सऊदी अरब में एक ही दिन में 8 फांसी: विदेशी नागरिकों पर न्याय प्रणाली का शिकंजा या अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों की अनदेखी?
ajaysemalty98 August 3, 2025
सऊदी अरब में एक ही दिन में 8 फांसी: विदेशी नागरिकों पर न्याय प्रणाली का शिकंजा या अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों की अनदेखी?
दैनिक प्रभातवाणी | 3 अगस्त 2025 | विशेष रिपोर्ट
रियाद, सऊदी अरब — दुनिया के सबसे सख्त और रहस्यमयी न्याय प्रणालियों में शुमार सऊदी अरब ने एक बार फिर अपनी फांसी की नीतियों से वैश्विक मानवाधिकार समुदाय को झकझोर कर रख दिया है। शनिवार, 3 अगस्त 2025 को, इस इस्लामिक राष्ट्र ने एक ही दिन में 8 लोगों को फांसी दी — जिनमें से 6 विदेशी नागरिक थे। यह घटना केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है; यह उस गहरे मानवाधिकार संकट का हिस्सा है, जो पिछले कुछ वर्षों से सऊदी अरब की न्याय प्रणाली की धुंधली गलियों में पल रहा है।
इन 8 लोगों में चार सोमाली, तीन इथियोपियाई नागरिक, और एक स्थानीय सऊदी नागरिक शामिल था। फांसी दिए गए विदेशी नागरिकों पर मुख्य आरोप था – ड्रग तस्करी, जबकि सऊदी नागरिक पर अपनी माँ की हत्या का आरोप सिद्ध हुआ था।
इस घटना के बाद मानवाधिकार संगठनों में हलचल मच गई है और एक बार फिर यह सवाल उठ खड़ा हुआ है — क्या सऊदी अरब की मृत्युदंड प्रणाली निष्पक्ष, पारदर्शी और मानवीय है?
फांसी की परंपरा और बदलते चेहरे
सऊदी अरब की न्याय प्रणाली इस्लामी शरिया क़ानून पर आधारित है, जो अपने कठोर दंड और धार्मिक आदेशों के पालन के लिए जाना जाता है। देश में वर्षों से अपराधों के लिए फांसी देना आम बात रही है, लेकिन हाल के वर्षों में यह प्रवृत्ति और तेज हुई है।
2025 की शुरुआत से अब तक, अमनेस्टी इंटरनेशनल और अन्य मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, 230 से अधिक लोगों को फांसी दी जा चुकी है, जिनमें से 150 से अधिक लोग ड्रग तस्करी से संबंधित मामलों में मारे गए। वर्ष 2024 में सऊदी अरब ने 345 लोगों को फांसी दी थी — जो वैश्विक स्तर पर सबसे ज़्यादा था।
यहाँ तक कि एक समय सऊदी अरब ने ड्रग अपराधों पर फांसी देने की प्रक्रिया को कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया था, लेकिन 2022 के अंत में यह अस्थायी राहत समाप्त हो गई, और तब से लेकर अब तक फांसी की दर में बेतहाशा वृद्धि हुई है।
विदेशियों के लिए खासतौर पर सख्ती?
