हरिद्वार के अवैध मदरसों पर उत्तराखंड हाईकोर्ट का कड़ा रुख: 79 मदरसों को बंद करने का आदेश

दैनिक प्रभातवाणी
हरिद्वार विशेष रिपोर्ट | 30 जुलाई 2025
हरिद्वार के अवैध मदरसों पर उत्तराखंड हाईकोर्ट का कड़ा रुख: 79 मदरसों को बंद करने का आदेश
नैनीताल/हरिद्वार – उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए हरिद्वार जिले में संचालित 79 अवैध मदरसों को तत्काल प्रभाव से बंद करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जब तक इन मदरसों का प्राधिकृत पंजीकरण नहीं होता, तब तक इन संस्थानों में कोई भी धार्मिक या शैक्षणिक गतिविधि नहीं चलाई जाएगी।
यह फैसला राज्य में शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और धार्मिक संस्थानों के पंजीकरण नियमों को लेकर एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
क्या कहा हाईकोर्ट ने?
उत्तराखंड हाईकोर्ट की खंडपीठ ने यह आदेश एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसमें कहा गया था कि हरिद्वार जिले में दर्जनों मदरसे बिना किसी वैध दस्तावेज, अनुमति या पंजीकरण के चलाए जा रहे हैं।
कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि:
79 मदरसों को बंद किया जाए, जब तक उनका पंजीकरण वैध रूप से न हो जाए।
सभी मदरसा संचालक एक शपथपत्र प्रस्तुत करें, जिसमें यह स्पष्ट हो कि वे किसी प्रकार की धार्मिक या शैक्षिक गतिविधि तब तक नहीं चलाएंगे, जब तक उनका पंजीकरण पूर्ण नहीं हो जाता।
राज्य सरकार मदरसे संचालकों की पृष्ठभूमि की भी जाँच करे, और सुनिश्चित करे कि उनकी गतिविधियाँ राष्ट्र विरोधी या विधि-विरुद्ध न हों।
मदरसे क्यों आए सवालों के घेरे में?
राज्य सरकार और शिक्षा विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, हरिद्वार जिले में बड़ी संख्या में मदरसे बिना किसी मान्यता, भवन स्वीकृति या शिक्षक पंजीकरण के चल रहे थे। इनमें से कई संस्थान ऐसे थे जिनके पास न तो स्थायी भवन था और न ही योग्य शिक्षक।
इसके अतिरिक्त, खुफिया एजेंसियों द्वारा यह संकेत भी दिए गए थे कि कुछ संस्थानों की वित्तीय पारदर्शिता संदिग्ध है और विदेशी फंडिंग की भी जाँच चल रही है।
राज्य सरकार की प्रतिक्रिया
उत्तराखंड सरकार ने कोर्ट के आदेश का स्वागत करते हुए कहा है कि राज्य में सभी शैक्षणिक और धार्मिक संस्थानों को कानून के अनुसार ही संचालित होना चाहिए। शिक्षा मंत्री ने बताया कि:
“यह निर्णय किसी धर्म विशेष के विरुद्ध नहीं है, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता और पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए है। सभी संस्थाओं को समान नियमों का पालन करना होगा।”
मदरसा बोर्ड की ओर से आपत्ति
वहीं, राज्य मदरसा बोर्ड और कुछ मुस्लिम संगठनों ने इस आदेश पर चिंता जताते हुए कहा कि कई छोटे-छोटे मदरसे गरीब बच्चों की शिक्षा का एकमात्र माध्यम हैं।
मौलाना ताहिर काज़मी, मदरसा संगठनों के वरिष्ठ प्रतिनिधि ने कहा:
“हमें पंजीकरण की प्रक्रिया में सहयोग की अपेक्षा है, परंतु अचानक बंदी से सैकड़ों बच्चों की पढ़ाई रुक सकती है। हम कोर्ट के आदेश का पालन करेंगे और सभी दस्तावेज समय पर जमा करेंगे।”
अगले कदम क्या होंगे?
राज्य सरकार द्वारा एक विशेष सर्वे टीम गठित की जा रही है जो जिलेभर में सभी धार्मिक/शैक्षणिक संस्थाओं की वैधता की जाँच करेगी।
जिन मदरसों ने अभी तक फॉर्मल पंजीकरण नहीं कराया है, उन्हें निर्धारित समयसीमा में दस्तावेज जमा करने होंगे।
अगर कोई संस्था आदेश का उल्लंघन करती पाई जाती है तो उस पर दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी।
पृष्ठभूमि और आंकड़े
हरिद्वार जिले में वर्तमान में 150 से अधिक मदरसे संचालित हैं, जिनमें से लगभग 79 मदरसों का पंजीकरण रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं है।
इन संस्थाओं में करीब 5000 से अधिक बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं, जिनमें अधिकांश गरीब और वंचित तबके से आते हैं।
न्याय बनाम धार्मिक शिक्षा: संतुलन की चुनौती
कोर्ट का यह फैसला उन लोगों के लिए भी एक संकेत है जो धार्मिक भावनाओं की आड़ में शिक्षा के बुनियादी मानकों को नजरअंदाज करते हैं।
यह स्पष्ट कर दिया गया है कि शिक्षा का अधिकार सभी का है, लेकिन शिक्षा की प्रणाली अनुशासन, पारदर्शिता और संविधान के अनुसार होनी चाहिए।
दैनिक प्रभातवाणी
उत्तराखंड हाईकोर्ट का यह फैसला राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता और संस्थागत पारदर्शिता को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले समय में यह अन्य धार्मिक शिक्षा संस्थानों के लिए भी एक मिसाल बनेगा कि कानून से ऊपर कोई संस्था नहीं हो सकती, चाहे वह किसी भी धार्मिक पृष्ठभूमि की क्यों न हो।
रिपोर्ट – दैनिक प्रभातवाणी ब्यूरो, हरिद्वार/नैनीताल
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