उत्तराखंड में पोल्ट्री फार्म की आड़ में चल रही अंतरराष्ट्रीय ड्रग लैब का भंडाफोड़, करोड़ों की एमडीएमए जब्त
ajaysemalty98 July 16, 2025
दैनिक प्रभातवाणी विशेष रिपोर्ट
तारीख: 16 जुलाई 2025
उत्तराखंड में पोल्ट्री फार्म की आड़ में चल रही अंतरराष्ट्रीय ड्रग लैब का भंडाफोड़, करोड़ों की एमडीएमए जब्त
चंपावत-पिथौरागढ़:
उत्तराखंड के शांत पहाड़ी क्षेत्रों में पहली बार इतनी बड़ी मात्रा में सिंथेटिक ड्रग्स (एमडीएमए) बनाने वाली फैक्ट्री का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस और नारकोटिक्स टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए दो जिलों — चंपावत और पिथौरागढ़ — में चल रहे एक फर्जी पोल्ट्री फार्म पर छापेमारी कर इस हाई-प्रोफाइल ड्रग सिंडिकेट को बेनकाब किया। कार्रवाई में करोड़ों रुपये की ड्रग्स, केमिकल्स और उपकरण जब्त किए गए हैं, जबकि गैंग के मुख्य सरगना को भी हिरासत में ले लिया गया है।
पोल्ट्री फार्म नहीं, ड्रग लैब निकली!
सूत्रों के अनुसार, संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिलने पर स्थानीय पुलिस और स्पेशल नारकोटिक्स टीम ने संयुक्त रूप से एक अभियान शुरू किया। चंपावत जिले के बाराकोट क्षेत्र और पिथौरागढ़ के धारचूला के पास मौजूद दो कथित पोल्ट्री फार्मों पर छापेमारी की गई।
जांच के दौरान पाया गया कि पोल्ट्री फार्म की आड़ में इन जगहों पर एमडीएमए (MDMA) जैसी पार्टी ड्रग तैयार की जा रही थी। फैक्ट्री में यूरोपीय तकनीक से लैस रसायन संयंत्र, उच्च श्रेणी के रिएक्टर्स और मिश्रण यंत्र लगे हुए थे, जिनका प्रयोग ड्रग उत्पादन में हो रहा था।
गिरफ्तारियां और खुलासे
अभियान के दौरान मुख्य संचालक मोहम्मद रईस अंसारी, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश का रहने वाला है, को मौके से गिरफ्तार किया गया। प्रारंभिक पूछताछ में खुलासा हुआ है कि इस गैंग के तार दुबई, थाईलैंड और अफ्रीका जैसे देशों से जुड़े हैं। आरोपी ड्रग्स को स्थानीय स्तर पर बनाकर अंतरराष्ट्रीय गिरोहों के जरिए विदेशों में सप्लाई कर रहा था।
पुलिस ने घटनास्थल से निम्नलिखित जब्त किया:
लगभग 8 किलोग्राम शुद्ध एमडीएमए पाउडर
25 लीटर रासायनिक घोल, जो ड्रग निर्माण में उपयोग होता है
4 लैपटॉप, 7 मोबाइल फोन, जिनमें विदेशी नंबरों से हुई बातचीत के सबूत
नकद ₹14.5 लाख
और फर्जी दस्तावेज, जो फार्म के नाम पर रजिस्ट्रेशन के लिए उपयोग किए गए थे
अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का हिस्सा
जांच एजेंसियों का मानना है कि यह गिरोह वर्षों से सक्रिय था और सीमावर्ती क्षेत्रों को अपना बेस बना रहा था ताकि नेपाल के रास्ते आसानी से ड्रग्स की तस्करी की जा सके। पिथौरागढ़ की भौगोलिक स्थिति और अंतरराष्ट्रीय सीमा से निकटता को देखते हुए गिरोह ने इस इलाके को चुना था।
एसएसपी पिथौरागढ़, श्रीमती सीमा यादव ने प्रेस को बताया:
“यह कोई साधारण मामला नहीं है। यह एक पूर्ण विकसित अंतरराष्ट्रीय ड्रग निर्माण और तस्करी का नेटवर्क है। हमें अन्य राज्यों और देशों की जांच एजेंसियों से भी सहयोग की आवश्यकता होगी।”
चौंकाने वाले तथ्य
गिरफ्तार आरोपी पूर्व में एक केमिकल इंजीनियर रह चुका है और उसने अपने ज्ञान का दुरुपयोग करते हुए हाई-ग्रेड एमडीएमए तैयार किया।
फार्म हाउस में सुरक्षा कैमरे, इनवर्टर, जनरेटर और साउंडप्रूफ लैब बनाए गए थे ताकि कोई आवाज बाहर न जाए।
ड्रग्स का ट्रांसपोर्टेशन पनीर और डेयरी उत्पादों के डिब्बों में कर किया जाता था, ताकि जांच एजेंसियों को भ्रमित किया जा सके।
आगे की कार्यवाही
पुलिस ने इस कार्रवाई के बाद एनडीपीएस एक्ट (Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act) के तहत सख्त धाराओं में केस दर्ज किया है। आरोपी को रिमांड पर लेकर उससे पूछताछ की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क की जानकारी ली जा सके।
इसके अतिरिक्त, दोनों जिलों में 6 और संदिग्ध ठिकानों की पहचान की गई है, जहां अगली कार्रवाई की जाएगी।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
इस मामले ने उत्तराखंड की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर नकेल कसने में विफल रहने का आरोप लगाया है। वहीं, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ट्वीट कर कहा:
“राज्य में ड्रग्स और अपराध को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ड्रग माफियाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।”
नागरिकों से अपील
पुलिस प्रशासन ने जनता से अपील की है कि अगर उन्हें अपने आस-पास किसी प्रकार की संदिग्ध गतिविधियाँ दिखाई देती हैं, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें। युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के बारे में जागरूक किया जा रहा है और जल्द ही राज्यभर में नशा विरोधी अभियान चलाया जाएगा।
निष्कर्ष:
उत्तराखंड जैसे शांत पहाड़ी राज्य में इस प्रकार की ड्रग फैक्ट्री का भंडाफोड़ चिंताजनक है। यह घटना दर्शाती है कि अपराधी अब सीमावर्ती क्षेत्रों को अपना नया ठिकाना बना रहे हैं। पुलिस और नारकोटिक्स विभाग की तत्परता से यह गंभीर मामला सामने आया है, लेकिन सवाल यह है कि इतनी बड़ी साजिश लंबे समय तक कैसे चलती रही? अब देखना यह होगा कि जांच एजेंसियाँ इस ड्रग सिंडिकेट की जड़ों तक कैसे पहुंचती हैं।
रिपोर्ट: दैनिक प्रभातवाणी न्यूज डेस्क
स्रोत: पुलिस अधीक्षक कार्यालय, चंपावत-पिथौरागढ़ | नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो |