January 15, 2026

हरिद्वार में 250 फीट ऊँची मस्जिद का निर्माण रुका, 135 अवैध मदरसों पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

हरिद्वार में 250 फीट ऊँची मस्जिद का निर्माण रुका, 135 अवैध मदरसों पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
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दैनिक प्रभातवाणी विशेष रिपोर्ट | 30 जुलाई 2025 | हरिद्वार

हरिद्वार, उत्तराखंड — धार्मिक नगरी हरिद्वार में धार्मिक संस्थाओं को लेकर दो बड़े घटनाक्रमों ने प्रदेशभर में हलचल मचा दी है। एक ओर जहां लगभग 250 फीट ऊँची एक मस्जिद के निर्माण कार्य को स्थानीय विरोध के चलते मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तत्काल प्रभाव से रुकवाने और जांच के आदेश जारी किए हैं, वहीं दूसरी ओर उत्तराखंड हाई कोर्ट ने प्रदेश में संचालित हो रहे 135 अवैध मदरसों, जिनमें से 79 केवल हरिद्वार में स्थित हैं, को लेकर सख्त निर्देश दिए हैं।


 मस्जिद निर्माण पर लगी रोक, जांच के आदेश

हरिद्वार में एक ऐसी मस्जिद का निर्माण चल रहा था जिसकी ऊँचाई लगभग 250 फीट बताई जा रही थी। इसकी बनावट कुतुब मीनार से प्रेरित थी, जिससे इसे लेकर स्थानीय नागरिकों और हिंदू संगठनों में आक्रोश फैल गया। लोगों ने आशंका जताई कि इतनी विशाल धार्मिक संरचना इस पवित्र नगर की सांप्रदायिक सद्भावना और भूगोल को प्रभावित कर सकती है।

प्रदर्शन और जनविरोध के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए निर्माण को रोकने का आदेश जारी किया और सम्बंधित दस्तावेजों की जांच कराने का निर्देश भी दिया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा है कि—

“राज्य में कोई भी धार्मिक निर्माण बिना वैध अनुमति और सामाजिक समरसता के उल्लंघन के नहीं किया जा सकता। कानून और व्यवस्था सर्वोपरि है।”

अब प्रशासन द्वारा इस निर्माण कार्य से जुड़े भूमि दस्तावेज, निर्माण स्वीकृति, फंडिंग स्रोत और डिजाइन स्वीकृति की बारीकी से जाँच की जा रही है।


 हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: 135 अवैध मदरसे सील

इसी क्रम में उत्तराखंड हाई कोर्ट ने प्रदेशभर में बिना पंजीकरण और योग्यता-पुंज लेखाजोखा के संचालित हो रहे 135 मदरसों को अवैध घोषित करते हुए प्रशासन को सील करने और संचालन पर रोक लगाने के आदेश दिए हैं। विशेष रूप से हरिद्वार ज़िले में 79 मदरसे चिन्हित किए गए हैं, जिन्हें पहले ही प्रशासन द्वारा सील किया जा चुका है।

हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि—

“जब तक इन मदरसों का विधिवत पंजीकरण नहीं हो जाता, तब तक इनमें न तो धार्मिक गतिविधियाँ होंगी और न ही शैक्षणिक क्रियाएँ संचालित की जाएँगी।”

आदेश के प्रमुख बिंदु:

  • सभी मदरसों को राज्य सरकार से विधिवत पंजीकरण लेना अनिवार्य।

  • शिक्षकों की योग्यता, छात्रों की संख्या, भूमि स्वामित्व, फंडिंग स्रोत और शैक्षणिक ढांचे की जांच की जाएगी।

  • किसी भी नई धार्मिक या शैक्षणिक संस्था को स्थापित करने से पहले सरकारी पूर्वानुमति आवश्यक होगी।


 कानून व्यवस्था के मद्देनज़र तैनात हुआ प्रशासन

इन दोनों मामलों को देखते हुए हरिद्वार में पुलिस और प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है ताकि किसी भी प्रकार का तनाव या अफवाह न फैले। सोशल मीडिया पर निगरानी रखते हुए फर्जी खबरें फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।


 राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया

इन फैसलों को लेकर प्रदेश की राजनीति में भी गर्माहट देखी जा रही है। जहां विपक्षी दलों ने इस कार्रवाई को धार्मिक ध्रुवीकरण की कोशिश बताया, वहीं सत्तारूढ़ सरकार ने इसे कानून और पारदर्शिता की जीत कहा है।

मुख्यमंत्री धामी ने दोहराया—

“धर्म के नाम पर अवैध गतिविधियों को राज्य में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उत्तराखंड एक आध्यात्मिक और संवेदनशील राज्य है, यहाँ धार्मिक संतुलन और कानूनी व्यवस्था सर्वोपरि है।”


 आगे की कार्यवाही

  • मस्जिद निर्माण की जांच रिपोर्ट आने के बाद अगला निर्णय लिया जाएगा।

  • अवैध मदरसों को पुनः मान्यता दिलाने के लिए आवश्यक शर्तों को पूरा करना होगा।

  • सरकार जल्द ही ऑनलाइन मदरसा पंजीकरण प्रणाली भी शुरू कर सकती है।


दैनिक प्रभातवाणी:
हरिद्वार जैसे धार्मिक नगर में हो रहे इन घटनाक्रमों ने प्रशासन, न्यायपालिका और समाज के लिए एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। अब देखना होगा कि जाँच और निष्पक्षता के इस दौर में धार्मिक विश्वास और कानून के बीच संतुलन कैसे कायम किया जाता है।


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