January 13, 2026

भारत ने किया अग्नि-प्राइम मिसाइल का रेल-आधारित सफल परीक्षण, 2000 किलोमीटर तक मारक क्षमता से बढ़ी रणनीतिक ताकत

भारत ने किया अग्नि-प्राइम मिसाइल का रेल-आधारित सफल परीक्षण, 2000 किलोमीटर तक मारक क्षमता से बढ़ी रणनीतिक ताकत
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 नई दिल्ली, 25 सितंबर 2025/दैनिक प्रभातवाणी 

भारत ने अपनी रक्षा क्षमताओं में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज करते हुए अग्नि-प्राइम (Agni-Prime) नामक अत्याधुनिक बैलिस्टिक मिसाइल का रेल-आधारित मोबाइल लॉन्चर से सफल परीक्षण किया है। यह परीक्षण देश की सामरिक ताकत को नए स्तर पर ले जाने वाला माना जा रहा है। इस परीक्षण की आधिकारिक पुष्टि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की, जिन्होंने इसे भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।

मिसाइल की मुख्य विशेषताएं और मारक क्षमता

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित अग्नि-प्राइम मिसाइल भारत की अग्नि श्रृंखला का सबसे आधुनिक संस्करण है। यह दो-स्तरीय, ठोस ईंधन से संचालित बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसकी मारक दूरी लगभग 2000 किलोमीटर तक है। यह मिसाइल परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है और इसमें अत्याधुनिक नेविगेशन सिस्टम, बेहतर गाइडेंस तकनीक और उच्च सटीकता के लिए अत्याधुनिक सेंसर लगाए गए हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार अग्नि-प्राइम मिसाइल में कार्बन फाइबर से बनी हल्की लेकिन मजबूत बॉडी का इस्तेमाल किया गया है, जिससे इसकी गति और गतिशीलता बढ़ जाती है। यह मिसाइल पारंपरिक अग्नि सीरीज की तुलना में हल्की है, लेकिन इसकी मारक क्षमता कहीं अधिक घातक और सटीक है।

रेल-आधारित मोबाइल लॉन्चर से पहली बार परीक्षण

अग्नि-प्राइम मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे रेल-आधारित मोबाइल लॉन्चर से लॉन्च किया गया, जो इसे पारंपरिक लॉन्च प्लेटफॉर्म से अलग बनाता है। रेल-आधारित लॉन्चिंग सिस्टम भारत को रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण लाभ प्रदान करता है।

  • सबसे पहला फायदा यह है कि इस मिसाइल को देश के किसी भी कोने में रेलमार्ग के माध्यम से आसानी से तैनात किया जा सकता है।

  • दूसरा, मोबाइल लॉन्चिंग सिस्टम दुश्मन के लिए मिसाइल की तैनाती और मूवमेंट को ट्रैक करना बेहद मुश्किल बना देता है।

  • तीसरा, यह मिसाइल जरूरत पड़ने पर कम समय में फायरिंग पोज़िशन में लाई जा सकती है, जिससे भारत की जवाबी कार्रवाई की क्षमता कई गुना बढ़ जाती है।

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक भारत को चीन और पाकिस्तान दोनों के संदर्भ में सामरिक बढ़त दिलाने में मदद करेगी। रेल-आधारित लॉन्चिंग सिस्टम का विकास यह दर्शाता है कि भारत अब अपने मिसाइल कार्यक्रम को और अधिक लचीला, सुरक्षित और तेज बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

परीक्षण का स्थान और प्रक्रिया

रक्षा सूत्रों के मुताबिक अग्नि-प्राइम का यह सफल परीक्षण ओडिशा के बालासोर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) से किया गया। मिसाइल को विशेष रूप से तैयार रेल मोबाइल लॉन्चर से दागा गया और यह पूर्व निर्धारित पथ पर सटीकता से अपने लक्ष्य तक पहुंची। परीक्षण के दौरान रडार सिस्टम, टेलीमेट्री स्टेशन और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल ट्रैकिंग सिस्टम से मिसाइल की हर गतिविधि पर नजर रखी गई।

परीक्षण के दौरान मिसाइल ने सभी फ्लाइट पैरामीटरों को सफलतापूर्वक पूरा किया, जिसमें ऊंचाई, गति और लक्ष्यभेदी सटीकता शामिल है। DRDO वैज्ञानिकों ने बताया कि अग्नि-प्राइम मिसाइल ने अपनी पूरी उड़ान के दौरान बेहतरीन स्थिरता और सटीकता दिखाई।