हालिया मामलों में यह विशेष बात सामने आ रही है कि जिन लोगों को मौत की सजा दी जा रही है, उनमें विदेशी नागरिकों की संख्या अत्यधिक अधिक है। सोमालिया, इथियोपिया, पाकिस्तान, फिलीपींस, बांग्लादेश और भारत जैसे देशों के नागरिक सऊदी जेलों में कैद हैं और कई की जान फांसी की कतार में है।
इस बार जिन विदेशी नागरिकों को फांसी दी गई, वे बेहद गरीब पृष्ठभूमि से आते थे और अनेक रिपोर्टों में बताया गया है कि उनमें से कई को सऊदी अरब में नौकरियों का झांसा देकर बुलाया गया था। नौकरी के बदले उनके हाथों में एक बैग थमा दिया गया, जो बाद में ड्रग निकला।
अधिकांश ने यह आरोप लगाया कि उनसे जबरन कबूलनामे लिए गए और उन्हें कोई वकील या अनुवादक भी नहीं दिया गया।
एक अकेली माँ की मौत और सऊदी कानून
सऊदी नागरिक, जिसे अपनी माँ की हत्या के लिए फांसी दी गई, का मामला देश में बहुत गूंजा। सरकार ने दावा किया कि उसने “गंभीर रूप से असहनीय कृत्य” किया था, और अदालत ने इसे “शरई तौर पर गंभीर गुनाह” माना। परंतु इस मामले में भी अनेक कानूनी विशेषज्ञों ने तर्क दिया कि दोषी को मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण के बाद पुनर्विचार की जरूरत थी, जो नहीं किया गया।
मानवाधिकार संगठनों की चिंता
अमनेस्टी इंटरनेशनल, ह्यूमन राइट्स वॉच और रेप्रीव (Reprieve) जैसे संगठनों ने इस प्रवृत्ति को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। वे कहते हैं कि सऊदी अरब की फांसी नीतियाँ न केवल अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समझौतों के विरुद्ध हैं, बल्कि यह न्याय की भावना की हत्या भी है।
अमनेस्टी की एक ताजा रिपोर्ट में यह बताया गया है कि 2025 के पहले छह महीनों में 180 फांसी हुईं, जिनमें से लगभग 66% ड्रग तस्करी के आरोपों में थीं। रिपोर्ट यह भी बताती है कि ज्यादातर मामलों में अभियुक्तों को न तो स्वतंत्र कानूनी सहायता मिलती है और न ही उचित अनुवाद।
राजनीतिक और कूटनीतिक प्रतिक्रिया
अनेक देशों ने सऊदी अरब से अपने नागरिकों को फांसी न देने की अपील की है। भारत, पाकिस्तान, फिलीपींस, सोमालिया और बांग्लादेश ने सऊदी अधिकारियों से अपने नागरिकों के लिए कूटनीतिक हस्तक्षेप किया है। हालांकि, अब तक केवल चुनिंदा मामलों में ही यह हस्तक्षेप कारगर रहा है।
अमेरिका और यूरोपीय संघ ने भी इस विषय पर चिंता जताई है, लेकिन उनके बयान काफी संतुलित रहे हैं — शायद तेल और भू-राजनीति को ध्यान में रखते हुए।
सऊदी सरकार की सफाई
सऊदी सरकार का दावा है कि उसकी न्याय प्रणाली “कठोर लेकिन न्यायसंगत” है। उसका यह भी कहना है कि देश को ड्रग माफिया के नेटवर्क से लड़ने के लिए सख्त कदम उठाने पड़ रहे हैं और मृत्युदंड इसका एक आवश्यक हिस्सा है।
सऊदी प्रशासन का तर्क है कि विदेशी नागरिकों को भी वही कानूनी प्रक्रिया मिलती है जो किसी स्थानीय नागरिक को दी जाती है।
मौत की सजा: एक वैश्विक बहस
सऊदी अरब की यह घटनाएँ एक बड़े वैश्विक विमर्श को जन्म देती हैं — कि क्या मृत्युदंड आज के युग में न्याय का उचित साधन है?
जहाँ एक ओर सऊदी अरब जैसे देश सख्त अपराधों पर सख्त सजा देने की वकालत करते हैं, वहीं यूरोप और अमेरिका जैसे अनेक देश मृत्युदंड को समाप्त कर चुके हैं या उसे केवल चरम मामलों के लिए ही मान्य मानते हैं।
निष्कर्ष: सऊदी अरब का ‘न्याय’ सवालों के घेरे में
सऊदी अरब में एक ही दिन में 8 लोगों को फांसी देना कोई साधारण घटना नहीं है। यह एक व्यवस्था की तस्वीर है — जहाँ कानून का भय अधिक है, परंतु उसके निष्पादन की पारदर्शिता पर गहरे सवाल उठते हैं।
जब विदेशी नागरिक, वह भी गरीब और अशिक्षित, फांसी पर लटकाए जाते हैं, तब यह एक अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बन जाता है — न कि केवल एक आंतरिक कानूनी कार्रवाई।
सवाल यह नहीं है कि अपराध हुआ या नहीं; सवाल यह है कि क्या दोष सिद्धि की प्रक्रिया निष्पक्ष, मानवोचित और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप थी?
यदि यह प्रक्रिया अपारदर्शी रही हो, और अगर गवाह, अनुवाद, कानूनी मदद या दूतावास संपर्क जैसी मूलभूत ज़रूरतें भी पूरी न हुई हों — तब यह केवल फांसी नहीं, बल्कि संस्थागत हत्या बन जाती है।