January 11, 2026

आपदा राहत और पुनर्वास : मुख्यमंत्री धामी का बड़ा ऐलान, प्रभावित परिवारों को ₹5 लाख की मदद

आपदा राहत और पुनर्वास : मुख्यमंत्री धामी का बड़ा ऐलान, प्रभावित परिवारों को ₹5 लाख की मदद

आपदा राहत और पुनर्वास : मुख्यमंत्री धामी का बड़ा ऐलान, प्रभावित परिवारों को ₹5 लाख की मदद

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थराली/पौड़ी/धाराली, 27 अगस्त 2025 (दैनिक प्रभातवाणी)।

उत्तराखंड की वादियों में इस समय बारिश कहर बनकर टूट रही है। पहाड़ों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने नदियों और बरसाती नालों को उफान पर ला दिया है। नतीजतन, कई जगह भूस्खलन और फ्लैश फ्लड जैसी आपदाओं ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। इस प्राकृतिक त्रासदी से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाके गढ़वाल मंडल के धाराली, थराली, सयनाचट्टी और पौड़ी रहे, जहाँ दर्जनों परिवार बेघर हो गए और कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। हालात की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राहत एवं बचाव कार्यों को युद्ध स्तर पर चलाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, उन्होंने राज्य सरकार की ओर से प्रभावित परिवारों को ₹5 लाख की सहायता राशि देने का ऐलान किया है

प्रभावित क्षेत्रों में तबाही का मंजर

पिछले एक सप्ताह से लगातार हो रही बारिश ने उत्तराखंड के ऊँचे और निचले दोनों क्षेत्रों में भारी नुकसान पहुंचाया है। गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग के पास स्थित धाराली गांव में अचानक आए मलबे ने घरों को जमींदोज कर दिया। कई लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया लेकिन अब भी कुछ लोग बेघर होकर अस्थायी शिविरों में शरण लिए हुए हैं।

थराली क्षेत्र में तो आपदा का मंजर और भयावह रहा। यहाँ बादल फटने जैसी स्थिति ने गांवों को तबाह कर दिया। खेत खलिहान बह गए, पुल और सड़कें क्षतिग्रस्त हो गईं। सड़कों के टूटने से राहत दलों को घटनास्थल तक पहुँचने में भारी दिक्कत आई।

सयनाचट्टी और पौड़ी में भी भूस्खलन के कारण मकानों और दुकानों को नुकसान पहुँचा। कई स्थानों पर बिजली और पानी की सप्लाई ठप हो गई है। प्रभावित परिवारों को फिलहाल सरकारी स्कूलों और पंचायत भवनों में ठहराया गया है।

मुख्यमंत्री धामी की संवेदनशीलता और तत्परता

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों की जानकारी मिलते ही उच्चस्तरीय बैठक बुलाई और जिला प्रशासन को तुरंत राहत कार्यों में जुटने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मानव जीवन की रक्षा सर्वोपरि है और इसके लिए किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सीएम धामी ने घोषणा की कि जिन परिवारों ने इस आपदा में अपने परिजनों को खोया है, उन्हें राज्य सरकार की ओर से तत्काल ₹5 लाख की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसके साथ ही, जिनके मकान पूरी तरह ध्वस्त हो गए हैं, उन्हें स्थायी पुनर्वास योजना के तहत घर उपलब्ध कराए जाएंगे।

थराली आपदा की जांच के लिए विशेष टीम

थराली क्षेत्र में हुई भीषण आपदा को लेकर मुख्यमंत्री ने विशेष गंभीरता दिखाई है। उन्होंने विशेषज्ञों की एक टीम गठित करने का निर्देश दिया है, जो मौके पर जाकर आपदा के कारणों की विस्तृत जांच करेगी। यह टीम यह भी आकलन करेगी कि आखिर इतनी बड़ी तबाही क्यों हुई और भविष्य में इस तरह की स्थितियों से बचने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जा सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में वैज्ञानिक अध्ययन बेहद जरूरी है, ताकि हम प्रकृति की नाजुक संरचना को समझकर विकास कार्यों की दिशा तय कर सकें।