रक्षा मंत्री का बयान और अंतरराष्ट्रीय संदेश

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफल परीक्षण पर वैज्ञानिकों और DRDO टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह भारत की आत्मनिर्भरता और स्वदेशी रक्षा निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा, “भारत की सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए हमारी सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। अग्नि-प्राइम मिसाइल का यह सफल परीक्षण हमारे वैज्ञानिकों की मेहनत और कौशल का प्रमाण है।”

रक्षा मंत्री ने आगे कहा कि इस मिसाइल का विकास और परीक्षण यह संदेश देता है कि भारत किसी भी परिस्थिति में अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा करने में सक्षम है। उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत की मिसाइल नीति पूरी तरह से “नो फर्स्ट यूज़” यानी पहले परमाणु हमला न करने की नीति पर आधारित है, लेकिन यदि कोई देश भारत की सुरक्षा को चुनौती देता है तो उसे मुंहतोड़ जवाब देने की क्षमता भारत के पास है।

सामरिक दृष्टि से महत्व

अग्नि-प्राइम मिसाइल का सफल परीक्षण केवल तकनीकी उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह भारत की सामरिक शक्ति को भी कई गुना बढ़ाता है। 2000 किलोमीटर की मारक क्षमता के साथ यह मिसाइल भारत को दक्षिण एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र में महत्वपूर्ण रणनीतिक बढ़त दिलाती है।

  • इस मिसाइल की रेंज पाकिस्तान के पूरे क्षेत्र को कवर करने में सक्षम है।

  • इसके अलावा चीन के कई सामरिक ठिकाने भी इसकी पहुंच में आ जाते हैं।

  • रेल-आधारित लॉन्चिंग सिस्टम के चलते यह मिसाइल अधिक सुरक्षित और अप्रत्याशित तरीके से तैनात की जा सकती है।

रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यह परीक्षण भारत की दूसरे हमले की क्षमता (Second Strike Capability) को मजबूत करता है, यानी अगर भारत पर पहले हमला होता है तो भी भारत के पास जवाबी कार्रवाई करने की पर्याप्त क्षमता बनी रहेगी।

पड़ोसी देशों की प्रतिक्रिया

भारत के इस परीक्षण पर अभी तक चीन या पाकिस्तान की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों देशों में इस परीक्षण को लेकर चिंता जरूर बढ़ेगी। पाकिस्तान पहले से ही भारत की अग्नि मिसाइल श्रृंखला को लेकर संवेदनशील रहा है, जबकि चीन भी भारत की बढ़ती सैन्य शक्ति पर नजर बनाए हुए है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के इस परीक्षण को उसकी आत्मनिर्भरता और तकनीकी प्रगति का संकेत माना जा रहा है। अमेरिका और रूस जैसे देश भारत की मिसाइल तकनीक को लेकर पहले ही सकारात्मक रुख दिखा चुके हैं।

भविष्य की योजनाएं और संदेश

रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार अग्नि-प्राइम मिसाइल का यह परीक्षण केवल शुरुआत है। आने वाले समय में इस मिसाइल का सीरियल प्रोडक्शन शुरू किया जाएगा और इसे भारतीय रणनीतिक बलों (Strategic Forces Command) में शामिल किया जाएगा। इसके अलावा इस तकनीक का उपयोग भविष्य में अन्य मिसाइलों और रक्षा प्रणालियों में भी किया जा सकता है।

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अब सिर्फ पारंपरिक सुरक्षा पर ही नहीं, बल्कि भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए अपने हथियारों और मिसाइलों को विकसित कर रहा है। अग्नि-प्राइम जैसी मिसाइलें भारत को किसी भी संभावित युद्ध स्थिति में निर्णायक बढ़त दिला सकती हैं।

दैनिक प्रभातवाणी

अग्नि-प्राइम मिसाइल का रेल-आधारित मोबाइल लॉन्चर से सफल परीक्षण भारत की रणनीतिक और तकनीकी क्षमता में एक नई छलांग है। यह केवल एक मिसाइल का परीक्षण नहीं, बल्कि यह संदेश है कि भारत अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाने को तैयार है। 2000 किलोमीटर की मारक क्षमता, तेज तैनाती और अत्याधुनिक तकनीक से लैस यह मिसाइल भारत को न केवल अपने पड़ोसी देशों के मुकाबले मजबूत बनाती है, बल्कि वैश्विक मंच पर भी उसकी स्थिति को और सशक्त करती है।

भारत की इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वैज्ञानिक क्षमता और स्वदेशी विकास के दम पर देश किसी भी चुनौती का सामना कर सकता है। आने वाले वर्षों में जब अग्नि-प्राइम मिसाइल भारतीय सामरिक बलों का हिस्सा बनेगी, तब यह देश की सुरक्षा को और भी अभेद्य बना देगी।