त्रिवेणी घाट पर गंगा आरती जारी रहेगी, हाईकोर्ट ने सख्त शर्तों के साथ दी अंतरिम राहत

ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट पर गंगा आरती का दृश्य। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पर्यावरण संरक्षण और शुल्क वसूली पर रोक जैसी शर्तों के साथ आरती जारी रखने की अंतरिम अनुमति दी है।
दैनिक प्रभातवाणी | 17 जनवरी 2026 | नैनीताल
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने ऋषिकेश स्थित पवित्र त्रिवेणी घाट पर गंगा आरती को जारी रखने की अंतरिम अनुमति दे दी है। हालांकि अदालत ने यह स्पष्ट किया है कि आरती केवल निर्धारित नियमों और कड़े पर्यावरणीय मानकों के तहत ही आयोजित की जा सकेगी। न्यायालय ने कहा कि धार्मिक आस्था का सम्मान आवश्यक है, लेकिन पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक हित से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से निर्देश दिया है कि गंगा आरती के आयोजन के दौरान नदी में किसी भी प्रकार की गंदगी, सामग्री या पूजन-सामग्री प्रवाहित नहीं की जाएगी। साथ ही घाट क्षेत्र में प्लास्टिक के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। अदालत ने यह भी कहा कि श्रद्धालुओं से किसी भी तरह का शुल्क या चंदा वसूलना प्रतिबंधित रहेगा।
न्यायालय के अनुसार, गंगा आरती उत्तराखंड की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन यदि यह परंपरा पर्यावरण को नुकसान पहुँचाती है या व्यावसायिक स्वरूप ले लेती है, तो यह स्वीकार्य नहीं होगा। अदालत ने प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि वे आरती के दौरान निरंतर निगरानी रखें और नियमों के उल्लंघन पर तुरंत कार्रवाई करें।
मामले की सुनवाई के दौरान यह तर्क सामने आया कि त्रिवेणी घाट पर होने वाली गंगा आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु एकत्र होते हैं, जिससे घाट पर भीड़, कचरा और प्रदूषण की समस्या बढ़ जाती है। इस पर अदालत ने कहा कि भीड़ प्रबंधन और स्वच्छता की पूरी जिम्मेदारी आयोजकों और स्थानीय प्रशासन की होगी।
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आरती के नाम पर किसी निजी संस्था या व्यक्ति द्वारा आर्थिक लाभ नहीं कमाया जा सकता। यदि भविष्य में शुल्क वसूली या पर्यावरण नियमों के उल्लंघन की शिकायत सामने आती है, तो अनुमति को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जा सकता है।
इस आदेश के बाद स्थानीय प्रशासन ने घाट क्षेत्र में अतिरिक्त सफाई व्यवस्था, सुरक्षा कर्मियों की तैनाती और निगरानी कैमरों की व्यवस्था शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि अदालत के निर्देशों का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने हाईकोर्ट के इस फैसले को संतुलित बताया है। उनका कहना है कि इससे एक ओर धार्मिक परंपरा सुरक्षित रहेगी, वहीं दूसरी ओर गंगा नदी की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण भी सुनिश्चित होगा।
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख तय करते हुए यह संकेत दिया है कि भविष्य में स्थायी व्यवस्था को लेकर और भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं। तब तक के लिए गंगा आरती को शर्तों के साथ जारी रखने की अनुमति दी गई है।