युद्धस्तर पर चल रहे राहत एवं बचाव कार्य

राज्य आपदा प्रबंधन बल (SDRF), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), पुलिस और स्थानीय प्रशासन मिलकर राहत कार्यों में जुटे हुए हैं। मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए मशीनरी लगाई गई है। नदी किनारे बसे गांवों को खाली कराया जा रहा है।

धाराली और थराली में सेना के जवान भी मोर्चा संभाले हुए हैं। हेलीकॉप्टर के जरिए दूरदराज के क्षेत्रों में फंसे लोगों को बाहर निकाला जा रहा है। वहीं, मेडिकल टीमें लगातार घायलों का उपचार कर रही हैं।

राहत शिविरों में व्यवस्था

सरकार की ओर से बनाए गए राहत शिविरों में प्रभावित परिवारों को भोजन, दवा और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। बच्चों और महिलाओं की विशेष देखभाल की जा रही है। मुख्यमंत्री धामी ने निर्देश दिए हैं कि शिविरों में किसी भी प्रकार की कमी न रहे और प्रभावित लोगों को सुरक्षित व सम्मानजनक माहौल मिले।

पुनर्वास की बड़ी चुनौती

उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में हर साल मानसून के दौरान आपदा का खतरा बढ़ जाता है। इस बार फिर वही तस्वीर सामने आई है। अब सबसे बड़ी चुनौती है – प्रभावित लोगों को स्थायी पुनर्वास देना।

राज्य सरकार ने संकेत दिए हैं कि जिन क्षेत्रों में बार-बार भूस्खलन हो रहा है, वहाँ से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर बसाया जाएगा। इसके लिए भूमि चिह्नित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

विशेषज्ञों की राय

आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तराखंड की भौगोलिक संरचना बेहद संवेदनशील है। अंधाधुंध सड़क निर्माण, पेड़ों की कटाई और नदी किनारों पर अतिक्रमण से आपदाओं का खतरा और बढ़ जाता है। उनका मानना है कि राज्य सरकार को तात्कालिक राहत के साथ-साथ दीर्घकालिक नीतियाँ भी बनानी होंगी।

विशेषज्ञों ने यह भी सुझाव दिया है कि स्थानीय समुदायों को आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में वे अपनी और दूसरों की जान बचा सकें।

केंद्र सरकार से सहयोग की उम्मीद

मुख्यमंत्री धामी ने केंद्र सरकार से भी अतिरिक्त मदद की मांग की है। उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय और गृहमंत्रालय को पत्र भेजकर कहा है कि इस आपदा से निपटने के लिए अतिरिक्त धन और संसाधनों की जरूरत है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही केंद्र से भी वित्तीय पैकेज की घोषणा होगी।

पीड़ितों की पीड़ा और उम्मीद

आपदा प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के चेहरे पर गम और चिंता साफ झलक रही है। एक ओर वे अपने घर और परिवार के सदस्यों को खोने का दुख झेल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राहत और पुनर्वास की उम्मीद भी लगाए बैठे हैं।

एक महिला पीड़िता ने बताया कि “हमारा सबकुछ मलबे में दब गया है। अब सरकार ही हमारा सहारा है।” वहीं, एक बुजुर्ग व्यक्ति ने कहा, “हम हर साल आपदा का सामना करते हैं, लेकिन इस बार तबाही कुछ ज्यादा ही बड़ी है। अब हमें स्थायी समाधान चाहिए।”

भविष्य की राह

उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन को लेकर बार-बार सवाल उठते रहे हैं। चाहे केदारनाथ आपदा हो या फिर हालिया थराली त्रासदी, हर बार यह साबित हुआ है कि पहाड़ों में आपदा से निपटने के लिए पुख्ता इंतजाम की सख्त जरूरत है।

मुख्यमंत्री धामी ने आश्वासन दिया है कि इस बार राहत और पुनर्वास केवल कागजों में सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जमीन पर ठोस काम होगा। उन्होंने कहा कि “राज्य सरकार हर प्रभावित परिवार के साथ खड़ी है और हम सुनिश्चित करेंगे कि उन्हें उनका हक मिले।”