January 12, 2026

उत्तराखंड में बिजली दरों में वृद्धि: उपभोक्ताओं पर बढ़ा वित्तीय बोझ

उत्तराखंड में बिजली दरों में वृद्धि: उपभोक्ताओं पर बढ़ा वित्तीय बोझ
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देहरादून, 4 सितंबर 2025 (दैनिक प्रभातवाणी)

उत्तराखंड में बिजली उपभोक्ताओं के लिए एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। राज्य के ऊर्जा निगम ने सितंबर 2025 के लिए बिजली दरों में बढ़ोतरी की घोषणा की है। इस वृद्धि के अनुसार, दरें 8 पैसे से लेकर 33 पैसे प्रति यूनिट तक बढ़ाई गई हैं। इस बदलाव का असर लगभग 30 लाख उपभोक्ताओं पर पड़ेगा, जिसमें घरेलू, कृषि और औद्योगिक उपभोक्ता शामिल हैं।

ऊर्जा निगम के अधिकारियों के अनुसार, यह वृद्धि मुख्य रूप से विद्युत उत्पादन और वितरण लागत में आई वृद्धि के कारण आवश्यक हो गई थी। पिछले कुछ महीनों में कोयला और अन्य ऊर्जा स्रोतों की कीमतों में इजाफा हुआ है, जिससे निगम पर वित्तीय दबाव बढ़ा है।

घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बढ़ी हुई दरें
घरेलू उपभोक्ताओं के लिए यह बढ़ोतरी विशेष रूप से महंगी साबित हो सकती है। निगम की नई दरों के अनुसार 100 यूनिट तक के उपभोक्ताओं के लिए प्रति यूनिट 25 पैसे, 101 से 200 यूनिट तक के लिए 35 पैसे और 201 से 400 यूनिट तक के लिए 45 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है। वहीं, 400 यूनिट से अधिक की खपत वाले घरेलू उपभोक्ताओं को भी 45 पैसे प्रति यूनिट की अतिरिक्त राशि चुकानी होगी।

कृषि आधारित उपभोक्ताओं पर प्रभाव
कृषि आधारित उपभोक्ताओं, विशेषकर किसानों, के लिए बिजली दरों में वृद्धि की गई है। प्राइवेट ट्यूबवेल के लिए बिजली दर में 10 पैसे प्रति यूनिट और सामान्य कृषि उपयोग के लिए 13 से 15 पैसे प्रति यूनिट तक की वृद्धि की गई है। इस वृद्धि के कारण किसानों के उत्पादन लागत में भी इजाफा होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान अपनी बिजली खपत का प्रबंधन नहीं करते हैं, तो यह बढ़ी हुई दर उनकी आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।

औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए नई दरें
औद्योगिक क्षेत्र में भी बिजली दरों में वृद्धि लागू की गई है। एलटी और एचटी श्रेणी की इंडस्ट्री के लिए प्रति यूनिट 29 पैसे, मिक्सड लोड के लिए 27 पैसे और रेलवे उपभोक्ताओं के लिए 23 पैसे की वृद्धि की गई है। इसके अलावा, इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग स्टेशन और अन्य व्यावसायिक उपयोग के लिए भी दरों में इजाफा हुआ है।

सरकारी पहल और सुझाव
राज्य सरकार ने इस कदम को आवश्यक बताते हुए कहा कि यह बढ़ोतरी ऊर्जा निगम के वित्तीय संतुलन को बनाए रखने और राज्य में बिजली की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए जरूरी थी। हालांकि, उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि जरूरत पड़ने पर विशेष समूहों, जैसे किसानों और छोटे व्यवसायों, के लिए सब्सिडी और राहत योजना की पेशकश की जा सकती है।

विशेषज्ञों का सुझाव है कि उपभोक्ताओं को अपनी बिजली खपत की योजना बनानी होगी। बिजली की बचत के लिए समय पर उपकरणों का इस्तेमाल, ऊर्जा कुशल उपकरणों का चयन और अनावश्यक बिजली खपत पर नियंत्रण महत्वपूर्ण होगा। राज्य सरकार और ऊर्जा निगम ने यह भी कहा कि स्मार्ट मीटर का इस्तेमाल करके उपभोक्ता अपने खपत पैटर्न पर नजर रख सकते हैं और बढ़ी हुई दरों के प्रभाव को कम कर सकते हैं।

भविष्य पर असर
बिजली दरों में यह वृद्धि केवल उपभोक्ताओं के वित्तीय बोझ को बढ़ाने तक सीमित नहीं है। इससे राज्य की अर्थव्यवस्था और कृषि उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है। किसान अधिक खर्च के कारण उत्पादन में कटौती कर सकते हैं, जिससे फल और सब्जियों की कीमतों में इजाफा हो सकता है। वहीं, औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए उत्पादन लागत बढ़ने के कारण उनके उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी संभव है।

उपभोक्ताओं के लिए सुझाव दिया गया है कि वे बिजली की खपत को कम करने के उपाय अपनाएं और बढ़ी हुई दरों के प्रभाव को समझें। घरों में ऊर्जा बचत उपकरणों का इस्तेमाल, अनावश्यक लाइट और पंखे बंद करना, और सोलर ऊर्जा का विकल्प चुनना इस स्थिति से निपटने में मदद कर सकता है।

दैनिक प्रभातवाणी
उत्तराखंड में बिजली दरों में यह वृद्धि उपभोक्ताओं के लिए चुनौतीपूर्ण है, लेकिन इसे राज्य की ऊर्जा प्रणाली और दीर्घकालिक आपूर्ति स्थिरता के लिए आवश्यक कदम के रूप में देखा जा रहा है। उपभोक्ताओं को अपनी खपत पर नियंत्रण रखते हुए इस बदलाव के प्रभाव को कम करना होगा।