January 11, 2026

उत्तराखंड के वैज्ञानिकों का विश्व में सम्मान: प्रो. आर.सी. रामोला और डॉ. मुकेश बीजलवान बने दुनिया के शीर्ष 2% वैज्ञानिक

उत्तराखंड के वैज्ञानिकों का विश्व में सम्मान: प्रो. आर.सी. रामोला और डॉ. मुकेश बीजलवान बने दुनिया के शीर्ष 2% वैज्ञानिक
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न्यू टिहरी, 21 सितंबर (दैनिक प्रभातवाणी):
उत्तराखंड के लिए गौरव का दिन है। राज्य के दो प्रमुख वैज्ञानिकों—प्रोफेसर आर.सी. रामोला और डॉ. मुकेश बीजलवान—का नाम दुनिया के शीर्ष वैज्ञानिकों में शामिल हुआ है। यह सम्मान स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी, कैलिफ़ोर्निया, अमेरिका द्वारा प्रकाशित विश्व के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में उनके चयन के रूप में मिला है। इस सूची में केवल उन वैज्ञानिकों को स्थान दिया जाता है, जिनका अनुसंधान उत्कृष्ट, प्रभावशाली और दुनिया भर में मान्यता प्राप्त हो।

प्रो. रामोला और डॉ. बीजलवान दोनों ही अपने-अपने क्षेत्र में न केवल देश का, बल्कि उत्तराखंड का नाम भी गौरवपूर्ण तरीके से प्रस्तुत कर रहे हैं। यह उपलब्धि न केवल व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि राज्य के विज्ञान और शिक्षा क्षेत्र के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है।

प्रो. आर.सी. रामोला: शिक्षा और अनुसंधान में मिसाल

प्रो. रामोला वर्तमान में एसआरटी कैंपस, गढ़वाल सेंट्रल यूनिवर्सिटी में भौतिकी के प्रोफेसर हैं और एमआरटी कैंपस, बादशाहीचिट में भौतिकी विभागाध्यक्ष का दायित्व संभाल रहे हैं। उन्हें इस सूची में शामिल किए जाने का कारण उनकी शोध की उच्च गुणवत्ता और वैज्ञानिक योगदान है।

प्रो. रामोला न्यूक्लियर फिजिक्स, रेडिएशन प्रोटेक्शन और भूकंप पूर्वानुमान के क्षेत्र में विशेष योगदान देने वाले अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों में गिने जाते हैं। पिछले तीन दशकों से शिक्षा और अनुसंधान में उनका योगदान अद्वितीय रहा है। उनके नेतृत्व में कई छात्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध कर रहे हैं, जिससे उत्तराखंड और भारत का नाम वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय में रोशन हो रहा है।

प्रो. रामोला के अनुसंधान कार्यों का मूल्यांकन स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा किया गया। विश्वविद्यालय की यह सूची वैज्ञानिकों के प्रकाशनों की संख्या, अनुसंधान की गुणवत्ता और पेटेंटेड कार्य के आधार पर तैयार की जाती है। प्रो. रामोला की मेहनत और वैज्ञानिक उत्कृष्टता को देखते हुए उन्हें इस सूची में चौथी बार स्थान दिया गया है।

उनके करियर की उपलब्धियों में कई प्रतिष्ठित पुरस्कार शामिल हैं, जिनमें भारत गौरव रत्न, डॉ. ए.के. गांगुली राष्ट्रीय पुरस्कार और सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र पुरस्कार प्रमुख हैं। प्रो. रामोला ने न केवल अपने विभाग को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया, बल्कि छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए भी तैयार किया।

प्रो. रामोला मूल रूप से रावतगाँव, रोनाड रामोली पत्ती, प्रतापनगर ब्लॉक से हैं। उनके जीवन और कार्य ने यह साबित कर दिया है कि सीमित संसाधनों के बावजूद उच्च गुणवत्ता वाला अनुसंधान संभव है। उनका दृष्टिकोण न केवल वैज्ञानिक समुदाय के लिए बल्कि सामान्य जनता के लिए भी प्रेरणादायक है।

डॉ. मुकेश बीजलवान: नवयुवकों के लिए प्रेरणा

डॉ. मुकेश बीजलवान, जो पंचा ब्लॉक के रहने वाले हैं, वर्तमान में हिमालयन यूनिवर्सिटी, देहरादून में कार्यरत हैं। उन्हें भी इस प्रतिष्ठित सूची में शामिल किया गया है। डॉ. बीजलवान का अनुसंधान क्षेत्र और उनके कार्य वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय द्वारा अत्यंत सराहनीय माने गए हैं।

