उत्तराखंड में सुरक्षा पर सवाल: रुड़की के पीरन कलियार में सामूहिक दुष्कर्म और मसूरी में अपहरण का प्रयास – समाज और कानून व्यवस्था पर गहरा संकट

दो घटनाओं ने हिला दिया उत्तराखंड
उत्तराखंड की शांत वादियों और धार्मिक आस्थाओं से जुड़े क्षेत्रों में हाल के दिनों में दो बड़ी आपराधिक घटनाएँ सामने आई हैं, जिन्होंने समाज और सुरक्षा व्यवस्था को गहराई से झकझोर दिया है। पहली घटना रुड़की के पीरन कलियार से जुड़ी है, जहाँ एक महिला के साथ परित्यक्त स्कूल भवन में पाँच युवकों ने सामूहिक बलात्कार की वारदात को अंजाम दिया। दूसरी घटना मसूरी में घटी, जहाँ उत्तर प्रदेश और पंजाब से आए बदमाशों ने एक युवती को अगवा करने की कोशिश की। ग्रामीणों की तत्परता और बहादुरी से अपहरण की कोशिश विफल हो गई, लेकिन आरोपियों ने बच निकलने के लिए गोली भी चलाई।
इन दोनों घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर उत्तराखंड, जिसे लोग पर्यटन, धर्म और शांति का प्रतीक मानते हैं, वहाँ महिलाएँ और बेटियाँ कितनी सुरक्षित हैं?
रुड़की का दर्दनाक मामला – पीरन कलियार का सन्नाटा तोड़ती चीखें
रुड़की के पीरन कलियार क्षेत्र, जो धार्मिक आस्था और दरगाह के लिए जाना जाता है, उस समय दहशत में आ गया जब यहाँ एक महिला के साथ परित्यक्त स्कूल में सामूहिक बलात्कार किया गया। जानकारी के अनुसार, महिला को बहला-फुसलाकर या दबाव बनाकर वहाँ ले जाया गया और पाँच युवकों ने बारी-बारी से उसकी अस्मिता लूटी। यह घटना न केवल एक महिला की गरिमा पर हमला है बल्कि पूरे समाज के लिए शर्मनाक है।
सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक अभी फरार है। पुलिस ने इस मामले को अपनी प्राथमिकता में रखा है और फरार आरोपी की तलाश में दबिश दी जा रही है। घटना ने पीरन कलियार क्षेत्र की छवि को भी धक्का पहुँचाया है, जो अब तक धार्मिक सहिष्णुता और शांति का केंद्र माना जाता रहा है।
पीड़िता की हालत और समाज की प्रतिक्रिया
पीड़िता को पुलिस संरक्षण में अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उसकी मेडिकल जाँच की गई। घटना से महिला और उसका परिवार मानसिक आघात से गुजर रहा है। आसपास के ग्रामीणों और धार्मिक संगठनों ने इस अपराध पर गहरा आक्रोश जताया है। लोगों का कहना है कि पवित्र जगह पर इस तरह की वारदात होना बेहद शर्मनाक है और आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
सोशल मीडिया पर भी यह मामला तेजी से फैल रहा है। लोग कानून व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं और मांग कर रहे हैं कि उत्तराखंड सरकार महिलाओं की सुरक्षा के लिए सख्त कदम उठाए।
मसूरी का दुस्साहस – जब गोली की आवाज से गूँज उठीं वादियाँ
दूसरी घटना मसूरी से आई, जहाँ उत्तर प्रदेश और पंजाब से आए बदमाशों ने एक युवती को अगवा करने की कोशिश की। घटना तब हुई जब आरोपी एक गाड़ी से पहुँचे और मौका पाते ही युवती को जबरन वाहन में बैठाने का प्रयास करने लगे।
जैसे ही युवती ने शोर मचाया, आसपास के ग्रामीण एकत्र हो गए और उन्होंने आरोपियों को घेर लिया। बदमाशों और ग्रामीणों के बीच झड़प हुई, जिसके बाद एक आरोपी ने डर के मारे गोली चला दी। गोली चलने से पूरे क्षेत्र में दहशत फैल गई, लेकिन सौभाग्य से कोई घायल नहीं हुआ। ग्रामीणों ने साहस दिखाते हुए आरोपियों को पकड़कर पुलिस को सौंप दिया।
ग्रामीणों की बहादुरी – समाज की ताकत का उदाहरण
मसूरी की घटना ने दिखा दिया कि समाज जब एकजुट होकर अपराध के खिलाफ खड़ा होता है तो अपराधी कितने भी हथियारबंद क्यों न हों, उनकी चाल विफल हो जाती है। ग्रामीणों की यह बहादुरी सराहनीय है। उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना बेटी की रक्षा की और अपराधियों को पुलिस के हवाले कर दिया।
लोगों का कहना है कि अगर ग्रामीण डर जाते तो आरोपी युवती को लेकर फरार हो जाते और फिर उसके साथ क्या होता, इसका अंदाजा लगाना भी भयावह है।
पुलिस की भूमिका और कार्रवाई
दोनों मामलों में पुलिस ने त्वरित कदम उठाए। रुड़की में चार आरोपियों की गिरफ्तारी हुई और मसूरी में भी आरोपियों को हिरासत में ले लिया गया। पुलिस का कहना है कि दोनों घटनाओं की जांच गंभीरता से की जा रही है और अपराधियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
हालाँकि, यह भी सच है कि इन घटनाओं ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर क्यों पुलिस की गश्त और निगरानी इतनी ढीली थी कि अपराधी इतनी बड़ी घटनाओं को अंजाम देने की हिम्मत कर पाए?
