January 12, 2026

उत्तरकाशी में पत्रकार की रहस्यमयी मौत: हादसा या हत्या? सच्चाई की तलाश में जांच शुरू

पत्रकार राजीव प्रताप की रहस्यमयी मौत: पुलिस का दावा दुर्घटना, परिजनों ने जताया संदेह
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उत्तरकाशी,1अक्टूबर2025/दैनिक प्रभातवाणी

उत्तराखंड का उत्तरकाशी जिला मंगलवार रात अचानक सनसनी से भर गया, जब स्थानीय पत्रकार राजीव प्रताप का शव गंगा नदी के किनारे मिला। शुरुआत में यह खबर एक सामान्य दुर्घटना जैसी लगी, लेकिन धीरे-धीरे इस मौत ने कई रहस्यमयी सवाल खड़े कर दिए। पुलिस ने प्रारंभिक रूप से इसे बाइक हादसे से जोड़ा, लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने पूरी कहानी बदल दी। रिपोर्ट में सामने आया कि राजीव प्रताप की मौत सड़क दुर्घटना से नहीं बल्कि छाती और पेट में गंभीर आंतरिक चोटों की वजह से हुई। यही कारण है कि परिवार और स्थानीय लोगों ने इस घटना को संदिग्ध बताते हुए हत्या की आशंका जताई है।

उत्तरकाशी जैसे शांत और धार्मिक शहर में इस तरह की रहस्यमयी मौत ने न सिर्फ प्रशासन को हिला दिया है, बल्कि पत्रकारिता की स्वतंत्रता और पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजीव प्रताप पिछले कई वर्षों से क्षेत्रीय मुद्दों, अवैध खनन और प्रशासनिक लापरवाहियों पर लगातार रिपोर्टिंग कर रहे थे। उनकी रिपोर्टें कई बार स्थानीय प्रशासन और प्रभावशाली लोगों को असहज कर चुकी थीं। ऐसे में उनकी अचानक और संदिग्ध मौत ने लोगों के मन में यह शंका और गहरी कर दी है कि कहीं यह एक सोची-समझी साजिश तो नहीं।

घटना के तुरंत बाद जब शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया तो परिजनों ने साफ कहा कि उन्हें सड़क हादसे पर यकीन नहीं है। उनका दावा है कि राजीव प्रताप एक अनुभवी बाइक चालक थे और अक्सर पहाड़ी रास्तों पर सफर करते थे। ऐसे में बाइक से दुर्घटना होना उनके लिए सहज मानना मुश्किल है। परिवार का कहना है कि राजीव प्रताप पिछले कुछ समय से दबाव और धमकियों का सामना कर रहे थे। हालांकि, इन धमकियों की कोई लिखित शिकायत पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है, लेकिन उनके करीबी बताते हैं कि उन्होंने इस विषय पर कई बार अनौपचारिक बातचीत की थी।

पुलिस अधीक्षक उत्तरकाशी ने मीडिया को जानकारी दी कि इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम गठित कर दी गई है। टीम अब यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि आखिरकार राजीव प्रताप की मौत का कारण क्या था और वह नदी किनारे कैसे पहुंचे। पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने की बात कही है और उनके फोन कॉल डिटेल्स निकालने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। इस मामले को लेकर पुलिस फिलहाल किसी भी नतीजे पर पहुँचने से बच रही है, लेकिन प्रशासन ने इसे संवेदनशील मानकर जांच को प्राथमिकता देने का आश्वासन दिया है।

पत्रकार समुदाय ने इस घटना पर गहरी चिंता जाहिर की है। उत्तरकाशी प्रेस क्लब के पदाधिकारियों ने इसे पत्रकारिता पर हमला बताया और सरकार से निष्पक्ष जांच की मांग की। उनका कहना है कि जब पत्रकार सच सामने लाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालते हैं तो ऐसे मामलों में प्रशासन का दायित्व और बढ़ जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि इस घटना के पीछे कोई आपराधिक षड्यंत्र है, तो दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए, अन्यथा यह लोकतंत्र की जड़ों को हिला देने वाली घटना साबित होगी।

स्थानीय लोगों में भी आक्रोश है। बुधवार को उत्तरकाशी में कई सामाजिक संगठनों और पत्रकार संघों ने बाजार बंद करने का आह्वान किया और जिला प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी। लोगों का कहना है कि यदि पत्रकार सुरक्षित नहीं हैं तो आम आदमी की आवाज़ कौन उठाएगा। यह सवाल अब पूरे राज्य के सामने है कि आखिरकार पत्रकारिता का सच लिखने वालों के लिए कितनी सुरक्षा है।

