January 15, 2026

उत्तराखंड में नमक पर उठा सवाल: मिलावट की गूंज, सरकार की कड़ी नजर और जनता की चिंता

उत्तराखंड में नमक पर उठा सवाल: मिलावट की गूंज, सरकार की कड़ी नजर और जनता की चिंता
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देहरादून, 5 सितम्बर 2025 (दैनिक प्रभातवाणी ब्यूरो)।

उत्तराखंड में उपभोक्ताओं की रसोई तक पहुँचने वाले नमक पर इन दिनों बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। बागेश्वर और खटीमा जैसे क्षेत्रों से यह आरोप सामने आया कि सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों पर मिलने वाला आयोडीन युक्त नमक शुद्ध नहीं है, बल्कि उसमें रेत जैसी अशुद्धियाँ मौजूद हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में स्थानीय लोगों ने दावा किया कि जब इस नमक को पानी में डाला गया तो वह पूरी तरह घुलने के बजाय नीचे बैठ गया और तलहटी में रेतनुमा परत जम गई। यह दृश्य केवल एक वीडियो का हिस्सा नहीं रहा, बल्कि धीरे-धीरे पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गया।

सोशल मीडिया से निकला विवाद, गाँव-गाँव तक पहुँची चिंता

आज के समय में सोशल मीडिया किसी भी मुद्दे को तूल देने में सबसे अहम भूमिका निभाता है। इस बार भी ऐसा ही हुआ। बागेश्वर और खटीमा के कुछ उपभोक्ताओं ने जब अपने मोबाइल फोन से यह वीडियो रिकॉर्ड कर साझा किया, तो देखते ही देखते यह वीडियो फेसबुक, व्हाट्सऐप और इंस्टाग्राम पर फैल गया। लोगों ने इस पर अपनी प्रतिक्रियाएँ दीं और सवाल उठाए कि आखिर गरीबों को दिए जाने वाले राशन में ऐसा घटिया स्तर का नमक क्यों बाँटा जा रहा है।

नमक एक ऐसा खाद्य पदार्थ है जो रोज़मर्रा की ज़िंदगी का अहम हिस्सा है। इसकी गुणवत्ता पर सवाल उठते ही आम लोगों के मन में असुरक्षा की भावना गहराने लगी। कहीं यह नमक सेहत पर प्रतिकूल असर न डाले? कहीं आयोडीन की कमी या अतिरिक्त अशुद्धियाँ लोगों को बीमार न कर दें? इसी आशंका ने इस पूरे विवाद को और गंभीर बना दिया।

मुख्यमंत्री का संज्ञान: “जनता के स्वास्थ्य से समझौता नहीं”

वायरल वीडियो और शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तत्काल जांच के आदेश दिए। उन्होंने अधिकारियों से साफ कहा कि यह मामला जनता के स्वास्थ्य और विश्वास से जुड़ा है, इसलिए किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर पूरे प्रदेश की सभी 113 तहसीलों से नमक के नमूने एकत्र किए जा रहे हैं। इन नमूनों की प्रयोगशालाओं में वैज्ञानिक जांच होगी और यदि किसी स्तर पर मिलावट पाई जाती है तो जिम्मेदार आपूर्तिकर्ता, ठेकेदार या अधिकारी पर सख्त कार्रवाई तय है।

पहले की रिपोर्ट: “नमक मानकों पर सही”

दिलचस्प यह है कि इस नमक की गुणवत्ता को लेकर पहले भी जांच की जा चुकी है। प्रतिष्ठित प्रयोगशालाएँ जैसे डिफेंस फूड रिसर्च लैब, ITC लैब और रुड़की की राज्य प्रयोगशाला पहले ही नमक का परीक्षण कर चुकी हैं। इन सभी रिपोर्टों में यह स्पष्ट किया गया था कि नमक खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के नियमों के अनुरूप है।

रिपोर्ट के अनुसार नमक में आयोडीन की मात्रा भी पर्याप्त पाई गई थी और उसमें कोई हानिकारक तत्व नहीं मिला। यही कारण है कि जब वायरल वीडियो सामने आया तो सरकारी एजेंसियाँ भी हैरान रह गईं।

सवालों के घेरे में सप्लाई चेन

अब सवाल यह उठता है कि यदि मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाएँ नमक को सही बता रही हैं तो आखिर रेत जैसी परत कहाँ से आई? क्या यह नमक गोदाम से दुकानों तक पहुँचने के दौरान दूषित हुआ? या फिर कहीं स्थानीय स्तर पर मिलावट की गई? सप्लाई चेन की यह कड़ी अब जांच के दायरे में आ गई है।

उत्तराखंड में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत लाखों लोग सरकारी दुकानों से सस्ता राशन प्राप्त करते हैं। इसमें नमक, चावल, गेहूँ और अन्य जरूरी वस्तुएँ शामिल होती हैं। यदि इनमें से किसी एक वस्तु पर भी मिलावट का संदेह हो तो यह न केवल पूरी प्रणाली पर अविश्वास पैदा करता है बल्कि प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है।

