January 11, 2026

उत्तराखंड में ₹162 करोड़ भूमि घोटाला: ED की बड़ी कार्रवाई

FF-3.17.23-1000x667-1
Spread the love

देहरादून, 26 जून।
उत्तराखंड के बहुचर्चित राष्ट्रीय राजमार्ग‑74 (NH-74) चौड़ीकरण घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक वरिष्ठ PCS अधिकारी दिनेश प्रताप सिंह समेत कई लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत की गई।

ईडी की टीमों ने देहरादून, रुद्रपुर और काशीपुर में सात से अधिक स्थानों पर छापे मारे। इस दौरान एजेंसी ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, कंप्यूटर, मोबाइल फोन, बैंक रिकॉर्ड और जमीन से संबंधित फाइलें जब्त कीं। यह मामला जमीन के मुआवजे में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है, जिसमें कृषि भूमि को गलत तरीके से गैर‑कृषि दिखा कर सरकार से अधिक मुआवजा वसूला गया।

 क्या है मामला?

NH-74 चौड़ीकरण परियोजना के तहत जमीन अधिग्रहण के समय कई जगहों पर भूमि के उपयोग को नियमों के विपरीत बदला गया। इससे कुछ लोगों को भारी लाभ पहुंचाया गया और सरकार को करोड़ों का नुकसान हुआ।
इस मामले में कई सरकारी अधिकारियों, दलालों और भूमि स्वामियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, इस घोटाले की राशि लगभग ₹162 करोड़ आंकी गई है।

 PCS अधिकारी के घर दबिश

ED ने इस घोटाले में उत्तराखंड के PCS अधिकारी दिनेश प्रताप सिंह के देहरादून स्थित आवास पर भी छापेमारी की। अधिकारी इस समय उत्तराखंड शुगर फेडरेशन (दोईवाला) में कार्यरत हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी करते हुए गलत मंजूरी दी, जिससे अवैध भुगतान संभव हुआ।

 लंबे समय से चल रही जांच

यह मामला पहली बार 2017 में सामने आया था जब कुछ किसानों ने अनियमित मुआवजे को लेकर शिकायत दर्ज करवाई थी। इसके बाद राज्य सरकार ने जांच के आदेश दिए और कई अधिकारियों को निलंबित किया गया। वर्ष 2024 में ED ने इस घोटाले की जांच शुरू की और अब कार्रवाई तेज की जा रही है।

 ED की दृष्टि से मनी लॉन्ड्रिंग का मामला

ED इस मामले को Prevention of Money Laundering Act (PMLA) के तहत देख रही है। आरोप है कि अवैध रूप से प्राप्त धन को वैध संपत्ति में बदला गया, जो मनी लॉन्ड्रिंग की श्रेणी में आता है।

NH-74 घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय की यह कार्रवाई राज्य में भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक बड़ी पहल मानी जा रही है। जांच एजेंसी का कहना है कि यदि और साक्ष्य मिलते हैं तो आगे भी छापेमारी और गिरफ्तारी संभव है। यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में किन और अधिकारियों के नाम इस जांच में सामने आते हैं।