उनकी उपलब्धि यह दर्शाती है कि उत्तराखंड के छोटे ब्लॉकों से भी अंतरराष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिक निकल सकते हैं। उन्होंने स्थानीय प्रतिभाओं को प्रेरित करते हुए विश्वविद्यालय में शोध और शिक्षा को नई दिशा दी है।

स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय की सूची: वैज्ञानिकों का विश्वसनीय मानदंड

स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय, कैलिफ़ोर्निया, अमेरिका हर वर्ष दुनिया भर के वैज्ञानिकों का डेटा एकत्रित करता है और शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की वैश्विक सूची प्रकाशित करता है। इस सूची में शामिल होने के लिए निम्नलिखित मानदंड देखे जाते हैं:

शोध पत्रों की संख्या – वैज्ञानिक ने कितने शोध पत्र प्रकाशित किए हैं।

अनुसंधान की गुणवत्ता – प्रकाशित शोध का वैश्विक प्रभाव और मान्यता।

पेटेंटेड कार्य – अनुसंधान के व्यावहारिक और नवाचार आधारित योगदान।

अन्य वैज्ञानिकों के सन्दर्भ – उनकी कार्यप्रणाली और योगदान का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव।

इस सूची में शामिल होने का मतलब यह है कि वैज्ञानिक न केवल अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट हैं, बल्कि उनके कार्य का वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय पर प्रभाव भी महत्वपूर्ण है। प्रो. रामोला और डॉ. बीजलवान ने यह साबित कर दिया है कि भारत के छोटे शहरों और ब्लॉकों के शोधकर्ता भी विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।

स्थानीय और राष्ट्रीय गौरव

उत्तराखंड के स्थानीय प्रशासन, शिक्षा विभाग और जनता ने दोनों वैज्ञानिकों की इस उपलब्धि पर उन्हें बधाई दी है। राज्य के प्रतिनिधियों और विश्वविद्यालयों ने कहा कि यह सम्मान न केवल व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि पूरे राज्य के विज्ञान और शिक्षा क्षेत्र के लिए प्रेरक है।

स्थानीय विद्यालयों और कॉलेजों में प्रो. रामोला और डॉ. बीजलवान की उपलब्धियों को छात्रों के लिए प्रेरणा के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। उनका जीवन यह संदेश देता है कि मेहनत, समर्पण और गुणवत्ता की खोज ही सफलता की कुंजी है।

भविष्य की राह

दोनों वैज्ञानिक न केवल वर्तमान में अपने अनुसंधान के माध्यम से योगदान दे रहे हैं, बल्कि आने वाले शोधकर्ताओं के लिए मार्गदर्शन भी कर रहे हैं। प्रो. रामोला की अगुवाई में कई युवा छात्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुसंधान कर रहे हैं। डॉ. बीजलवान ने भी अपनी दिशा-निर्देशित शिक्षण पद्धति से विश्वविद्यालय में नवयुवकों को प्रेरित किया है।

इस उपलब्धि से यह स्पष्ट होता है कि उत्तराखंड में विज्ञान और शिक्षा के क्षेत्र में अपार संभावनाएँ हैं। राज्य के युवा वैज्ञानिकों के लिए यह संदेश है कि सीमित संसाधनों और चुनौतियों के बावजूद, निरंतर प्रयास और गुणवत्ता पूर्ण शोध उन्हें वैश्विक मंच तक पहुँचा सकता है।

दैनिक प्रभातवाणी
प्रो. आर.सी. रामोला और डॉ. मुकेश बीजलवान का चयन विश्व के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में शामिल होना न केवल व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि उत्तराखंड और भारत के विज्ञान एवं अनुसंधान के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह उपलब्धि पूरे राज्य और देश के लिए गर्व का विषय है।

दोनों वैज्ञानिकों को इस प्रतिष्ठित सम्मान पर जनप्रतिनिधियों, शिक्षा संस्थानों और स्थानीय लोगों द्वारा बधाई दी गई, और उनके कार्य को विश्व स्तर पर पहचान मिली।

उत्तराखंड के लिए यह गर्व का क्षण है, और आने वाले वर्षों में राज्य के और अधिक युवा वैज्ञानिक भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त कर सकते हैं।