ग्रामीण उपभोक्ताओं की चिंता

ग्रामीण इलाकों में रहने वाले उपभोक्ता इस पूरे मामले से सबसे अधिक चिंतित हैं। उनके लिए सरकारी दुकानों से मिलने वाला नमक ही प्रमुख विकल्प होता है, क्योंकि निजी दुकानों पर उपलब्ध ब्रांडेड नमक उनकी जेब पर भारी पड़ता है।

बागेश्वर के एक उपभोक्ता का कहना है, “हम गरीब लोग हैं, जो भी सरकार देती है, वही खाते हैं। अगर नमक में रेत मिलेगी तो हम क्या कर पाएँगे? हमारी सेहत बिगड़ेगी तो इलाज कराने की सामर्थ्य भी नहीं है।”

खटीमा की एक महिला ने कहा, “नमक खाने की हर डिश में पड़ता है। अगर यही खराब होगा तो बच्चे और बूढ़े सब बीमार हो जाएँगे। सरकार को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।”

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय

स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि नमक में थोड़ी भी मिलावट लंबे समय में गंभीर असर डाल सकती है। यदि नमक में रेत या अन्य अशुद्धियाँ हैं तो यह पाचन तंत्र को प्रभावित कर सकती हैं। वहीं, आयोडीन की कमी से गॉइटर जैसी बीमारियाँ फैल सकती हैं, जो पहाड़ी क्षेत्रों में पहले से ही बड़ी चुनौती रही हैं।

एक पोषण विशेषज्ञ का कहना है, “नमक में मिलावट का सबसे बड़ा खतरा यह है कि लोग इसे तुरंत पहचान नहीं पाते। यदि यह लगातार शरीर में जाता रहे तो गुर्दों और आंतों पर असर डाल सकता है। इसलिए जांच के बाद सच्चाई स्पष्ट होना बेहद जरूरी है।”

राजनीतिक हलचल और विपक्ष की प्रतिक्रिया

नमक का यह विवाद केवल सामाजिक और स्वास्थ्य का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि धीरे-धीरे राजनीति के गलियारों में भी गूंजने लगा है। विपक्षी दलों ने सरकार पर आरोप लगाया है कि गरीबों को घटिया गुणवत्ता का राशन दिया जा रहा है। उन्होंने मांग की है कि इस मामले में उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और यदि कोई गड़बड़ी साबित होती है तो दोषियों को जेल भेजा जाए।

विपक्ष का कहना है कि बार-बार प्रयोगशालाओं की रिपोर्ट का हवाला देना जनता की शंका को खत्म नहीं करता। असलियत तभी सामने आएगी जब सभी जिलों से स्वतंत्र जांच होगी और उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी।

प्रयोगशालाओं पर भी उठे सवाल

हालांकि सरकारी रिपोर्टें नमक को सही बता रही हैं, लेकिन अब जनता के बीच यह सवाल भी उठने लगे हैं कि क्या लैब्स की रिपोर्ट पर भरोसा किया जा सकता है? क्या कहीं जांच प्रक्रिया में भी गड़बड़ी हुई? विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नमक वास्तव में सही है तो यह प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह जनता के सामने पारदर्शी तरीके से रिपोर्ट पेश करे।

आगे की राह: पारदर्शिता और जवाबदेही

इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है। सरकार को चाहिए कि वह न केवल वैज्ञानिक रिपोर्ट जनता के सामने रखे, बल्कि इस बात की भी गारंटी दे कि भविष्य में ऐसी आशंकाएँ न पैदा हों।

राज्य स्तर पर खाद्य आपूर्ति विभाग ने भी संकेत दिया है कि नमक की क्वालिटी पर निगरानी बढ़ाई जाएगी और हर खेप की जांच की जाएगी। साथ ही, जनता से भी अपील की जा रही है कि यदि किसी को कहीं भी अशुद्ध नमक या खाद्य सामग्री मिले तो तुरंत शिकायत दर्ज कराएँ।

जनता के विश्वास की परीक्षा

नमक का यह विवाद भले ही तकनीकी तौर पर एक जांच का मामला हो, लेकिन असल में यह जनता के विश्वास की परीक्षा है। सरकार और प्रशासन यदि पारदर्शिता और ईमानदारी से जांच करते हैं तो लोगों का भरोसा कायम रहेगा। लेकिन यदि मामले को दबाने की कोशिश हुई तो यह एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक संकट भी बन सकता है।

दैनिक प्रभातवाणी

उत्तराखंड में नमक पर उठा यह सवाल केवल एक खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता का मुद्दा नहीं, बल्कि यह उस विश्वास का प्रश्न है जो आम लोग सरकार और उसकी योजनाओं पर करते हैं। जांच का परिणाम चाहे जो भी निकले, यह स्पष्ट है कि जनता अब जागरूक है और किसी भी गड़बड़ी पर आवाज उठाने से पीछे नहीं हटेगी।

आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि वायरल वीडियो में दिखाई गई रेत वास्तव में मिलावट का सबूत है या फिर यह एक भ्रांति मात्र। लेकिन तब तक जनता और सरकार, दोनों की नजरें इस जांच रिपोर्ट पर टिकी रहेंगी।