January 15, 2026

बर्ड फ्लू की रोकथाम के लिए प्रशासन सख्त, पर बाहरी जिलों से जारी है मुर्गी और अंडों की आपूर्ति

बर्ड फ्लू की रोकथाम के लिए प्रशासन सख्त, पर बाहरी जिलों से जारी है मुर्गी और अंडों की आपूर्ति
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देहरादून, 12 सितंबर 2025

देहरादून। उत्तराखंड में बर्ड फ्लू की रोकथाम के लिए प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। स्वास्थ्य विभाग और पशुपालन विभाग की ओर से पोल्ट्री व्यवसाय पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। सरकार ने आदेश जारी कर बाहरी जिलों से मुर्गी और अंडों की सप्लाई पर अस्थायी रोक लगा दी है। इसके बावजूद कई व्यापारी चोरी-छिपे व्यापार को जारी रखे हुए हैं, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा कम नहीं हुआ है। प्रशासन की ओर से बार-बार चेतावनी देने के बावजूद इस तरह की गतिविधियाँ लगातार सामने आ रही हैं, जो गंभीर चिंता का विषय बन गई हैं।

पिछले कुछ दिनों से राज्य के कई हिस्सों में मृत पक्षियों की संख्या बढ़ी है, जिसके बाद बर्ड फ्लू संक्रमण की आशंका को देखते हुए आपात बैठक बुलाकर रोकथाम के लिए जरूरी आदेश जारी किए गए। पशुपालन विभाग ने स्पष्ट किया है कि जब तक पूरी तरह से स्थिति सामान्य नहीं हो जाती, तब तक राज्य में बाहरी सप्लाई पर रोक जारी रहेगी। इसके लिए सीमा क्षेत्रों पर चेकिंग बढ़ा दी गई है और पशु चिकित्सकों की टीम को सतर्क कर दिया गया है।

प्रशासन का कहना है कि रोक के पीछे मुख्य उद्देश्य है कि संक्रमित जिलों से राज्य में पोल्ट्री प्रोडक्ट न आ सकें। बर्ड फ्लू का वायरस बेहद तेजी से फैलता है और अगर एक बार किसी जिले की पोल्ट्री फार्म में संक्रमण पहुंच गया तो इसे रोकना बेहद मुश्किल हो जाएगा। यही कारण है कि राज्य सरकार ने आपूर्ति पर प्रतिबंध लगाया है। हालांकि, व्यापारियों का कहना है कि अचानक रोक से उनकी आजीविका प्रभावित हुई है और वे आर्थिक नुकसान झेल रहे हैं।

वहीं, होटल और रेस्तरां व्यवसाय पर भी इसका गहरा असर दिखाई देने लगा है। चिकन आधारित व्यंजन परोसने वाले रेस्टोरेंट अब या तो मेन्यू बदल रहे हैं या फिर महंगे दामों पर सीमित मात्रा में उपलब्ध करा रहे हैं। आम उपभोक्ताओं को भी बढ़ती कीमतों और कमी का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी ओर, स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि यह कदम जनता की सुरक्षा के लिए उठाया गया है और सभी से अपील की गई है कि अफवाहों से दूर रहें और केवल प्रशासनिक निर्देशों का पालन करें।

पशुपालन विभाग की ओर से यह भी बताया गया कि बर्ड फ्लू केवल पक्षियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर इंसानों पर भी पड़ सकता है। अगर कोई व्यक्ति संक्रमित पक्षी के संपर्क में आता है या अधपका मांस खाता है तो वह बीमारी की चपेट में आ सकता है। यही कारण है कि सरकार ने विशेष गाइडलाइन जारी की है जिसमें स्पष्ट निर्देश हैं कि इस समय किसी भी प्रकार का पोल्ट्री प्रोडक्ट बाहर से न मंगवाया जाए।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जनता से आग्रह किया है कि वे पूरी तरह पका हुआ भोजन करें, अंडों को अच्छी तरह उबालकर ही खाएं और किसी भी बीमार पक्षी या मृत पक्षी के संपर्क में आने से बचें। इसके अलावा, पोल्ट्री फार्म संचालकों को भी अपने-अपने क्षेत्र में नियमित रूप से सैनिटाइजेशन करने और पक्षियों की स्वास्थ्य जांच कराने के लिए कहा गया है।

हालांकि, प्रशासन के सख्त निर्देशों के बावजूद यह भी सामने आया है कि कुछ व्यापारी गुपचुप तरीके से बाहरी जिलों से सप्लाई कर रहे हैं। कई ट्रकों को सीमावर्ती इलाकों में पकड़ा भी गया है, लेकिन रोक-टोक के बावजूद पूरी तरह से इसे थामना मुश्किल साबित हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ऐसी स्थिति बनी रही तो संक्रमण का खतरा और बढ़ सकता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को और सख्ती दिखानी होगी, ताकि कोई भी व्यापारी इस तरह की मनमानी न कर सके। वहीं, पोल्ट्री व्यवसाय से जुड़े लोग सरकार से आर्थिक मदद की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि रोक की वजह से वे भारी नुकसान में हैं और अगर राहत नहीं दी गई तो उनका कारोबार पूरी तरह चौपट हो जाएगा।

राज्य सरकार ने आश्वासन दिया है कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी और उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही, जनता से सहयोग की अपील की गई है। विशेषज्ञों ने यह भी चेताया है कि बर्ड फ्लू के मामलों को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। अगर इसे समय रहते नहीं रोका गया तो यह महामारी का रूप ले सकता है।

भविष्य की चुनौतियों पर नजर डालें तो साफ है कि प्रशासन को न केवल रोकथाम के लिए निगरानी बढ़ानी होगी, बल्कि व्यापारियों और पोल्ट्री फार्म संचालकों को भी भरोसे में लेना होगा। जनता को जागरूक किए बिना इस समस्या का समाधान मुश्किल है। बर्ड फ्लू जैसी संक्रामक बीमारी से लड़ने के लिए जरूरी है कि समाज का हर वर्ग अपनी जिम्मेदारी निभाए।

अभी फिलहाल राज्य में बर्ड फ्लू का असर सीमित स्तर पर है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बाहरी जिलों से सप्लाई पूरी तरह बंद नहीं हुई तो खतरा टल नहीं पाएगा। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि प्रशासन कितनी सख्ती से अपने आदेशों को लागू करा पाता है और जनता इस दिशा में कितनी जिम्मेदारी दिखाती है।