात्रों की चिंता भी बढ़ गई है। कई छात्रों का कहना है कि एक ओर तो पेपर लीक की समस्या से जूझना पड़ता है, और दूसरी ओर परीक्षा स्थगित होने से उनके साल बर्बाद हो रहे हैं।
एक अभ्यर्थी ने कहा, “हम दिन-रात मेहनत करते हैं, कोचिंग और किताबों पर खर्च करते हैं, लेकिन हर बार पेपर लीक या परीक्षा स्थगन से हमारी उम्र और ऊर्जा दोनों नष्ट हो जाती हैं। सरकार को जल्दी से जल्दी नई तिथि घोषित करनी चाहिए।”
विपक्ष का हमला
इस विवाद पर विपक्ष ने भी सरकार को घेर लिया है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि सरकार भर्ती परीक्षाओं को निष्पक्ष कराने में नाकाम रही है। विपक्ष का कहना है कि केवल CBI जांच की बात करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सरकार को इस बात की जिम्मेदारी लेनी होगी कि आखिर क्यों बार-बार पेपर लीक की घटनाएँ हो रही हैं।
कांग्रेस के एक प्रवक्ता ने कहा, “यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह युवाओं का भविष्य सुरक्षित रखे। लेकिन बार-बार पेपर लीक होना इस बात का सबूत है कि प्रशासनिक स्तर पर गहरी खामियाँ हैं। केवल जांच का आश्वासन देने से काम नहीं चलेगा।”
विशेषज्ञों की राय
शिक्षा और प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह तकनीक आधारित करने की जरूरत है।
प्रश्नपत्रों की प्रिंटिंग प्रक्रिया पूरी तरह गोपनीय होनी चाहिए।
प्रश्नपत्र के वितरण में डिजिटल सुरक्षा अपनाई जानी चाहिए।
परीक्षा केंद्रों पर CCTV और जैमर का इस्तेमाल बढ़ाना चाहिए।
नकल माफिया पर कड़ी से कड़ी सजा सुनिश्चित करनी होगी।
विशेषज्ञ मानते हैं कि जब तक सरकार और आयोग परीक्षा प्रक्रिया को आधुनिक और सुरक्षित नहीं बनाएंगे, तब तक इस तरह के विवाद बार-बार सामने आते रहेंगे।
युवाओं के भविष्य पर संकट
पेपर लीक और परीक्षाओं के स्थगन ने युवाओं के भविष्य पर गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। एक ओर वे रोजगार पाने के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं पर निर्भर हैं, दूसरी ओर बार-बार होने वाले घोटालों से उनका विश्वास हिल गया है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि जल्दी ही सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो राज्य के युवा रोजगार के लिए पलायन को मजबूर हो सकते हैं।
दैनिक प्रभातवाणी
UKSSSC परीक्षा पेपर लीक विवाद केवल एक प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि युवाओं के सपनों पर कुठाराघात है। मुख्यमंत्री धामी का CBI जांच की अनुशंसा करने का आश्वासन एक सकारात्मक कदम जरूर है, लेकिन असली चुनौती परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की है।
साथ ही, परीक्षाओं के स्थगन से निराश युवाओं को भी स्पष्ट और त्वरित समाधान चाहिए। यदि सरकार इस मौके का सही उपयोग करती है और मजबूत कदम उठाती है, तो न केवल छात्रों का विश्वास लौटेगा, बल्कि भविष्य की भर्ती प्रक्रियाएँ भी निष्पक्ष बन सकेंगी।