March 2, 2026

बिजली दरों में बदलाव का प्रस्ताव, 1 अप्रैल 2026 से नई दरें लागू करने की तैयारी

उत्तराखंड में बिजली दरों में प्रस्तावित बढ़ोतरी को दर्शाता बिजली मीटर और ट्रांसमिशन लाइन का दृश्य

Image Caption (कैप्शन): उत्तराखंड में प्रस्तावित नई बिजली दरों को लेकर 1 अप्रैल 2026 से पहले चार शहरों में जनसुनवाई होगी

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देहरादून, दैनिक प्रभातवाणी
गुरुवार, 22 जनवरी 2026

उत्तराखंड में बिजली उपभोक्ताओं को जल्द ही नई बिजली दरों का सामना करना पड़ सकता है। प्रदेश में एक अप्रैल 2026 से नई बिजली दरें लागू करने का प्रस्ताव रखा गया है, जिसे लेकर उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने जनसुनवाई की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर ली है। इस प्रस्ताव पर उपभोक्ताओं और अन्य हितधारकों की राय जानने के लिए राज्य के चार प्रमुख शहरों में सार्वजनिक सुनवाई आयोजित की जाएगी।

नियामक आयोग की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, जनसुनवाई 18 फरवरी 2026 से शुरू होगी। इस बार गढ़वाल मंडल और कुमाऊं मंडल के दो-दो शहरों को जनसुनवाई के लिए चुना गया है। गढ़वाल मंडल में देहरादून और कर्णप्रयाग में सुनवाई होगी, जबकि कुमाऊं मंडल में रुद्रपुर और मुनस्यारी में उपभोक्ताओं को अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा। इससे पहले पिछले वर्ष गढ़वाल मंडल में देहरादून और गोपेश्वर तथा कुमाऊं मंडल में रुद्रपुर और लोहाघाट में जनसुनवाई आयोजित की गई थी।

इस वर्ष प्रदेश के तीनों ऊर्जा निगमों की ओर से कुल मिलाकर करीब 18.50 प्रतिशत तक बिजली दरों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव नियामक आयोग के समक्ष रखा गया है। जानकारी के अनुसार उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) ने 16.23 प्रतिशत की बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया है, जबकि पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) की ओर से लगभग तीन प्रतिशत वृद्धि का सुझाव दिया गया है। वहीं, पहली बार उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनएल) ने माइनस 1.2 प्रतिशत का टैरिफ प्रस्ताव प्रस्तुत किया है, जिसे उपभोक्ताओं के लिए कुछ राहत के रूप में देखा जा रहा है।

नियामक आयोग ने इन सभी टैरिफ याचिकाओं पर उपभोक्ताओं, औद्योगिक इकाइयों, व्यापारिक संगठनों और अन्य हितधारकों से सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं। आयोग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि इच्छुक उपभोक्ता 31 जनवरी 2026 तक अपने सुझाव और आपत्तियां लिखित रूप में आयोग को भेज सकते हैं। जनसुनवाई के दौरान भी उपभोक्ताओं को अपनी बात सीधे रखने का अवसर मिलेगा।

ऊर्जा निगमों का तर्क है कि बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण की लागत में लगातार वृद्धि हो रही है, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति पर दबाव पड़ रहा है। वहीं, उपभोक्ता संगठनों का कहना है कि पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे आम लोगों पर बिजली दरों में बढ़ोतरी का अतिरिक्त बोझ नहीं डाला जाना चाहिए। ऐसे में जनसुनवाई को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसी के आधार पर आयोग अंतिम निर्णय लेगा।

उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने संकेत दिए हैं कि सभी पक्षों की दलीलें सुनने और सुझावों पर विचार करने के बाद ही अंतिम बिजली दरें तय की जाएंगी। यदि प्रस्तावित प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी होती है, तो संशोधित बिजली दरें 1 अप्रैल 2026 से पूरे प्रदेश में लागू कर दी जाएंगी।