February 28, 2026

नंदा राजजात यात्रा 2026 की तैयारी तेज, मुख्यमंत्री धामी ने दिए कड़े निर्देश

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दैनिक प्रभातवाणी | देहरादून | 6 दिसंबर 2025

उत्तराखंड की सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहरों में सबसे महत्वपूर्ण मानी जाने वाली नंदा राजजात यात्रा 2026 में आयोजित होने जा रही है। इसे अक्सर ‘हिमालय का महाकुंभ’ कहा जाता है, क्योंकि यह यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं बल्कि उत्तराखंड की लोक परंपरा, संस्कृति और सामाजिक आस्था का विराट उत्सव है। हर बारह साल में होने वाली इस यात्रा के आयोजन को लेकर राज्य सरकार ने अपनी तैयारियाँ तेज कर दी हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिवालय में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक

मुख्यमंत्री धामी ने अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में यात्रा मार्गों की व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं, सुरक्षा बलों की तैनाती, यातायात नियंत्रण और स्वच्छता प्रबंधन जैसे बिंदुओं पर विशेष चर्चा की। उन्होंने कहा कि इस यात्रा में उत्तराखंड ही नहीं बल्कि देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं, इसलिए राज्य सरकार का दायित्व है कि उन्हें हर स्तर पर सहयोग मिले। मुख्यमंत्री ने कहा कि “नंदा राजजात यात्रा उत्तराखंड की पहचान है। यह यात्रा हमारी आस्था और संस्कृति का प्रतीक है। श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए हमें अभी से पूरी तैयारी करनी होगी।”

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए निर्देश

मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि यात्रा मार्ग पर पर्याप्त पेयजल व्यवस्था, विश्राम स्थलों, और खाद्य आपूर्ति केंद्रों की व्यवस्था की जाए। साथ ही, एक हेल्पलाइन नंबर जारी करने की भी तैयारी की जा रही है, ताकि किसी भी स्थिति में श्रद्धालु तुरंत प्रशासन से सहायता प्राप्त कर सकें।

स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष ध्यान

यात्रा मार्ग कठिन पहाड़ी इलाकों से होकर गुजरता है। ऐसे में स्वास्थ्य सेवाएँ सुनिश्चित करना सबसे बड़ी चुनौती है। मुख्यमंत्री धामी ने अधिकारियों से कहा कि मार्ग के विभिन्न पड़ावों पर मोबाइल मेडिकल यूनिट्स, आपातकालीन एम्बुलेंस, और अस्थायी अस्पतालों की व्यवस्था की जाए। स्वास्थ्य विभाग को यह भी निर्देश दिए गए कि यात्रा में शामिल डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की विशेष टीम तैनात की जाए।

सुरक्षा और यातायात प्रबंधन

इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन से सुरक्षा और यातायात प्रबंधन सबसे अहम मुद्दा है। मुख्यमंत्री ने पुलिस विभाग और आपदा प्रबंधन टीम को हर स्तर पर तैयार रहने के निर्देश दिए। भीड़ नियंत्रण के लिए संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर ली गई है। यातायात व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए पार्किंग स्थलों का निर्माण, वैकल्पिक मार्गों का निर्धारण और ट्रैफिक पुलिस की अतिरिक्त तैनाती की जाएगी।

सफाई और पर्यावरण संरक्षण

नंदा राजजात यात्रा के दौरान पर्यावरण और स्वच्छता की विशेष जिम्मेदारी भी सरकार पर है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध लागू किया जाएगा और यात्रा मार्गों पर सफाई कर्मियों की तैनाती सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह यात्रा हमारी प्राकृतिक धरोहर के बीच होती है, इसलिए पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।

यात्रा का सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व

नंदा राजजात यात्रा देवी नंदा देवी की पूजा-अर्चना से जुड़ी है। माना जाता है कि नंदा देवी हिमालय की बेटी हैं और यह यात्रा उनके मायके से विदाई का प्रतीक है। यह यात्रा चमोली जिले के नंदकेसरी और कुरुड़ से शुरू होकर हिमालय की कठिन घाटियों और ऊँचाईयों से गुजरती है। इसमें करीब तीन सप्ताह का समय लगता है और श्रद्धालु देवी की डोली के साथ पैदल चलते हुए हिमालय की ऊँचाईयों तक पहुँचते हैं।

इस यात्रा के दौरान न केवल धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं, बल्कि उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, लोकनृत्य, गीत और पारंपरिक परिधान भी देखने को मिलते हैं। यही कारण है कि इसे उत्तराखंड का ‘हिमालयन कुम्भ’ कहा जाता है।

पर्यटन और आर्थिक दृष्टि से महत्व

नंदा राजजात यात्रा का आयोजन पर्यटन और आर्थिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। हर बार जब यह यात्रा होती है तो देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक उत्तराखंड आते हैं। इससे स्थानीय व्यापार, होटल उद्योग, परिवहन सेवाएँ और हस्तशिल्प को भी बढ़ावा मिलता है। मुख्यमंत्री धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस अवसर पर उत्तराखंड की संस्कृति और पर्यटन को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत किया जाए।

मुख्यमंत्री का संदेश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा – “नंदा राजजात यात्रा 2026 उत्तराखंड की आस्था और संस्कृति का विराट पर्व है। हमें इसे भव्य, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करना होगा। श्रद्धालुओं की सुविधा, स्वास्थ्य और सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। इस यात्रा से न केवल उत्तराखंड की पहचान मजबूत होगी, बल्कि यह राज्य की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपरा को भी नई ऊँचाइयों पर ले जाएगी।”