January 11, 2026

धोखेबाज बाबाओं के खिलाफ चला “Operation Kalanemi”, सीएम धामी ने दिया कड़ा संदेश

धोखेबाज बाबाओं के खिलाफ चला "ऑपरेशन कालनेमि", सीएम धामी ने दिया कड़ा संदेश
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दैनिक प्रभातवाणी | विशेष रिपोर्ट
धोखेबाज बाबाओं के खिलाफ चला “ऑपरेशन कालनेमि”, सीएम धामी ने दिया कड़ा संदेश

हरिद्वार/देहरादून, 10 जुलाई:
उत्तराखंड में धर्म के नाम पर जनता को गुमराह करने वाले फर्जी साधु-संतों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने “ऑपरेशन कालनेमि” की शुरुआत कर दी है। इस विशेष अभियान का उद्देश्य ऐसे कथित बाबाओं की पहचान करना है जो संत की वेशभूषा में समाज को ठगने और लोगों की आस्था से खिलवाड़ करने का काम कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट किया कि यह अभियान केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं की रक्षा करने के लिए भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड, विशेषकर हरिद्वार जैसे तीर्थस्थलों पर देश-विदेश से श्रद्धालु बड़ी संख्या में आते हैं, ऐसे में अगर कोई नकली साधु उन्हें धोखा देता है, तो राज्य की छवि और संत परंपरा दोनों को ठेस पहुँचती है।


अभियान का नाम – “ऑपरेशन कालनेमि” क्यों?

इस विशेष मुहिम का नाम “कालनेमि” रामायण के एक पात्र से लिया गया है। कालनेमि एक राक्षस था जो संत का भेष धारण कर हनुमान जी को धोखा देने का प्रयास करता है। इसी पौराणिक पात्र से प्रेरणा लेते हुए यह नाम रखा गया है, जिससे यह साफ संदेश जाए कि नकली साधु चाहे जैसा भी भेष धारण करें, वे कानून की पकड़ से नहीं बच पाएंगे।


किन क्षेत्रों में चलाया जा रहा है यह अभियान?

अभियान की शुरुआत हरिद्वार जिले से की गई है, जहां हर वर्ष करोड़ों श्रद्धालु आते हैं। इसके अतिरिक्त, ऋषिकेश, देवप्रयाग, बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों को भी इस अभियान के अंतर्गत लाया गया है।

धार्मिक स्थलों पर तैनात स्थानीय पुलिस, इंटेलिजेंस यूनिट और धर्मनगरी की विशेष सतर्कता शाखाएं नकली साधुओं पर नज़र बनाए हुए हैं।


 अब तक क्या कार्रवाई हुई?

अब तक पुलिस द्वारा करीब एक दर्जन से अधिक ऐसे फर्जी साधुओं की पहचान की जा चुकी है, जिनका आपराधिक इतिहास रहा है या जो साधु के भेष में अवैध गतिविधियों में लिप्त पाए गए हैं। इनमें कुछ लोग ड्रग्स, ठगी, और महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार जैसे मामलों में संलिप्त पाए गए हैं।

कुछ मामलों में आधार कार्ड, पंजीकरण और पूर्व अपराधों की छानबीन के आधार पर गिरफ्तारियां भी की गई हैं।


 मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश:

सीएम धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस अभियान में कोई ढील नहीं बरती जाए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जो असली संत हैं, उनकी प्रतिष्ठा बनाए रखना और उन्हें सहयोग देना राज्य सरकार की प्राथमिकता है।

धामी ने जनता से भी अपील की है कि यदि किसी को किसी भी संदिग्ध साधु की जानकारी है, तो वे 100 या स्थानीय थाने पर तुरंत सूचना दें। उन्होंने यह भी कहा कि “धर्म की रक्षा करने के लिए हमें धर्म के नाम पर धोखा देने वालों को उजागर करना ही होगा।”


 संत समाज ने किया स्वागत

उत्तराखंड के प्रतिष्ठित संत-महात्माओं और अखाड़ा परिषद ने इस कदम का स्वागत किया है। उनका मानना है कि इस अभियान से असली संतों की प्रतिष्ठा को ठगों से बचाया जा सकेगा और समाज में सच्चे संतों का सम्मान बढ़ेगा।

हरिद्वार स्थित श्री पंचायती अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी महेशानंद गिरी ने कहा –
“हम मुख्यमंत्री जी के इस प्रयास की सराहना करते हैं। कई वर्षों से हम ऐसे ढोंगी बाबाओं से परेशान थे जो हमारे बीच रहकर हमारी ही छवि को खराब कर रहे थे। अब समय आ गया है कि उन्हें बेनकाब किया जाए।”


 तकनीक और आधुनिक जांच प्रणाली का उपयोग

पुलिस प्रशासन अब फर्जी साधुओं की जांच में आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर रहा है। फेस रिकग्निशन कैमरे, आधार वेरिफिकेशन सिस्टम, और CCTV निगरानी जैसे उपायों से संदिग्ध व्यक्तियों पर निगरानी रखी जा रही है।

इसके अलावा, धर्म स्थलों पर स्थायी वेरिफिकेशन कैम्प भी लगाए जाएंगे, जहां सभी साधु-संतों का पंजीकरण और सत्यापन किया जाएगा।


✍ दैनिक प्रभातवाणी

“ऑपरेशन कालनेमि” उत्तराखंड सरकार का एक साहसिक और निर्णायक कदम है, जो धर्म और कानून दोनों की रक्षा करता है। इससे न सिर्फ सच्चे संतों का सम्मान बढ़ेगा, बल्कि उन ठगों पर लगाम लगेगी जो धर्म के नाम पर अपराध कर रहे हैं। यह अभियान आने वाले समय में एक मिसाल के रूप में देखा जाएगा – न सिर्फ उत्तराखंड के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए।