January 15, 2026

एसएससी परीक्षा में नकल कराने की बड़ी साज़िश नाकाम, हल्द्वानी से नौ युवक गिरफ्तार – लाइब्रेरी की आड़ में चल रहा था ‘सॉल्वर’ नेटवर्क

एसएससी परीक्षा में नकल कराने की बड़ी साज़िश नाकाम, हल्द्वानी से नौ युवक गिरफ्तार – लाइब्रेरी की आड़ में चल रहा था 'सॉल्वर' नेटवर्क
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दैनिक प्रभातवाणी
दिनांक: 4 अगस्त 2025
स्थान: हल्द्वानी, उत्तराखंड


एसएससी परीक्षा में नकल कराने की बड़ी साज़िश नाकाम, हल्द्वानी से नौ युवक गिरफ्तार – लाइब्रेरी की आड़ में चल रहा था ‘सॉल्वर’ नेटवर्क

उत्तराखंड पुलिस ने हल्द्वानी में एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है जो देशभर की सबसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल एसएससी (Staff Selection Commission) परीक्षा में हाई-टेक तरीकों से नकल कराने की योजना पर काम कर रहा था। इस मामले में पुलिस ने 9 लोगों को गिरफ्तार किया है, जो पिछले एक वर्ष से भी अधिक समय से एक डिजिटल लाइब्रेरी की आड़ में नकल का नेटवर्क चला रहे थे

लाइब्रेरी नहीं, नकल का अड्डा

पुलिस जांच में यह सामने आया है कि वर्ष 2024 की शुरुआत में हल्द्वानी के एक भीड़भाड़ वाले इलाके में एक डिजिटल लाइब्रेरी किराये पर ली गई थी। नाम था – “ज्ञानकोश डिजिटल लाइब्रेरी”। लेकिन इसका उद्देश्य पढ़ाई का माहौल देना नहीं बल्कि सॉफ्टवेयर और तकनीकी उपकरणों की मदद से परीक्षा में नकल कराना था।

यह लाइब्रेरी एक तरह से नकल नेटवर्क का नियंत्रण केंद्र बन चुकी थी, जहां से देश के विभिन्न परीक्षा केंद्रों में बैठे छात्रों को निर्देश और उत्तर भेजे जाते थे।

नकल के लिए हाई-टेक जाल

गिरफ्तार युवकों के पास से कई लैपटॉप, मोबाइल, ब्लूटूथ डिवाइस, नकली पहचान पत्र और विशेष रिमोट सॉफ्टवेयर मिले हैं जिनमें “AnyDesk” और “Ammy Admin” जैसे टूल्स शामिल थे। इन सॉफ्टवेयर की मदद से वे परीक्षार्थियों के कंप्यूटर को दूर से कंट्रोल कर सकते थे।

कुछ मामलों में आरोपियों ने ‘सॉल्वर’ यानी ऐसे व्यक्ति की पहचान भी की थी जो परीक्षार्थी की जगह बैठ कर परीक्षा दे सके। इसके लिए ₹4 लाख तक की फीस वसूली जाती थी।

गैंग का नेटवर्क और पहचान

गिरफ्तार सभी युवक उत्तर प्रदेश, हरियाणा और उत्तराखंड के रहने वाले हैं। ये सभी आपस में पिछले कई वर्षों से संपर्क में थे और पहले खुद प्रतियोगी परीक्षाओं में असफल हो चुके थे। इसके बाद उन्होंने तकनीकी दक्षता का उपयोग कर इस अवैध कार्य को आय का जरिया बना लिया।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह गैंग हर महीने 10–15 छात्रों को ‘सेवा’ देता था और देशभर के विभिन्न शहरों में अपने एजेंटों के माध्यम से संपर्क करता था।

होटल में चल रहा था ‘एग्जाम ऑपरेशन’

पुलिस को जब इसकी भनक लगी, तब गैंग ने लाइब्रेरी छोड़कर हल्द्वानी के एक होटल में शिफ्ट हो कर अपना ‘ऑपरेशन सेंटर’ बना लिया था। लेकिन गुप्त सूचना के आधार पर छापा मारकर सभी आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया गया।

भविष्य बर्बाद कर रही ये साजिशें

ऐसे मामले उन लाखों युवाओं के लिए निराशा का कारण बनते हैं जो कड़ी मेहनत से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। हर बार नकल माफिया एक नया तरीका खोज लेते हैं और तकनीक का दुरुपयोग कर योग्य छात्रों के अवसर छीन लेते हैं।

कानूनी कार्रवाई और आगे की योजना

उत्तराखंड पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धोखाधड़ी, आईटी एक्ट और साजिश रचने की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। इस मामले की जांच के लिए एक विशेष तकनीकी टीम का गठन किया गया है जो इस बात की भी जांच करेगी कि कहीं ये नेटवर्क अन्य राज्यों तक तो नहीं फैला है।

प्रशासन की चेतावनी

नकल के इस मामले के उजागर होने के बाद प्रशासन ने परीक्षा केंद्रों और छात्रों को सतर्क रहने की सलाह दी है। परीक्षा बोर्ड को भी कहा गया है कि सिस्टम की सुरक्षा को और मजबूत किया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।


दैनिक प्रभातवाणी

शिक्षा व्यवस्था को खोखला करने वाली ऐसी योजनाएँ केवल नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि योग्यता और मेहनत पर एक प्रहार हैं। जब तक नकल को सामाजिक अपराध नहीं माना जाएगा, ऐसे रैकेट समय-समय पर पनपते रहेंगे। आवश्यक है कि प्रशासनिक व्यवस्था, तकनीकी सुरक्षा और सामाजिक चेतना—तीनों को मिलाकर इन प्रयासों को जड़ से खत्म किया जाए