इस मामले ने केवल उत्तरकाशी ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड को हिला दिया है। प्रदेश भर में पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मौत को लेकर चिंता जताई है। उनका मानना है कि हाल के वर्षों में पत्रकारों पर हमले और उनकी संदिग्ध मौतें बढ़ी हैं। अगर इस पर रोक नहीं लगी, तो सच लिखने वाले पत्रकारों का हौसला कमजोर हो जाएगा और समाज तक सच्चाई पहुँचने का रास्ता धीरे-धीरे बंद हो जाएगा।

भारत में पत्रकारों की सुरक्षा लंबे समय से चिंता का विषय रही है। कई रिपोर्टों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने यह बात कही है कि देश में पत्रकारों पर दबाव, धमकी और हमले आम हो चुके हैं। खासकर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में काम करने वाले पत्रकारों को सबसे अधिक खतरे का सामना करना पड़ता है, क्योंकि वे सीधे स्थानीय माफिया, खनन गिरोह और सत्ता से जुड़े भ्रष्टाचार को उजागर करते हैं। राजीव प्रताप का मामला भी उसी श्रेणी में आता है, जहां सच लिखना उनकी जान पर भारी पड़ गया हो सकता है।

राजीव प्रताप की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो वे पिछले पंद्रह वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय थे। उन्होंने कई राष्ट्रीय अखबारों और स्थानीय पोर्टलों के लिए काम किया और उत्तरकाशी क्षेत्र की समस्याओं को उजागर किया। खासकर अवैध खनन, पर्यावरणीय संकट, सरकारी योजनाओं में गड़बड़ी और शिक्षा व्यवस्था पर उनकी रिपोर्टें चर्चा में रहीं। उन्हें एक ईमानदार और निर्भीक पत्रकार माना जाता था, जो बिना दबाव में आए सच लिखते थे। शायद यही उनका सबसे बड़ा अपराध बन गया।

उत्तरकाशी की इस रहस्यमयी मौत ने अब राज्य सरकार की जिम्मेदारी भी बढ़ा दी है। विपक्षी दलों ने इसे लेकर सरकार पर हमला बोलते हुए कहा है कि पत्रकारों को सुरक्षा देने में सरकार विफल रही है। विपक्ष का कहना है कि यदि इस घटना की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो यह प्रदेश में लोकतंत्र और पत्रकारिता के लिए घातक साबित होगी।

यहां एक बड़ा सवाल यह भी है कि क्या पत्रकारों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस कानून बन पाएगा। लंबे समय से देशभर के पत्रकार संगठन यह मांग करते रहे हैं कि पत्रकारों को विशेष सुरक्षा मिले और किसी भी हमले या हत्या की स्थिति में तेजी से कार्रवाई हो। लेकिन अब तक ऐसी कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। राजीव प्रताप की मौत ने इस मांग को और तेज कर दिया है।

समाजशास्त्रियों का मानना है कि जब किसी समाज में पत्रकार सुरक्षित नहीं होते, तो लोकतंत्र कमजोर होता है। क्योंकि पत्रकार ही वह माध्यम हैं जो सत्ता और जनता के बीच सेतु का काम करते हैं। यदि यह सेतु टूटता है, तो सच जनता तक नहीं पहुँच पाता। उत्तरकाशी की यह घटना हमें चेतावनी देती है कि हमें पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर होना ही होगा।

जांच टीम अब कई पहलुओं पर काम कर रही है। राजीव प्रताप की हाल की रिपोर्टिंग और जिन मुद्दों पर उन्होंने खुलासे किए, उन सभी की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी देख रही है कि उनके मोबाइल से आखिरी कॉल किसे किया गया और उनकी गतिविधियां किससे जुड़ी थीं। हालांकि, अभी तक कोई ठोस सुराग सामने नहीं आया है। लेकिन यह निश्चित है कि यदि जांच सही दिशा में नहीं हुई, तो यह मामला भी उन अनसुलझे मामलों की सूची में जुड़ जाएगा जिनका सच कभी सामने नहीं आ पाता।

फिलहाल पूरा उत्तरकाशी और पत्रकारिता जगत इस घटना की सच्चाई सामने आने का इंतजार कर रहा है। लोग चाहते हैं कि सच सामने आए, चाहे वह कितना भी कड़वा क्यों न हो। राजीव प्रताप की मौत हादसा थी या हत्या, यह आने वाले दिनों में साफ हो जाएगा, लेकिन इतना तय है कि इस घटना ने पत्रकारिता की स्वतंत्रता और सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है।