January 14, 2026

स्यानाचट्टी में यमुना पर बनी झील: मलबे से कटे कई गाँव, पुल डूबा, प्रशासन अलर्ट पर

स्यानाचट्टी में यमुना पर बनी झील: कटे गाँव, डूबा पुल और बढ़ा खतरा

स्यानाचट्टी में यमुना पर बनी झील: कटे गाँव, डूबा पुल और बढ़ा खतरा

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उत्तरकाशी, 23 अगस्त 2025।
उत्तराखंड का उत्तरकाशी ज़िला इन दिनों एक बार फिर आपदा की चपेट में है। स्यानाचट्टी क्षेत्र में भारी बारिश और भूस्खलन के कारण यमुना नदी पर अचानक झील बन गई है। इस प्राकृतिक आपदा ने न केवल ग्रामीणों के जीवन को संकट में डाल दिया है बल्कि पूरे क्षेत्र की कनेक्टिविटी को भी प्रभावित कर दिया है। मलबे से बने इस अस्थायी बाँध के कारण यमुना का बहाव थम गया है और पानी तेजी से भरकर झील का रूप ले चुका है।


झील कैसे बनी?

स्थानीय लोगों के अनुसार, बीते दिन देर रात अचानक तेज बारिश शुरू हुई। बारिश के बाद पहाड़ों से भारी मात्रा में मलबा नदी में आकर गिरा। इस मलबे ने नदी का रास्ता रोक दिया और यमुना का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो गया। सामान्य परिस्थितियों में बहने वाली नदी अब ठहर गई और कुछ ही घंटों में वहाँ झील का निर्माण हो गया। विशेषज्ञ इसे अत्यंत खतरनाक मान रहे हैं क्योंकि इस तरह की झीलें स्थायी नहीं होतीं और अचानक टूटने से भीषण तबाही मचा सकती हैं।


गाँव कट-ऑफ: लोगों में दहशत

झील बनने से सबसे अधिक दिक़्क़त आसपास के गाँवों को झेलनी पड़ रही है। कई गाँवों का संपर्क ज़िले से पूरी तरह टूट चुका है। सड़क मार्ग अवरुद्ध हो गया है और पुल डूब जाने से लोगों का आना-जाना बंद हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि अब उनके पास भोजन और दवाइयों का संकट पैदा हो गया है। छोटे बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। कई परिवारों को अपने घर छोड़कर ऊँचे इलाकों में जाना पड़ा है।


डूबा पुल और टूटी कनेक्टिविटी

यमुना नदी पर बना एक प्रमुख पुल अब झील के पानी में डूब चुका है। यह पुल न केवल गाँवों को जोड़ता था बल्कि यमुनोत्री धाम जाने वाले यात्रियों के लिए भी एकमात्र रास्ता था। पुल के डूब जाने से पूरे इलाके की कनेक्टिविटी टूट गई है। ट्रैफिक बंद हो गया है और यात्री रास्ते में फँसे हुए हैं। यह स्थिति चारधाम यात्रा को भी प्रभावित कर सकती है, क्योंकि स्यानाचट्टी क्षेत्र यमुनोत्री मार्ग का अहम हिस्सा है।


प्रशासन की राहत और बचाव कोशिशें

घटना की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन, SDRF और पुलिस की टीमें मौके पर पहुँचीं। मशीनों की मदद से झील को नियंत्रित तरीके से खोलने की कोशिश की जा रही है ताकि पानी धीरे-धीरे बह सके और नीचे के गाँवों में अचानक बाढ़ का खतरा न हो। प्रशासन ने प्रभावित गाँवों में राहत सामग्री भेजने की व्यवस्था की है, हालांकि रास्ते बंद होने की वजह से यह काम चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। पुल डूब जाने के कारण अधिकारियों ने वैकल्पिक रास्तों और अस्थायी पुल बनाने की योजना पर काम शुरू किया है।


विशेषज्ञों की राय: बड़ा खतरा मंडरा रहा

आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों का कहना है कि मलबे से बनी झीलें बेहद अस्थिर होती हैं। इनमें पानी का दबाव लगातार बढ़ता है और कभी भी मलबा टूट सकता है। यदि ऐसा हुआ तो नीचे बसे गाँवों पर अचानक बाढ़ का खतरा मंडरा जाएगा। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ऐसी स्थिति में जान-माल का बड़ा नुकसान हो सकता है। इसीलिए प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है और गाँवों के लोगों को नदी किनारे से दूर रहने की सलाह दी जा रही है।


चारधाम यात्रा पर असर

स्यानाचट्टी क्षेत्र चारधाम यात्रा मार्ग में आता है। यमुनोत्री धाम जाने वाले हज़ारों श्रद्धालुओं की यात्रा इस घटना से प्रभावित हुई है। यात्रियों को फिलहाल वहीं रोक दिया गया है और प्रशासन ने नए निर्देश जारी होने तक आगे की यात्रा स्थगित करने को कहा है। इससे स्थानीय व्यापारियों, होटल व्यवसायियों और टूर ऑपरेटरों की चिंता बढ़ गई है क्योंकि पर्यटन और धार्मिक यात्रा पर सीधा असर पड़ रहा है।


ग्रामीणों की पीड़ा

झील बनने के बाद ग्रामीणों की समस्याएँ कई गुना बढ़ गई हैं। दूध, सब्ज़ियाँ और रोज़मर्रा की चीज़ें गाँव तक पहुँचाना अब लगभग असंभव हो गया है। स्कूल जाने वाले बच्चों को परेशानी हो रही है और बीमार लोगों को अस्पताल तक ले जाना मुश्किल हो गया है। ग्रामीण लगातार प्रशासन से मदद की गुहार लगा रहे हैं। उनका कहना है कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो स्थिति और भी भयावह हो सकती है।


सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया

उत्तराखंड सरकार ने घटना का संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री ने उच्चाधिकारियों को लगातार स्थिति की निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने प्रभावित गाँवों में तत्काल राहत सामग्री पहुँचाने और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने का आदेश दिया है। इसके अलावा एनडीआरएफ की अतिरिक्त टीमों को भी अलर्ट पर रखा गया है। प्रशासन ने आसपास के क्षेत्रों में अलर्ट जारी कर दिया है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।


मौसम विभाग का अलर्ट

मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले कुछ दिनों तक उत्तरकाशी और आसपास के क्षेत्रों में भारी बारिश होने की संभावना है। यदि बारिश जारी रही तो झील में पानी का स्तर और बढ़ सकता है। इस वजह से खतरा और गहरा जाएगा। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे सावधानी बरतें, अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।


 चुनौतीपूर्ण हालात

स्यानाचट्टी क्षेत्र में यमुना पर बनी झील ने एक बार फिर दिखा दिया है कि पहाड़ी क्षेत्रों में आपदा कितनी अचानक और भयावह हो सकती है। जहाँ यह झील ग्रामीणों के लिए भय का कारण बनी हुई है, वहीं प्रशासन के सामने यह चुनौती है कि इसे कैसे सुरक्षित तरीके से खोला जाए। पुल डूबने और गाँवों के कट-ऑफ होने से आम जनता की मुश्किलें बढ़ गई हैं। चारधाम यात्रा पर असर और मौसम विभाग की चेतावनी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।