कानून-व्यवस्था पर उठते सवाल
उत्तराखंड में लगातार अपराध की घटनाएँ सामने आ रही हैं। चाहे वह रुड़की का सामूहिक दुष्कर्म हो या मसूरी का अपहरण प्रयास – दोनों ही घटनाएँ यह दर्शाती हैं कि अपराधी अब बेखौफ हो चुके हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ी राज्यों में अपराध का स्वरूप बदल रहा है। पहले यह क्षेत्र अपेक्षाकृत सुरक्षित माने जाते थे, लेकिन अब बाहरी राज्यों से आने वाले अपराधी यहाँ भी अपनी जड़ें जमाने की कोशिश कर रहे हैं। यह स्थिति आने वाले समय के लिए बेहद चिंताजनक है।
महिलाओं की सुरक्षा और समाज की जिम्मेदारी
महिलाओं के खिलाफ अपराध केवल कानून-व्यवस्था की नाकामी का नतीजा नहीं है, बल्कि यह समाज के भीतर छिपी बीमार मानसिकता का भी प्रतिबिंब है। पीरन कलियार की घटना यह बताती है कि अपराधी किसी भी जगह का उपयोग अपनी हवस मिटाने के लिए कर सकते हैं। वहीं, मसूरी की घटना यह दर्शाती है कि बेटियाँ आज भी अपहरण और शोषण के खतरे से जूझ रही हैं।
समाज को न केवल इन अपराधियों के खिलाफ आवाज उठानी होगी बल्कि बच्चों और युवाओं के भीतर नैतिक शिक्षा और सम्मान का भाव जगाना होगा।
राजनीतिक और प्रशासनिक प्रतिक्रियाएँ
घटनाओं के बाद राज्य सरकार और स्थानीय नेताओं ने नाराजगी जताई है। कई सामाजिक संगठनों ने पीड़िता के परिवार से मुलाकात की और न्याय की मांग की। विपक्षी दलों ने भी सरकार को घेरा और कहा कि उत्तराखंड जैसी शांत भूमि पर लगातार अपराध होना बेहद शर्मनाक है।
प्रशासन ने दोनों मामलों की जांच के लिए विशेष टीम गठित की है और आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
पर्यटन पर पड़ता असर
उत्तराखंड पर्यटन के लिए प्रसिद्ध है। मसूरी जैसे शहर में इस तरह की घटनाएँ राज्य की छवि को नुकसान पहुँचाती हैं। अगर पर्यटक असुरक्षित महसूस करेंगे तो पर्यटन उद्योग प्रभावित होगा, जिससे लाखों लोगों की आजीविका पर असर पड़ेगा।
दैनिक प्रभातवाणी : सवालों के घेरे में सुरक्षा तंत्र
रुड़की और मसूरी की घटनाएँ केवल अपराध नहीं हैं, ये पूरे समाज और शासन व्यवस्था के लिए चेतावनी हैं। ये घटनाएँ बताती हैं कि हमें सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने, पुलिस गश्त बढ़ाने और अपराधियों पर अंकुश लगाने की आवश्यकता है।
ग्रामीणों की बहादुरी और पीड़िता का साहस सराहनीय है, लेकिन जब तक कानून-व्यवस्था सख्त नहीं होगी, तब तक बेटियों की सुरक्षा अधूरी रहेगी। अब समय है कि समाज और शासन दोनों मिलकर यह सुनिश्चित करें कि उत्तराखंड की पहचान केवल उसकी खूबसूरती और धार्मिक आस्था तक सीमित न रहे, बल्कि यह भी कहलाए कि यहाँ महिलाएँ और बेटियाँ पूरी तरह सुरक्षित हैं।
✍️ रिपोर्ट : दैनिक प्रभातवाणी संवाददाता